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दावोस में ही क्यों जुटते हैं दुनिया के ताकतवर नेता? जानिए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में किन मुद्दों पर होती है चर्चा

दुनियाभर की अर्थव्यवस्था और भविष्य की नीतियों को लेकर स्विट्जरलैंड का दावोस शहर चर्चा का केंद्र बना हुआ है. आइए समझते हैं कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की इस बैठक का असली मकसद क्या है?

Author Written By: Raja Alam Updated: Jan 21, 2026 16:57

स्विट्जरलैंड के छोटे से शहर दावोस में हर साल होने वाली वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक दुनिया का सबसे प्रभावशाली आर्थिक और राजनीतिक मंच बन चुकी है. इसकी स्थापना 1971 में जर्मन प्रोफेसर क्लॉस श्वाब ने की थी ताकि वैश्विक चुनौतियों का समाधान मिलकर निकाला जा सके. दावोस का चयन इसकी ऊंचाई और प्राकृतिक शांति के कारण किया गया था ताकि दुनिया के नेता शोर-शराबे से दूर गंभीर मुद्दों पर चर्चा कर सकें. यह शहर यूरोप के सबसे ऊंचे शहरों में गिना जाता है जो अपनी बर्फबारी और स्कीइंग के लिए भी मशहूर है. आज यह संस्था एक गैर-लाभकारी इकाई के रूप में काम करती है जिसकी फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट को दुनिया भर की सरकारें अपनी नीतियों में शामिल करती हैं.

ट्रंप की जिद और दावोस में बढ़ती हलचल

इस बार की दावोस बैठक बेहद खास है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को हथियाने की अपनी जिद और नाटो देशों को दी गई धमकियों के बीच यहां पहुंच रहे हैं. डेनमार्क और यूरोप के ज्यादातर देश नाटो के सदस्य हैं जिससे ट्रंप का यह दौरा काफी तनावपूर्ण माना जा रहा है. दुनिया भर की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ट्रंप यहां कौन सा नया जुबानी बम फोड़ते हैं क्योंकि ग्रीनलैंड पर उनके दावों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों को चुनौती दी है. सुरक्षा के लिहाज से स्विस सेना के हजारों जवान इस छोटे से शहर को छावनी में बदल देते हैं ताकि दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. यह मंच न केवल व्यापार बल्कि युद्ध और शांति जैसे बड़े कूटनीतिक फैसलों का भी गवाह बनता है.

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भारत की मजबूत मौजूदगी और दिग्गज उद्योगपतियों का मिशन

भारत के लिए दावोस का मंच विदेशी निवेश आकर्षित करने का सबसे बड़ा अवसर होता है जहां केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. इस साल भारत के दिग्गज उद्योगपति जैसे टाटा समूह के एन चंद्रशेखरन, सुनील मित्तल और सलिल पारीख राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात करने वाले थे ताकि भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर चर्चा हो सके. विकासशील देशों के लिए यह एक ऐसा ग्लोबल प्लेटफॉर्म है जहां वे अपनी आर्थिक संभावनाओं को दुनिया के सामने रखते हैं. यहां होने वाली नेटवर्किंग से बड़ी कंपनियों को नए व्यावसायिक संबंध बनाने और स्टार्टअप्स को ग्लोबल निवेशक खोजने में मदद मिलती है. भारत अपनी तकनीकी ताकत और बाजार की क्षमता को दिखाकर यहां से बड़े निवेश के रास्ते खोलता है.

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दावोस बैठक के फायदे और इस पर उठते सवाल

दावोस में जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और वैश्विक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर पैनल डिस्कशन और सेमिनार होते हैं जिसका असर सीधे विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. हालांकि इस मंच की आलोचना भी होती है क्योंकि कुछ लोग इसे सिर्फ अमीर और शक्तिशाली लोगों का एक खास क्लब मानते हैं. पर्यावरणविद् भी इतने बड़े आयोजन में होने वाले कार्बन उत्सर्जन को लेकर सवाल उठाते हैं लेकिन इसके प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता. यहां होने वाली अनौपचारिक बातचीत कई बार बड़े देशों के बीच के तनाव को कम करने में मदद करती है. कुल मिलाकर दावोस एक ऐसा केंद्र है जहां से निकलने वाले विचार भविष्य की वैश्विक नीतियों की दिशा और दशा तय करते हैं.

First published on: Jan 21, 2026 04:40 PM

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