India Russia Oil Import Halt Impact: भारत और अमेरिका के बीच तेल व्यापार समझौता हुआ है. इसके बदले में अमेरिका ने भारत पर लगा टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रेड डील की घोषणा करते हुए दावा किया कि अब भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, बल्कि अमेरिका और वेनेजुएला से खरीदेगा. हालांकि इस पर अभी तक केंद्र सरकार ने कुछ स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन तेल कंपनियों में हड़कंप मचा हुआ है.
यह भी पढ़ें: क्या वाकई रूस से तेल नहीं खरीदेगा भारत? टूट जाएगी पुतिन से सालों पुरानी दोस्ती, क्या कहती है सरकार?
एकदम से तेल खरीद बंद न करने की अपील
चर्चा है कि तेल कंपनियों ने केंद्र सरकार से विशेष अपील की है. तेल कंपनियों का कहना है कि केंद्र सरकार को रूसी तेल की खरीद एकदम से बंद नहीं करनी चाहिए. एक से दूसरे देश की कंपनियों से डील सेट करने में समय लगेगा. बदलती व्यापारिक परिस्थितियों में एडजस्ट करने के लिए भी टाइम चाहिए. फरवरी के लिए जो ऑयल बुक किया हुआ है, उसकी डिलीवरी अब पहुंच रही है, इसलिए नई कंपनी से डील करने को टाइम चाहिए.
सरकार ने न प्रतिक्रिया दी न आदेश जारी किया
बता दें कि केंद्र सरकार ने अभी तक भारत-रूस तेल खरीद पर न तो कोई प्रतिक्रिया व्यक्त की है और न ही रूसी तेल खरीद बंद करने के लिए औपचारिक आदेश जारी किया है. वैसे भी भारत गुट निरपेक्ष देश है, इसलिए भारत अब रूस और अमेरिका के साथ संतुलन बनाकर चलेगा. तेल की खरीद बंद होने का मतलब यह नहीं होगा कि रूस के साथ संबंध खराब हो जाएंगे. वहीं ऐसा नहीं कि कह दिया और व्यापार बंद हो गया, समय के साथ चीजें की जाएंगी.
यह भी पढ़ें: टैरिफ 25 से 18 करने को कैसे माने ट्रंप? भारत से ट्रेड डील का वेनेजुएला-यूक्रेन से क्या कनेक्शन, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
अचानक खरीद बंद न करने की मांग की ये वजह
बता दें कि रूस से तेल खरीद बंद करने के मामले में भारतीय कंपनियों के सामने कुछ टेक्निकल और व्यापारिक अड़चनें आएंगी. जैसे पहले से बुक तेल की डिलीवरी मार्च में पहुंचेगी, जिसका लेन-देन पूरा करने में समय लगेगा. नयारा एनर्जी में कच्चे तेल का बड़ा संकट गहरा जाएगा, क्योंकि यह कंपनी रूस के तेल पर ही निर्भर है. ईराक और सऊदी अरब अब नायरा के साथ डील नहीं कर रही हैं. अप्रैल में मेंटेनेंस के लिए रिफाइनरी बंद भी हो रही है.
India Russia Oil Import Halt Impact: भारत और अमेरिका के बीच तेल व्यापार समझौता हुआ है. इसके बदले में अमेरिका ने भारत पर लगा टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रेड डील की घोषणा करते हुए दावा किया कि अब भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, बल्कि अमेरिका और वेनेजुएला से खरीदेगा. हालांकि इस पर अभी तक केंद्र सरकार ने कुछ स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन तेल कंपनियों में हड़कंप मचा हुआ है.
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एकदम से तेल खरीद बंद न करने की अपील
चर्चा है कि तेल कंपनियों ने केंद्र सरकार से विशेष अपील की है. तेल कंपनियों का कहना है कि केंद्र सरकार को रूसी तेल की खरीद एकदम से बंद नहीं करनी चाहिए. एक से दूसरे देश की कंपनियों से डील सेट करने में समय लगेगा. बदलती व्यापारिक परिस्थितियों में एडजस्ट करने के लिए भी टाइम चाहिए. फरवरी के लिए जो ऑयल बुक किया हुआ है, उसकी डिलीवरी अब पहुंच रही है, इसलिए नई कंपनी से डील करने को टाइम चाहिए.
सरकार ने न प्रतिक्रिया दी न आदेश जारी किया
बता दें कि केंद्र सरकार ने अभी तक भारत-रूस तेल खरीद पर न तो कोई प्रतिक्रिया व्यक्त की है और न ही रूसी तेल खरीद बंद करने के लिए औपचारिक आदेश जारी किया है. वैसे भी भारत गुट निरपेक्ष देश है, इसलिए भारत अब रूस और अमेरिका के साथ संतुलन बनाकर चलेगा. तेल की खरीद बंद होने का मतलब यह नहीं होगा कि रूस के साथ संबंध खराब हो जाएंगे. वहीं ऐसा नहीं कि कह दिया और व्यापार बंद हो गया, समय के साथ चीजें की जाएंगी.
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अचानक खरीद बंद न करने की मांग की ये वजह
बता दें कि रूस से तेल खरीद बंद करने के मामले में भारतीय कंपनियों के सामने कुछ टेक्निकल और व्यापारिक अड़चनें आएंगी. जैसे पहले से बुक तेल की डिलीवरी मार्च में पहुंचेगी, जिसका लेन-देन पूरा करने में समय लगेगा. नयारा एनर्जी में कच्चे तेल का बड़ा संकट गहरा जाएगा, क्योंकि यह कंपनी रूस के तेल पर ही निर्भर है. ईराक और सऊदी अरब अब नायरा के साथ डील नहीं कर रही हैं. अप्रैल में मेंटेनेंस के लिए रिफाइनरी बंद भी हो रही है.