मिडिल ईस्ट में जारी जंग की वजह से इस क्षेत्र के टूरिज्म पर बहुत बुरा असर पड़ा है. उड़ानें रद्द होने, एयरस्पेस बंद होने और टूरिस्टों में डर की वजह से इस क्षेत्र को हर दिन करोड़ों डॉलर की चपत लग रही है. ताजा अनुमानों के मुताबिक, इस जंग की वजह से मिडिल ईस्ट की टूरिज्म इंडस्ट्री को रोजाना कम से कम 600 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है.
एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में वर्ल्ड ट्रेवल एंड टूरिज्म काउंसिल के हवाले से लिखा है, साल 2026 टूरिज्म के लिहाज से इस क्षेत्र के लिए एक रिकॉर्ड साल होने वाला था, जिसमें 207 अरब डॉलर की कमाई का अनुमान था.
यह भी पढ़ें : ‘ईरान पूरी तरह बर्बाद, सेना और नेवी खत्म; 7,000 ठिकानों पर बरसाए बम’, डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा
मिडिल ईस्ट ग्लोबल एविएशन और टूरिज्म नेटवर्क में अहम भूमिका निभाता है. इस इलाके में दुनिया भर में आने वाले इंटरनेशनल टूरिस्ट का लगभग 5 परसेंट और दुनिया भर में आने वाले ट्रांजिट ट्रैफिक का करीब 14 परसेंट हिस्सा आता है. दुबई, अबू धाबी, दोहा और बहरीन जैसे बड़े एविएशन हब, जहां रोजाना करीब 5.26 लाख यात्री आते थे. अब तनाव बढ़ने की वजह से रास्ते बंद हो गए हैं.
रमजान के महीने में बंद हुए एयरस्पेस
मिडिल ईस्ट काउंसिल ऑन ग्लोबल अफेयर्स की रिपोर्ट बताती है कि इन देशों के एयरस्पेस उसी समय बंद हुए, जब रमजान का पीक टूरिज्म सीजन चल रहा था. अनुमान है कि इस क्षेत्र को केवल इस दौरान 40 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है. मिसाइल और ड्रोन हमलों की वजह से विमानों को लैंडिंग से पहले घंटों हवा में चक्कर काटना पड़ रहा है, जिससे ऑपरेशनल कॉस्ट भी बढ़ गई है.
यह भी पढ़ें : रूसी तेल की कीमतों ने भारत में तोड़ा रिकॉर्ड, महंगा क्रूड ऑयल बेचकर कितनी कमाई कर रहे पुतिन?
घटी टूरिस्टों की संख्या
'टूरिज्म इकोनॉमिक्स' के अनुमान के मुताबिक, साल 2026 में मध्य पूर्व में आने वाले विदेशी टूरिस्टों की संख्या में 11% से 27% तक की गिरावट आ सकती है. इसका मतलब है कि इस साल करीब 23 से 38 मिलियन कम टूरिस्ट इस क्षेत्र में पहुंचेंगे.
मिडिल ईस्ट में जारी जंग की वजह से इस क्षेत्र के टूरिज्म पर बहुत बुरा असर पड़ा है. उड़ानें रद्द होने, एयरस्पेस बंद होने और टूरिस्टों में डर की वजह से इस क्षेत्र को हर दिन करोड़ों डॉलर की चपत लग रही है. ताजा अनुमानों के मुताबिक, इस जंग की वजह से मिडिल ईस्ट की टूरिज्म इंडस्ट्री को रोजाना कम से कम 600 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है.
एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में वर्ल्ड ट्रेवल एंड टूरिज्म काउंसिल के हवाले से लिखा है, साल 2026 टूरिज्म के लिहाज से इस क्षेत्र के लिए एक रिकॉर्ड साल होने वाला था, जिसमें 207 अरब डॉलर की कमाई का अनुमान था.
यह भी पढ़ें : ‘ईरान पूरी तरह बर्बाद, सेना और नेवी खत्म; 7,000 ठिकानों पर बरसाए बम’, डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा
मिडिल ईस्ट ग्लोबल एविएशन और टूरिज्म नेटवर्क में अहम भूमिका निभाता है. इस इलाके में दुनिया भर में आने वाले इंटरनेशनल टूरिस्ट का लगभग 5 परसेंट और दुनिया भर में आने वाले ट्रांजिट ट्रैफिक का करीब 14 परसेंट हिस्सा आता है. दुबई, अबू धाबी, दोहा और बहरीन जैसे बड़े एविएशन हब, जहां रोजाना करीब 5.26 लाख यात्री आते थे. अब तनाव बढ़ने की वजह से रास्ते बंद हो गए हैं.
रमजान के महीने में बंद हुए एयरस्पेस
मिडिल ईस्ट काउंसिल ऑन ग्लोबल अफेयर्स की रिपोर्ट बताती है कि इन देशों के एयरस्पेस उसी समय बंद हुए, जब रमजान का पीक टूरिज्म सीजन चल रहा था. अनुमान है कि इस क्षेत्र को केवल इस दौरान 40 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है. मिसाइल और ड्रोन हमलों की वजह से विमानों को लैंडिंग से पहले घंटों हवा में चक्कर काटना पड़ रहा है, जिससे ऑपरेशनल कॉस्ट भी बढ़ गई है.
यह भी पढ़ें : रूसी तेल की कीमतों ने भारत में तोड़ा रिकॉर्ड, महंगा क्रूड ऑयल बेचकर कितनी कमाई कर रहे पुतिन?
घटी टूरिस्टों की संख्या
‘टूरिज्म इकोनॉमिक्स’ के अनुमान के मुताबिक, साल 2026 में मध्य पूर्व में आने वाले विदेशी टूरिस्टों की संख्या में 11% से 27% तक की गिरावट आ सकती है. इसका मतलब है कि इस साल करीब 23 से 38 मिलियन कम टूरिस्ट इस क्षेत्र में पहुंचेंगे.