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युद्ध के बीच भी ईरान ने निभाई दोस्ती, खुलासा- भारतीय टैंकर को होर्मुज से निकालने में ऐसे की थी मदद

Iran Israel War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अन्य देशों से स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की, लेकिन भारत ने कूटनीति को प्राथमिकता दी. यह घटना पश्चिम एशिया में उभरते संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है.

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अमेरिका के साथ जारी जंग के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन भारत के साथ अपनी पुरानी दोस्ती को नहीं भूला. पिछले हफ्ते दो भारतीय एलपीजी टैंकरों को इस संकटपूर्ण रास्ते से सुरक्षित पार करने की इजाजत देकर तेहरान ने दिल्ली को कूटनीतिक राहत दी. अब खुलासा हुआ है कि ईरानी नौसेना ने खुद इन जहाजों को निर्देशित कर सुरक्षित निकाला, जो भारत-ईरान के बीच गहरे संबंधों का प्रतीक है.

ईरानी अधिकारी ने किया खुलासा!

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ईरानी नौसेना ने टैंकर के चालक दल से रेडियो संपर्क साधा. उन्होंने जहाज का झंडा, नाम, प्रस्थान और गंतव्य बंदरगाहों के अलावा चालक दल के सदस्यों की भारतीय नागरिकता की पुष्टि की. इसके बाद एक पूर्व निर्धारित सुरक्षित गलियारे से आगे बढ़ने का निर्देश दिया गया. यह प्रक्रिया नई दिल्ली की कूटनीतिक पहलों के बाद संभव हुई, जब ईरान ने दोस्ताना देशों के जहाजों के लिए विशेष प्रोटोकॉल लागू किया.

यह भी पढ़ें: ईरान के नतांज परमाणु केंद्र पर बड़ा हमला, अमेरिका-इजरायल की जबरदस्त बमबारी

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40,000 मीट्रिक टन LPG लेकर निकला था टैंकर

मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा शिवालिक एलपीजी कैरियर सहित ये टैंकर कतर से 40,000 मीट्रिक टन खाना पकाने की गैस लेकर आए, जो घरेलू आपूर्ति के लिए बेहद जरूरी साबित हुए. ईओएस रिस्क ग्रुप के सलाहकार प्रमुख मार्टिन केली का कहना है कि ईरान अब होर्मुज में ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम चला रहा है. इसमें चुनिंदा जहाजों की जांच के बाद इजाजत दी जाती है, खासकर मित्र राष्ट्रों को. हालांकि, इससे तेहरान को वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव बनाने का लाभ मिल रहा है.

खतरों से भरा जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य

फरवरी अंत में अमेरिका-इजरायल के साथ युद्ध तेज होने के बाद ईरान ने इस जलमार्ग को आंशिक रूप से अवरुद्ध कर दिया. दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का रास्ता यही है, इसलिए मिसाइल-ड्रोन हमलों, नाविकों की मौत और बीमा लागत में उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया. खबरें हैं कि ईरान ने यहां बारूदी सुरंगें भी बिछा दी हैं. पाकिस्तानी तेल टैंकर को भी इसी तरह इजाजत मिली, लेकिन कई अन्य देशों के जहाज फंसे पड़े हैं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसदीय समिति में स्पष्ट किया कि भारत की संतुलित नीति ने यह संभव किया. ईरान ने कम से कम 20 भारतीय जहाजों को इसी गलियारे से पार कराने का भरोसा जताया है.

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यह भी पढ़ें: ट्रंप ने ईरान के साथ किया सीजफायर से इनकार, चीन-जापान का जिक्र कर क्या कहा?

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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