PM मोदी के निकलते ही ईरान पर टूट पड़े नेतन्याहू, इजरायल ने बताया क्यों इसी समय शुरू हुआ हमला

इजरायली राजदूत ने खुलासा किया है कि ईरान पर हमला पीएम मोदी की रवानगी के बाद मिला एक ‘ऑपरेशनल अवसर’ था. इजरायल ने F-35 और लेजर तकनीक से ईरान को दहला दिया है.

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भारत में इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने ईरान पर हुए भीषण हमले को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने साफ किया कि यह हमला किसी पुरानी योजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल से रवाना होने के बाद मिला एक ‘ऑपरेशनल अवसर’ था. 26 फरवरी को पीएम मोदी और नेतन्याहू के बीच ऐतिहासिक द्विपक्षीय वार्ता हुई थी, जिसमें 17 अहम समझौतों पर मुहर लगी थी. राजदूत के मुताबिक, उस समय इजरायल को खुद भी इस हमले की जानकारी नहीं थी. मोदी के जाते ही शनिवार सुबह सुरक्षा कैबिनेट से मंजूरी ली गई और अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया.

दशकों का निवेश और खुफिया जानकारी का कमाल

इजरायल ने ईरान की सैन्य मशीनरी और उनके कमांडरों की सटीक लोकेशन पता करने के लिए पिछले कई सालों में अरबों डॉलर खर्च किए हैं. राजदूत अजार ने बताया कि यह हमला इजरायल की दशकों लंबी खुफिया तैयारी का नतीजा है. इजरायली सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने के लिए खास तकनीक विकसित की थी. इस पूरे ऑपरेशन में इजरायल और अमेरिका ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के साथ तालमेल और समुद्र में मौजूद अमेरिकी नौसेना की ताकत ने इस मिशन को और भी घातक बना दिया. ईरान के मिसाइल उत्पादन केंद्रों और बैलिस्टिक मिसाइल लांचरों पर भारी बमबारी की गई.

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आयरन बीम और फिफ्थ जनरेशन वारफेयर

इस महायुद्ध में इजरायल ने दुनिया की सबसे आधुनिक सैन्य तकनीकों का प्रदर्शन किया है. हमले के लिए अमेरिका के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान F-35 और F-16 का इस्तेमाल किया गया. सबसे खास बात ‘आयरन बीम’ लेजर सिस्टम की रही, जिसने ईरान की ओर से आने वाले ड्रोन और रॉकेटों को पलक झपकते ही हवा में राख कर दिया. बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए ‘एरो 3’ और ‘डेविड्स स्लिंग’ जैसी उन्नत प्रणालियों का उपयोग हुआ. इन सभी डिफेंस सिस्टम को रीयल-टाइम में जोड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली गई, जिससे बिना किसी देरी के सटीक फैसले लिए जा सके.

खामेनेई के बाद का ईरान का भविष्य

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अब वहां के भविष्य पर सबकी नजरें टिकी हैं. इजरायली राजदूत ने स्पष्ट किया कि ईरान पर कौन राज करेगा, यह इजरायल तय नहीं करेगा बल्कि वहां की जनता को ही फैसला लेना है. इजरायली हमलों का मुख्य लक्ष्य ईरान की उस ‘बसीज’ सेना को कमजोर करना था जो वहां के आम लोगों को डराने और दबाने का काम करती है. अजार ने कहा कि ईरानी लोग आजादी के हकदार हैं और इजरायल को उम्मीद है कि इस सैन्य कार्रवाई के बाद वहां के लोग अपने देश की स्थिति बदलने में कामयाब होंगे. हालांकि इस जंग में इजरायल को भी नुकसान हुआ है और एक ईरानी मिसाइल गिरने से 9 नागरिकों की मौत हुई है.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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