बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए आज चुनाव होंगे. संसद में आज दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा. मतदान के बाद नतीजे घोषित होंगे. सत्तारूढ़ दल BNP के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर और 11 दलों के विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद आमने-सामने हैं. सत्तारूढ़ BNP के पास संसद में बहुमत होने से फखरुल की जीत की संभावना ज्यादा है. नवनिर्वाचित राष्ट्रपति कल शुक्रवार शाम को बंगभवन के दरबार हॉल में बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे. 22वें राष्ट्रपति रहे मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. हाफिज उद्दीन अहमद उनके इस्तीफे के बाद से अब तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर काम कर रहे हैं.

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बांग्लादेश में पिछली बार कब हुए थे राष्ट्रपति चुनाव?

बांग्लादेश में आज तक 12 राष्ट्रपति चुनाव हो चुके हैं, जिनमें से 8 राष्ट्रपति निर्विरोध चुने जा चुके हैं. 1971 में बांग्लादेश के गठन के बाद पहला राष्ट्रपति चुनाव 1974 में हुआ था और मोहम्मद मोहम्मदुल्लाह जीते थे. साल 1975 में संविधान संशोधन हुआ और उसके बाद राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता के द्वारा वोटिंग के जरिए कराने का प्रावधान किया गया. इसके तहत 1978, 1981, 1986 में लगातार 3 बार जनता के द्वारा वोटिंग करके राष्ट्रपति चुने गए. 1991 में फिर से संसदीय व्यवस्था लागू हुई और सांसदों के वोटों के जरिए राष्ट्रपति का चुनाव होने लगा. 1991 के बाद 2023 तक राष्ट्रपति निर्विरोध चुने गए, क्योंकि विपक्ष दल अपने उम्मीदवार को चुनावी रण में उतारते ही नहीं थे, क्योंकि शायद उन्हें हार जाने का डर होता था.

राष्ट्रपति चुनाव को लेकर संविधान में क्या है नियम?

बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त AMM नासिर उद्दीन के अनुसार, बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के तहत किया जाता है और संसद में जनता के द्वारा निर्वाचित सदस्य मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं. राष्ट्रपति हर 5 साल के लिए चुने जाते हैं और एक शख्स 2 बार ही राष्ट्रपति बन सकता है. संविधान की धारा-90 के तहत अगर 5 साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले राष्ट्रपति पद खाली हो जाता है तो नए राष्ट्रपति को चुनने के लिए चुनाव कराने होते हैं. नया राष्ट्रपति नियुक्त होने तक संसद अध्यक्ष यानी संसद स्पीकर बतौर कार्यवाहक राष्ट्रपति काम करते हैं. राष्ट्रपति का चुनाव संसद के सदस्यों द्वारा वोटिंग के जरिए किया जाता है. लेकिन अकसर बहुमत प्राप्त सत्तारूढ़ दल का नेता राष्ट्रपति बनता है.

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बांग्लादेश के राष्ट्रपति चुनाव भारत कितने अलगे हैं?

बता दें कि बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव भारत के राष्ट्रपति चुनाव से आसान होते हैं. हालांकि दोनों देशों में राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से ही होता है, लेकिन बावजूद इसके दोनों चुनाव प्रक्रियाओं में काफी अंतर है. जैसे निर्वाचक मंडल का अंतर है, क्योंकि बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव में मतदान एक सदन यानी जातीय संसद के सदस्य करते हैं. राज्यों या प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य मतदान में हिस्सा नहीं लेते हैं. लेकिन भारत में राष्ट्रपति चुनाव में संसद के दोनों सदन लोकसभा और राज्यसभा के साथ-साथ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भी मतदान करते हैं.

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दोनों देशों में राष्ट्रपति चुनाव में एक अंतर वोट की वैल्यू का है. बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने वाले एक सांसद का एक वोट गिना जाता है, लेकिन भारत में राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने वाले सांसदों और विधायकों के वोट की वैल्यू अलग-अलग होती है. विधायकों के वोट की वैल्यू उनके राज्यों की जनसंख्या के अनुपता पर निर्भर करती है, वहीं सांसदों के वोट की वैल्यू देशभर के विधायकों की टोटल वोट वैल्यू पर निर्भर करती है और फिर दोनों वोट वैल्यू के आधार पर बहुमत साबित होता है.

दोनों देशों के राष्ट्रपति चुनाव में मतदान पद्धति का अंतर भी हे, क्योंकि बांग्लादेश में सामान्यत: बहुमत के आधार पर राष्ट्रपति का चुनाव होता है और अकसर सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार ही राष्ट्रपति बनते हैं. लेकिन भारत में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत पद्धति के तहत गुप्त मतदान के जरिए राष्ट्रपति का चुनाव होता है. उम्मीदवार को जीतने के लिए वोटों का निश्चित कोटा (50%+1 वोट) मिलना जरूरी होता है.

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बांग्लादेश के राष्ट्रपति चुनाव में संविधान के अनुच्छेद-70 के तहत एक व्यवस्था की गई है कि सांसद अपनी पार्टी के फैसले के खिलाफ वोट नहीं कर सकते. इसलिए केंद्र में जिस पार्टी की बहुमत के साथ सरकार होती है, उसका उम्मीदवार ही राष्ट्रपति चुनाव जीत जाता है. जबकि भारत में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान किसी तरह का व्हिप लागू नहीं किया जाता है, बल्कि सांसद और विधायकों को अपनी मर्जी से किसी भी उम्मीदवार को वोट देने का अधिकार होता है.

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