आज उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 9 अक्टूबर को कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी दी. क्या आप जानते हैं कि भारत में किसी रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की प्रक्रिया क्या होती है? क्या रेलवे खुद स्टेशन का नाम बदल सकता है, या इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होती है? आइए, आसान भाषा में समझते हैं पूरा प्रोसेस.
रेलवे स्टेशन का नाम बदलने का फैसला कौन लेता है?
भारत में किसी रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मंजूरी देने का अधिकार केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास है. यह फैसला संबंधित राज्य सरकार की सिफारिश पर लिया जाता है. भारतीय रेलवे अपने स्तर पर किसी स्टेशन का नाम बदलने का अंतिम फैसला नहीं करता.
राज्य सरकार से शुरू होती है प्रक्रिया
सबसे पहले संबंधित राज्य सरकार स्टेशन का नाम बदलने के प्रस्ताव पर विचार करती है. इसकी वजह स्थानीय इतिहास, किसी महापुरुष के सम्मान या सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हो सकती है. प्रस्ताव राज्य सरकार की ओर से केंद्र के गृह मंत्रालय को भेजा जाता है. राज्य में इस प्रस्ताव को मंजूरी देने का तरीका संबंधित नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है.
गृह मंत्रालय करता है प्रस्ताव की जांच
प्रस्ताव मिलने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय संबंधित विभागों से राय और अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मांगता है. इसमें रेल मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Science and Technology), सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया (Surveyor General of India) और डाक विभाग शामिल हैं. इन विभागों की राय लेने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नए नाम से सरकारी रिकॉर्ड, डाक व्यवस्था और दूसरी सेवाओं में भ्रम न हो.
नए नाम को मिलती है केंद्र की मंजूरी
संबंधित विभागों की राय मिलने के बाद गृह मंत्रालय प्रस्ताव पर फैसला करता है. अगर प्रस्ताव उचित पाया जाता है, तो मंत्रालय राज्य सरकार को नाम बदलने के लिए अनापत्ति यानी NOC देता है. यह मंजूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है.
राज्य सरकार जारी करती है गजट अधिसूचना
गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद राज्य सरकार नए नाम की आधिकारिक गजट अधिसूचना जारी करती है. इसी अधिसूचना के आधार पर नाम बदलने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ती है.
रेलवे अपने रिकॉर्ड और स्टेशन बोर्ड बदलता है
गजट अधिसूचना जारी होने के बाद संबंधित जोनल रेलवे नए नाम को लागू करता है. इसके तहत स्टेशन के बोर्ड, रेलवे के आधिकारिक रिकॉर्ड और यात्रियों को दी जाने वाली जानकारी में जरूरी बदलाव किए जाते हैं. स्टेशन का नाम बदलने से उसका कोड अपने आप बदले, यह जरूरी नहीं है.
पहले भी बदले गए हैं कई रेलवे स्टेशनों के नाम
देश में कई स्टेशनों के नाम बदले जा चुके हैं. मध्य प्रदेश के हबीबगंज स्टेशन का नाम रानी कमलापति रेलवे स्टेशन रखा गया. उत्तर प्रदेश के मुगलसराय जंक्शन का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन और फैजाबाद जंक्शन का नाम अयोध्या कैंट किया गया. कुल मिलाकर, रेलवे स्टेशन का नाम बदलने के लिए राज्य सरकार का प्रस्ताव, संबंधित विभागों की राय, केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी और राज्य सरकार की गजट अधिसूचना अहम चरण हैं. इसके बाद रेलवे नए नाम को अपने सिस्टम में लागू करता है.