पेट्रोल-डीजल तो वही, फिर BS6 गाड़ी कम प्रदूषण कैसे फैलाती है? जानिए BS4 और BS6 में असली फर्क

पेट्रोल-डीजल वही, फिर BS6 गाड़ी BS4 के मुकाबले कम प्रदूषण कैसे फैलाती है? क्या इसके पीछे सिर्फ इंजन की तकनीक है या गाड़ी के अंदर कोई ऐसा सिस्टम लगा होता है जो जहरीली गैसों और बारीक कणों को रोकता है? जानिए BS4 और BS6 में असली अंतर और समझिए कैसे BS6 गाड़ियों में प्रदुषण को कम किया जाता है.

BS6 Norms

दिल्ली NCR में प्रदूषण को कम करने के लिए BS6 से नीचे के वाहनों पर नियम सख्त किए जा रहे हैं. (Image Credit-AI)

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दिल्ली-NCR में प्रदूषण को कम करने के लिए BS6 से नीचे के वाहनों पर नियम सख्त किए जा रहे हैं. 1 नवंबर 2026 से: दिल्ली में बाहर (दिल्ली के बाहर) रजिस्टर्ड और BS6 से नीचे की पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की एंट्री पर रोक लागू होगी. ऐसे में एक सवाल आपके मन में भी आ सकता है कि अगर BS4 और BS6 गाड़ियों में पेट्रोल-डीजल ही डाला जाता है, तो फिर BS6 गाड़ी कम प्रदूषण कैसे फैलाती है? क्या BS6 गाड़ी में कोई अलग तरह का ईंधन इस्तेमाल होता है? इसका जवाब है नहीं. 

BS4 और BS6 गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाला फ्यूल मूल रूप से पेट्रोल या डीजल ही है. असल में, अंतर फ्यूल में नहीं, बल्कि इंजन के अंदर ईंधन को जलाने के तरीके और धुएं को साफ करने वाली तकनीक (Exhaust Technology) में होता है. 

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3 मुख्य बातों से समझते हैं

1. धुआं साफ करने वाले स्पेशल फिल्टर्स (Advanced After-Treatment Systems)

यह सबसे बड़ा अंतर है. फ्लू जलने के बाद जो धुआं साइलेंसर से बाहर निकलता है, BS6 गाड़ियां उसे रास्ते में ही काफी हद तक साफ कर देती हैं, जबकि BS4 या उससे नीचे की गाड़ियों में यह तकनीक बहुत कमजोर होती है.

  • DPF (Diesel Particulate Filter)-BS6 गाड़ियों में यह फिल्टर लगा होता है, जो धुएं से निकलने वाले काले और जहरीले कणों (Particulate Matter या PM 2.5) को 80% से 90% तक सोख लेता है.
  • SCR (Selective Catalytic Reduction)- BS6 डीजल गाड़ियों में एक अलग टैंक होता है जिसमें AdBlue (यूरिया लिक्विड) डाला जाता है. यह लिक्विड धुएं के संपर्क में आकर सबसे खतरनाक गैस ‘नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx)’ को पानी और नाइट्रोजन (जो हवा में पहले से मौजूद है) में बदल देता है। BS4 गाड़ियों में यह सिस्टम नहीं होता.

2. इंजन का हाई-टेक फ्यूल इंजेक्शन (Fuel Injection System)

BS6 इंजन में कंप्यूटर-कंट्रोल्ड (Electronic) फ्यूल इंजेक्टर्स होते हैं. ये इंजेक्टर्स डीजल की एक-एक बूंद को बेहद बारीक धुंध (Fine Mist) में बदलकर इंजन के सिलेंडर में छिड़कते हैं. इससे पूरा डीजल पूरी तरह से जल जाता है (Complete Combustion). इसके उलट, पुरानी गाड़ियों में डीजल पूरी तरह नहीं जल पाता था, जिससे अधजला डीजल काले धुएं के रूप में बाहर आता था.

3. सल्फर और प्रदूषण का हिसाब

पहले के इंजनों को चलने के लिए डीजल में ज्यादा सल्फर (Sulfur) की जरूरत होती थी क्योंकि वह इंजन के पार्ट्स के लिए लुब्रिकेंट का काम करता था. लेकिन सल्फर जलने पर भयंकर प्रदूषण फैलाता है. आधुनिक BS6 इंजन इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि वे Ultra-Low Sulfur Diesel (10 ppm) पर आसानी से चल सकें. जब पुराने इंजन वाले वाहनों में यह लो-सल्फर डीजल जाता है, तब भी उनके पास वह आधुनिक फिल्टर (DPF और SCR) नहीं होते जो नाइट्रोजन ऑक्साइड और बारीक कणों को रोक सकें। इसी वजह से वे BS6 के मुकाबले कई गुना ज्यादा प्रदूषण पैदा करते हैं.

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तो क्या BS4 गाड़ी ज्यादा प्रदूषण करती है?

यह कहना सही नहीं होगा कि सड़क पर चलने वाली हर BS4 गाड़ी हर परिस्थिति में हर BS6 गाड़ी से ज्यादा प्रदूषण करेगी. गाड़ी की उम्र, मेंटेनेंस, ड्राइविंग स्टाइल और इमिशन कंट्रोल सिस्टम की हालत भी काफी मायने रखते हैं. 

लेकिन BS6 वाहनों को शुरुआत से ही BS6 के ज्यादा सख्त इमिशन स्टैंडर्ड को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है. यही वजह है कि कॉम्बुशन कंट्रोल, एग्जॉस्ट ट्रीटमेंट और फ्यूल क्वालिटी को मिलाकर प्रदूषण कम करने की कोशिश की जाती है.

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आसान भाषा में समझिए 

इसे ऐसे समझिए BS4 और BS6 दोनों में खाना यानी पेट्रोल-डीजल वही है, लेकिन BS6 में खाना पकाने और धुआं बाहर निकालने की व्यवस्था ज्यादा बेहतर है. BS4 में प्रदूषण को नियंत्रित करने की तकनीक अपने समय के नियमों के हिसाब से थी, जबकि BS6 में ज्यादा सख्त इमिशन लिमिट्स को पूरा करने के लिए इंजन, फ्यूल इंजेक्शन, सेंसर्स और एग्जॉस्ट अफ्टर ट्रिटमेंट जैसे सिस्टम को ज्यादा एडवांस बनाया गया.

इसलिए BS6 का मतलब यह नहीं है कि इसमें पेट्रोल-डीजल कम प्रदूषण करता है, बल्कि इसका मतलब है कि ईंधन को ज्यादा नियंत्रित तरीके से जलाने और उससे बनने वाले प्रदूषकों को बाहर निकलने से पहले कम करने की पूरी व्यवस्था ज्यादा एडवांस है.

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BS4 और BS6 गाड़ियों कौन-सी होती है?

BS4 और BS6 गाड़ियों को आसान भाषा में समझें तो अप्रैल 2020 से पहले बनी ज्यादातर पेट्रोल-डीजल गाड़ियां BS4 होती हैं, जबकि 1 अप्रैल 2020 के बाद नई गाड़ियां BS6 उत्सर्जन मानक के हिसाब से आने लगीं. उदाहरण के लिए 2018-19 में खरीदी गई Maruti Swift, Hyundai Creta या Tata Nexon आमतौर पर BS4 हो सकती हैं, जबकि 2021 की इन्हीं मॉडलों की गाड़ियां BS6 होंगी. हालांकि सिर्फ गाड़ी का मॉडल और साल देखकर पक्का नहीं कहा जा सकता, क्योंकि एक ही मॉडल अलग-अलग समय पर अलग इमिशन नॉर्म के साथ आया हो सकता है. 

कैसे पहचानें गाड़ी BS4 है या BS6 ?

अपनी गाड़ी BS4 है या BS6, यह जानने का सबसे सही तरीका RC में लिखे Emission Norms को देखना है. इसमें Bharat Stage IV लिखा है तो गाड़ी BS4 है और Bharat Stage VI लिखा है तो BS6.

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Source- PPAC
Source- morth

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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