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क्या नेपाल में भूकंप के कारण आई ‘प्रलय’ या तिब्बत में ग्लेशियर फटने से मची तबाही? जानें क्या कहते हैं वैज्ञानिक

नेपाल में अचानक आई बाढ़ का कारण भूकंप है या ग्लेशियर का फटना है? इसे लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक असमंजस में हैं. लेकिन नेपाल में प्राकृतिक आपदा का कारण एवलांच को माना जा रहा है, जिसके कारण ग्लेशियर फटा और भूकंप भी आया.

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नेपाल में 26 अगस्त की सुबह अचानक आई प्राकृतिक आपदा बाढ़ का सबसे बड़ा कारण एवलांच और ग्लेशियर का फटना है, भूकंप नहीं. यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने यह स्पष्ट किया है. (USGS) के अनुसार, नेपाल में तिब्बत सीमा एवलांच हुआ और ग्लेशियर फटा, जिससे 5.2 तीव्रता वाले भूकंप के सीस्मिस सिग्नल पैदा हुए. एवलांच होते ही ग्लेशियर का एक हिस्सा ढह गया, जिससे भारी मात्रा में बर्फ, चट्टानें, कीचड़ और पानी भोटेकोशी नदी की सहायक नदी ‘ल्हेन्डे खोला’ में आया.

एवलांच के बाद ग्लेशियर फटने से ही भूकंप आया

एवलांच इतना शक्तिशाली था कि ग्लेशियर धमाके साथ फटा. नेपाल के समय अनुसार गुरुवार सुबह 8:37 बजे, काठमांडू के उत्तर में नेपाल-चीन सीमा के पास भूकंप आया. सैटेलाइट इमेज में देखा गया कि बर्फ और चट्टानों के टूटने से नेपाल-चीन रसुवागढ़ी सीमा चौकी से लगभग 20 किलोमीटर (12 मील) उत्तर-पूर्व में स्थित ल्हेन्डे नदी में भारती मलबे के साथ बाढ़ आई. ल्हेन्डे खोला नदी, भोटे कोशी नदी की सहायक नदी है, जो चीन से नेपाल में बहती है और भारत में गंडक बनकर बहती है.

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भूकंप और ग्लेशियर फटने से नेपाल में बाढ़ आई

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बीते दिन बताया था कि स्थानीय समय के अनुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत में रिक्टर स्केल पर 5.2 की तीव्रता का भूकंप आया, जिसके बाद 3 मिनट के अंदर नेपाल में बाढ़ आ गई. भूकंप के झटकों की वजह से ही ग्लेशियर फटा और बाढ़ आई. लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण का कहना है कि तिब्बत में सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र गोसाईंकुंडा से 47 किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में था. जर्मन रिसर्च सेंटर फार जियोसाइंसेज (GFJ) के अनुसार, बाढ़ आने से 7 मिनट पहले 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था.

ग्लेशियर फटने से भोटेकोशी नदी में बाढ़ आ गई

सैटेलाइट इमेज में देखा गया है कि ग्लेशियर फटने से भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आई, जिससे तिब्बत की सीमा से सटे नेपाल के रासुवा और धादिंग जिले डूब गए. नेपाल-तिब्बत सीमा पर लेन्डे नदी में जलस्तर बढ़ा और तिमुरे से होते हुए बाढ़ का पानी और मलबा त्रिशूली नदी में भर गया. इसके बाद बाढ़ का पानी और मलबा नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं, नवलपरासी जिलों में भर गया. राजधानी काठमांडू के आस-पास 70 से 200 किलोमीटर तक का एरिया बाढ़ में डूबा है. लेकिन ग्लेशियर का पूरा पानी अभी तक बाहर नहीं आया है. इसलिए भोटेकोशी और त्रिशूली में खतरा बरकरार है.

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चीन का बांध भी हो सकता है बाढ़ आने की वजह

रणनीतिक विचारक, लेखक और टिप्पणीकार डॉ ब्रह्मा चेलानी कहते हैं कि दुनिया सोच रही है कि एवलांच हुआ ग्लेशियर फटा भूकंप आया, साथ में मलबा और पानी आने से नेपाल में बाढ़ आई. लेकिन इस घटनाक्रम में चीन वाले पॉइंट पर ध्यान नहीं गया है कि चीन हिमालय के भूकंपीय इलाके में दुनिया का सबसे बड़ा बांध बना रहा है. भारत-तिब्बत सीमा के पास बन रहा प्रोजेक्ट वाटर बम जैसा है, जो भारत के पूर्वोत्तर के 8 राज्यों को डुबो सकता है और बांग्लादेश में भी भारी तबाही मचा सकता है. ऐसे में हो सकता हैं कि बांध निर्माण के लिए चल रही गतिविधियों के कारण नेपाल में बाढ़ आई हो.

First published on: Aug 27, 2026 08:13 AM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं Mphil कोर्स किया है। 13 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री से जुड़ी हैं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के माल‍िकाना हक वाले News 24 हिंदी डिजिटल विंग में बतौर चीफ सब एडिटर सेवाएं दे रही हैं। यहां की कोर टीम का हिस्सा हैं और नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम, यूटिलिटी, एजुकेशन, फीचर आदि विषयों पर अच्छी पकड़ रखती हैं।

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