पाकिस्तान के बहावलपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के सबसे बड़े भाई ताहिर अनवर की संदिग्ध हालात में मौत हो गई है. सोमवार 30 मार्च 2026 की शाम को हुई इस मौत ने पाकिस्तान के आतंकी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है क्योंकि ताहिर अनवर जैश के सैन्य मामलों का प्रमुख था. वह साल 2001 से आतंकियों की ट्रेनिंग और नए ट्रेनिंग कैंप लगाने की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहा था. 62 साल का ताहिर अनवर अपने 12 भाई-बहनों में सबसे बड़ा था और आतंकी दुनिया में आने से पहले मुर्गी पालन का काम करता था. फिलहाल वह जैश के नए हेडक्वार्टर ‘मरकज उस्मान ओ अली’ में अपने परिवार के साथ रह रहा था.
हेडक्वार्टर में गुपचुप तरीके से हुआ जनाजा
ताहिर अनवर की मौत के बाद जैश के नए हेडक्वार्टर में कड़ी सुरक्षा के बीच नमाज-ए-जनाजा पढ़ा गया जिसमें मसूद अजहर समेत परिवार के सभी बड़े आतंकी शामिल हुए. भारतीय समयानुसार रात करीब साढ़े 11 बजे हुए इस कार्यक्रम में इब्राहिम अजहर, तल्हा अल सैफ और अब्दुर रऊफ जैसे कुख्यात नाम मौजूद थे. ताहिर न सिर्फ आतंकियों को ट्रेनिंग देता था बल्कि जैश के लिए हथियारों की खरीद-फरोख्त का सारा हिसाब-किताब भी उसी के पास रहता था. मसूद का सबसे भरोसापात्र होने के कारण वह संगठन की हर आतंकी गतिविधि की रीढ़ माना जाता था. उसकी मौत को जैश के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि वह संगठन के पुराने और अनुभवी चेहरों में से एक था.
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ऑपरेशन सिंदूर में बाल-बाल बची थी जान
ताहिर अनवर का नाम भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर लंबे समय से था और वह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बाल-बाल बचा था. सूत्रों की मानें तो मरकज सुभानल्लाह में भारतीय वायुसेना की एयरस्ट्राइक के दौरान ताहिर और उसका बेटा हम्माद गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उस समय तो उसकी जान बच गई थी लेकिन अब सोमवार की शाम करीब 6 बजे उसने अज्ञात परिस्थितियों में दम तोड़ दिया. पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर भी उसकी मौत की खबर तेजी से वायरल हो रही है जहाँ लोग उसे हकीम मोहम्मद ताहिर अनवर के नाम से संबोधित कर रहे हैं. हालांकि मौत की असली वजह क्या है इसे लेकर अभी भी रहस्य बना हुआ है और किसी भी आधिकारिक एजेंसी ने इसकी पुष्टि नहीं की है.
जैश के भीतर छिड़ सकती है वर्चस्व की जंग
ताहिर अनवर की मौत के बाद अब जैश-ए-मोहम्मद के भीतर सैन्य कमान को लेकर खींचतान शुरू होने की संभावना जताई जा रही है. चूंकि वह मसूद अजहर का सबसे बड़ा भाई था इसलिए संगठन के भीतर उसका दबदबा बहुत ज्यादा था और सभी आतंकी गुट उसकी बात मानते थे. अब उसकी जगह कौन लेगा और जैश की आतंकी गतिविधियों पर इसका क्या असर पड़ेगा इस पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पैनी नजर रखे हुए हैं. पाकिस्तान में छिपे बैठे मसूद अजहर के लिए अपने भाई को खोना एक निजी क्षति के साथ-साथ रणनीतिक हार भी है. आने वाले दिनों में बहावलपुर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की आंतरिक कलह को रोका जा सके.










