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आखिर क्या होता है डीप स्टेट? वेनेजुएला, बांग्लादेश और ईरान के बहाने क्यों फिर तेज हुई इसकी चर्चा

वेनेजुएला, बांग्लादेश और ईरान में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बीच डीप स्टेट की चर्चा फिर तेज हो गई है. सत्ता परिवर्तन, आंदोलनों और विदेशी प्रभाव के आरोपों ने इस शब्द को एक बार फिर वैश्विक बहस के केंद्र में ला दिया है.

Author Written By: Raja Alam Updated: Jan 9, 2026 16:36

दुनिया के कई देशों में हाल के वर्षों में सत्ता को लेकर बड़े और नाटकीय बदलाव देखने को मिले हैं. वेनेजुएला में इस समय अमेरिकी प्रभाव की चर्चा जोरों पर है. वहां के तेल उत्पादन पर अमेरिका के नियंत्रण की बातें कही जा रही हैं. राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के बारे में भी कहा जा रहा है कि वे अमेरिका के दबाव में हैं और उनके खिलाफ अमेरिकी अदालत में मामला चल रहा है. इसी तरह ईरान में अयातुल्लाह खामेनेई के शासन के खिलाफ आंदोलन चल रहे हैं. सीरिया में सरकार बदल चुकी है और अब अमेरिका से उसके रिश्ते बेहतर बताए जा रहे हैं. बांग्लादेश में शेख हसीना देश से बाहर हैं और अंतरिम तौर पर मोहम्मद युनूस ने सत्ता संभाल रखी है.

क्या होता है डीप स्टेट का मतलब?

इन सभी घटनाओं के बीच एक बार फिर डीप स्टेट शब्द चर्चा में आ गया है. डीप स्टेट का मतलब उस स्थिति से लगाया जाता है जब किसी देश की शासन व्यवस्था में बाहरी ताकतों या उनसे प्रेरित लोगों की गहरी दखल हो जाती है. यह भी कहा जाता है कि जब किसी ताकतवर देश के इशारे पर स्थानीय लोगों को अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़ा किया जाए तो उसे डीप स्टेट की कार्रवाई माना जाता है. डीप स्टेट नाम से ही संकेत मिलता है कि इसकी जड़ें बहुत गहरी होती हैं. आमतौर पर इस शब्द को अमेरिका से जोड़कर देखा जाता है. आरोप लगाए जाते हैं कि अमेरिका अपने हित साधने के लिए कई देशों में सत्ता परिवर्तन की कोशिश करता है.

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ईरान और डीप स्टेट की बढ़ती चर्चा

ईरान के मामले में भी डीप स्टेट की चर्चा तेज हो गई है. वहां निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी का नाम सामने आ रहा है. ईरान में जो आंदोलन चल रहे हैं उनमें उनका नाम उछाला जा रहा है. रजा पहलवी के अमेरिका से करीबी संबंध माने जाते हैं. इसी वजह से कहा जा रहा है कि ईरान में भी सत्ता परिवर्तन की जमीन तैयार की जा रही है. डीप स्टेट का असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहता. इसका मकसद किसी देश की सत्ता, खुफिया एजेंसियों और सैन्य बलों को प्रभावित करना होता है. अक्सर उदार मूल्यों, अभिव्यक्ति की आजादी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को सामने रखकर माहौल बनाया जाता है.

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नैरेटिव बदलने का तरीका और उदाहरण

डीप स्टेट किस तरह काम करता है इस पर कई किताबें और अध्ययन मौजूद हैं. स्टीफन किंजर की किताब Overthrow में इसका विस्तार से जिक्र मिलता है. इसमें बताया गया है कि कैसे थिंक टैंक, एनजीओ और चुनिंदा मीडिया का इस्तेमाल कर जनता की सोच बदली जाती है. धीरे धीरे सरकार के खिलाफ माहौल तैयार होता है और आंदोलन की स्थिति बन जाती है. पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन के बाद इमरान खान ने भी ऐसे ही आरोप लगाए थे. उनका कहना था कि अमेरिका के इशारे पर विपक्ष और सेना ने मिलकर उनकी सरकार गिराई. बाद में सेना प्रमुख आसिम मुनीर की अमेरिका से नजदीकियां भी इन चर्चाओं को और हवा देती दिखीं.

First published on: Jan 09, 2026 04:35 PM

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