Bhagwan Shiv: हिंदू धर्म में भगवान शिव को सबसे सौम्य और उदार देवता माना गया है। वह जिस पर भी प्रसन्न होते हैं, उसे कोई भी मनचाहा वर दे देते हैं। यही कारण है, पूरी सृष्टि में सभी योनियों के जीव जिनमें मनुष्य, देवता और राक्षस भी शामिल हैं, उनकी पूजा करते हैं।

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आचार्य अनुपम जौली के अनुसार भोलेनाथ की पूजा का कोई विशेष विधान नहीं है। आप सच्चे मन से जैसे चाहे, उनकी पूजा करें, वह प्रसन्न हो ही जाते हैं। फिर भी उनकी आराधना में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। जानिए क्या हैं ये बातें

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शिवजी की पूजा में ध्यान रखें ये बातें (Bhagwan Shiv Puja Vidhi)

सिंदूर

भगवान शिव की पूजा में कभी भी सिंदूर या रोली का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसे राजसी और सौभाग्यकारक माना जाता है, जबकि शिव वैरागी है, अतः वह इससे दूर रहते हैं।

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शंख से जलाभिषेक

भगवान विष्णु तथा उनके समस्त अवतारों का जलाभिषेक शंख से किया जाता है। परन्तु शिव का जलाभिषेक करने के लिए सींगनुमा पात्र का प्रयोग होता है। महादेव की पूजा में शंख के बजाय डमरू का प्रयोग किया जाता है और उसी को बजाया जाता है।

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सफेद चंदन

भगवान आशुतोष को हमेशा सफेद चंदन का तिलक लगाया जाता है। उनकी पूजा में कभी भी पीले या लाल चंदन का प्रयोग न करें। ध्यान रखें कि लाल चंदन का प्रयोग गणेश जी तथा भगवती आद्यशक्ति की पूजा में किया जाता है। इसी प्रकार पीले चंदन का प्रयोग भगवान विष्णु तथा उनके अवतारों की पूजा में किया जाता है।

तुलसी पत्र

कभी भी हनुमानजी और भगवान विष्णु तथा उनके अवतारों के अतिरिक्त अन्य किसी देवता की पूजा में तुलसी पत्र का प्रयोग नहीं करना चाहिए। भगवान शिव को भूल कर भी तुलसी न चढ़ाएं। इससे दोष लगता है और अशुभ असर मिलता है।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।

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