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ट्रंप को आया गुस्सा, चीन को दी धमकी, जानें अब दोनों के बीच क्यों हुआ विवाद?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को एक बार फिर चेतावनी दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि चीन रेयर अर्थ मिनरल्स पर निर्यात नियंत्रण लगाने की तैयारी कर रहा है, जो वैश्विक बाजारों को प्रभावित करेगा. ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आलोचना करते हुए कहा कि चीन का यह कदम दुनिया को “बंदी” बनाने जैसा है.

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चीन और ताइवान के बीच काफी समय से विवाद चल रहा है.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से चीन को धमकी दी है. सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में डोनाल्ड ट्रंप ने महत्वपूर्ण दुर्लभ मृदा खनिजों पर निर्यात नियंत्रण लगाने के चीन के बढ़ते प्रयासों की चीनी नेता शी जिनपिंग की आलोचना की और अधिक टैरिफ लगाने की धमकी दी. ट्रंप ने इतना भी कह दिया कि अब उन्हें इस महीने के अंत में निर्धारित यात्रा के दौरान शी जिनपिंग से मिलने का कोई कारण नहीं दिखता.

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि चीन में कुछ बहुत ही अजीबोगरीब चीजें हो रही हैं. वे बहुत आक्रामक हो रहे हैं और दुनिया भर के देशों को पत्र भेज रहे हैं कि वे रेयर अर्थ से जुड़े हर उत्पादन पर और किसी भी अन्य चीज़ पर, जिसके बारे में वे सोच सकते हैं, निर्यात नियंत्रण लगाना चाहते हैं, भले ही वह चीन में निर्मित न हो. ट्रंप ने कहा कि किसी ने भी ऐसा कुछ पहले कभी नहीं देखा है, लेकिन यह बाजारों को रोकेगा. ये दुनिया के लगभग और खासकर चीन के लिए जीवन कठिन बना देगा.

इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर आर्थिक दंड की भी धमकी दी और चेतावनी दी कि चीन ने जो आदेश जारी किया है, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में मैं उनके कदम का आर्थिक रूप से विरोध करने के लिए बाध्य हो जाऊंगा.

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ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मुझे हमेशा से लगता रहा है कि वे घात लगाए बैठे हैं और अब हमेशा की तरह मैं सही साबित हुआ हूं! चीन को दुनिया को “बंदी” बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती, लेकिन ऐसा लगता है कि उनकी योजना काफी समय से यही थी, जिसकी शुरुआत “मैग्नेट” और दूसरे तत्वों से हुई है, यह एक भयावह और शत्रुतापूर्ण कदम है लेकिन अमेरिका के पास भी एकाधिकार की स्थिति है, जो चीन की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत और दूरगामी है. मैंने बस उनका इस्तेमाल करने का फैसला नहीं किया, मेरे पास अब तक ऐसा करने का कोई कारण ही नहीं था.

यह भी पढ़ें: ट्रंप को नोबेल न मिलने पर क्या बोले पुतिन, नेतन्याहू भी हुए निराश

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उन्होंने आगे लिखा कि उन्होंने जो पत्र भेजा है वह कई पन्नों का है और उसमें हर उस तत्व विस्तार से जानकारी है जिसे वे अन्य देशों से छिपाना चाहते हैं. मैंने राष्ट्रपति शी से बात नहीं की है क्योंकि ऐसा करने का कोई कारण नहीं था. यह न केवल मेरे लिए, बल्कि स्वतंत्र विश्व के सभी नेताओं के लिए एक बड़ा आश्चर्य था. मुझे दो हफ्ते बाद दक्षिण कोरिया में APEC में राष्ट्रपति शी से मिलना था, लेकिन अब ऐसा करने का कोई कारण नहीं दिखता.

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