Britain Entry in War: आखिरकार मिडिल ईस्ट की जंग में ब्रिटेन की एंट्री हो ही गई। जी हां, ईरान के बाद होर्मुज में महायुद्ध की दस्तक के बीच ब्रिटेन ने बड़ा फैसला लिया है। ब्रिटेन की कीर स्टार्मर सरकार ने अमेरिका को ब्रिटिश मिलिट्री बेस इस्तेमाल करने की परमिशन दे दी है। अब अमेरिका ब्रिटेन के मिलिट्री बेस से ईरान पर हमले कर सकता है। ईरान के उन ठिकानों को निशाना बना सकता है, जहां से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले किए जा रहे हैं।
🚨 WATCH: Donald Trump says the UK should have "acted a lot faster" in allowing the US to use UK bases to help reopen the Strait of Hormuz
"It's been a very late response from the UK… they were pretty much our first ally all over the world" pic.twitter.com/ogry4xCx30---विज्ञापन---— Politics UK (@PolitlcsUK) March 20, 2026
सऊदी और UAE सक्रिय भूमिका दिखेंगे
अब तक ईरान के हमले झेल रहे सऊदी अरब और UAE भी जंग में सक्रिय भूमिका में दिखेंगे। अमेरिका और इजरायल का सक्रिय समर्थन बढ़ाने और युद्ध में सीधी दखल की दिशा में दोनों देश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देश अपने मिलिट्री बेस खोलने और लंबे संघर्ष की तैयारी में जुटे हैं। सऊदी अरब ने अपने King Fahad Air Base को अमेरिकी वायुसेना के लिए पूरी तरह खोल दिया है, जिससे अमेरिकी विमानों को क्षेत्रीय अभियानों के लिए आसान पहुंच मिलेगी।
UAE ने भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह लंबे युद्ध के लिए तैयार है। इधर अमेरिका ने भी मध्य पूर्व क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक तैनाती तेज कर दी है, जो संघर्ष को और लंबा खींच सकता है। लेकिन ईरान इससे बेफिक्र नहीं है। ईरान ने UAE के Ras-Al-Khaima शहर के निवासियों को तत्काल निकासी की सख्त चेतावनी जारी की है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि खर्ग आईलैंड के खिलाफ हालिया अभियान इसी शहर से शुरू किया गया था, इसलिए अब यह शहर निशाने पर है।
ईरान ने ब्रिटेन को धमकी दी
ब्रिटेन ने हिंद महासागर के अपने बेस डिएगो गार्सिया के RAF फेयरफोर्ड को अमेरिका को ईरान पर हमले करने के लिए उपलब्ध कराने का फैसला किया, ताकि होर्मुज स्ट्रेट को खोला जा सके, क्योंकि इस रास्ते से ब्रिटेन को भी तेल की सप्लाई होती है। इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि अमेरिका को अपने बेस उपलब्ध कराकर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर अपने देश के आम नागरिकों कि जिंदगी खतरे में डाल रहे हैं, क्योंकि ईरान उनके खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करेगा, बेशक ब्रिटिश सरकार ईरान पर सीधा हमला नहीं करेगी।
ईरान के कारण ही रुख बदला
बता दें कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा था कि ईरान के युद्ध में ब्रिटेन शामिल नहीं होगा। इसलिए शुरुआत में उन्होंने अमेरिका को अपने सैन्य बेस इस्तेमाल करने की परमिशन नहीं दी थी। इसके चलते दोनों देशों के बीच तनाव भी आया था। ब्रिटेन ने अमेरिका के अनुरोध को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उन्हें अमेरिका की किसी भी जंग में ब्रिटेन की ओर से किसी भी सैन्य कार्रवाई की वैधता सुनिश्चित करनी होगी। अब जब ईरान ने ब्रिटेन के सहयोगी देशों पर हमला किया है तो स्टार्मर ने अपना रुख बदला और अमेरिको बेस इस्तेमाल करने की परमिशन दे दी।
NEW – Trump says U.S. is getting very close to meeting its objectives and is considering winding down its military efforts in the Iran war. pic.twitter.com/docevs1d1A
— Disclose.tv (@disclosetv) March 20, 2026
युद्ध समाप्ति की ओर बढ़ रहा
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ताजा बयान दिया है कि ईरान के खिलाफ चल रहा अब युद्ध समाप्त करने की ओर बढ़ रहा है। हालांकि युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजरायल का मुख्य लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन था, लेकिन नया बयान तब आया है, जबकि मुख्य उद्देश्य अभी तक हासिल नहीं हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर युद्ध को लेकर अपने ताजा बयान में इसके समापन की ओर इशारा किया। उन्होंने लिखा कि हम अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के बहुत करीब पहुंच चुके हैं। इसलि मध्य पूर्व में अपनी सैन्य कार्रवाइयों को समाप्त करने पर विचार कर रहे हैं।










