Nepal Flash Flood: नेपाल की उत्तरी सीमा पर भयानक अचानक आए फ्लैश से कई महीने पहले 2 रिपोर्ट्स में हिमालयन रीजन में तेजी से पिघलते और अनस्टेबल ग्लेशियल झीलों से बढ़ते खतरे की तरफ इशारा किया गया था. इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) की तरफ से छपी स्टडी में चेतावनी दी गई थी कि हिंदू कुश हिमालय में ग्लेशियर की बर्फ का नुकसान तेजी से बढ़ा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2000 के बाद से बर्फ के नुकसान की स्पीड दोगुनी हो गई है, जिससे ग्लेशियल झील के फटने से आने वाली बाढ़ (GLOFs) जैसे खतरों की संभावना बढ़ गई है.
नेपाल में जबरदस्त तबाही
नेपाल-तिब्बत बॉडर्स पर हाल की आपदा के बाद इन फाइंडिंग्स पर फिर से ध्यान दिया जा रहा है. खबरों के मुताबिक, इस आपदा में नेपाल में 469 लोगों की मौत हुई है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता हैं. हालांकि 1500 से ज्यादा लोग लापता है. काफी लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है
बर्फ खोते हिमालयन ग्लेशियर
ICIMOD की ‘हिंदू कुश हिमालयन रीजन में 1990 से 2020 तक ग्लेशियरों की बदलते डायनमिक्स’ और ‘HKH ग्लेशियर आउटलुक 2026’ रिपोर्ट्स में इस इलाके के ग्लेशियरों में तेजी से हो रहे बदलावों को दर्ज किया गया है. रिपोर्ट्स में बताया गया है कि 1975 के बाद से कुछ ग्लेशियरों की बर्फ की मोटाई में 27 मीटर तक की कमी आई है. 1990 और 2020 के बीच, अपर हिमालयन रीजन के ग्लेशियर्स ने अपने क्षेत्रफल का तकरीबन 12% और अपने अनुमानित बर्फ भंडार का लगभग 9% हिस्सा खो दिया.
ICIMOD के रिमोट सेंसिंग एनालिस्ट सूदन बिकास महर्जन ने चेतावनी दी कि सिकुड़ते ग्लेशियर, झील के फटने से आने वाली बाढ़ सहित कई खतरों को बढ़ा रहे हैं. एक और बड़ी चिंता लिमिटेड मॉनिटरिंग है. ताजा रिपोर्ट में जिन 38 ग्लेशियरों का आकलन किया गया, उनमें से सिर्फ 7 ही लॉन्ग टर्म मॉनिटरिंग के लिए ग्लोबल स्टैंडर्ड पर खरे उतरे.
हिमस्खलन का शक
ICIMOD के एक्सर्ट हाल के आपदा की जांच कर रहे हैं और उनका मानना है कि ज्यादा ऊंचाई वाले इलाके से बर्फ और चट्टान के हिमस्खलन के कारण यह भारी बाढ़ आई हो सकती है. इस घटना के कारण पानी, गाद और विशाल चट्टानें भोटे कोशी और त्रिशूली रिवर सिस्टम में बह गईं. रसुवा और धाडिंग सबसे बुरी तरह प्रभावित जिलों में से थे, और बाद में बाढ़ ने निचले इलाकों को भी तबाह किया.
इस भयानक आपदा ने सड़कों, पुलों और कम्यूनिकेशन नेटवर्क को भी नष्ट कर दिया है, जिससे बचाव कार्य मुश्किल हो गए हैं. ICIMOD ने बेहतर अर्ली-वार्निंग सिस्टम्स और हिमालयी देशों के ज्यादा सहयोग की जरूरत पर जोर दिया है, क्योंकि ऐसी आपदाएं तेजी से इंटरनेशनल बॉर्डर्स को पार कर सकती हैं.
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