'क्वाड चीन विरोधी गठबंधन नहीं', अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को लेकर भी कही बड़ी बात

समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार से जुड़े सवाल पर अमेरिकी विदेश मंत्री ने काला सागर का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अनाज की आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो रही है.

State Marco Rubio

क्वाड को चीन विरोधी या किसी अन्य देश के खिलाफ गठबंधन के रूप में देखना सही नहीं होगा. (Photo: ANI)

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्वाड को लेकर अमेरिकी रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह किसी देश के खिलाफ बनाया गया गठबंधन नहीं है. इसका उद्देश्य चीन या किसी अन्य देश का विरोध करना नहीं, बल्कि साझा हितों वाले चार देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि क्वाड में कुछ देशों के व्यवहार और गतिविधियों को लेकर चिंताएं जाहिर की जाती हैं और ये गतिविधियां बार-बार एक ही देश की ओर से सामने आती हैं. रुबियो ने भारत की भूमिका का जिक्र करते हुए काला सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर भी बात की.

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‘साझा हितों और सिद्धांतों को लेकर एकमत’

रुबियो के मुताबिक, क्वाड चार देशों के बीच सहयोग का एक मंच है. इसमें शामिल देश कुछ साझा हितों और सिद्धांतों को लेकर एकमत हैं. उन्होंने कहा कि इस समूह की ओर से उठाई जाने वाली आपत्तियां किसी देश को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और गतिविधियों को लेकर होती हैं. रुबियो ने कहा कि इन गतिविधियों का स्रोत किस देश से जुड़ा है, यह सभी के लिए स्पष्ट है. इसके बावजूद क्वाड को चीन विरोधी या किसी अन्य देश के खिलाफ गठबंधन के रूप में देखना सही नहीं होगा.

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भारत और तुर्किये की पहल का जिक्र

समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार से जुड़े सवाल पर अमेरिकी विदेश मंत्री ने काला सागर का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अनाज की आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो रही है. इसका असर कुछ हद तक ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है. रुबियो ने बताया कि काला सागर के रास्ते अनाज की खेपों की आवाजाही फिर शुरू कराने के लिए कई देशों ने सहयोग की इच्छा जताई है. इस दिशा में भारत और तुर्किये भी कुछ विचारों के साथ आगे आए हैं. उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने अनाज की ढुलाई को सुचारु बनाने के संभावित तरीकों पर चर्चा की है.

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होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका को सीमित सहयोग

होर्मुज की स्थिति को काला सागर से ज्यादा चुनौतीपूर्ण बताते हुए रुबियो ने कहा कि दुनिया के कई देशों के पास इस क्षेत्र में सैन्य ताकत तैनात करने की क्षमता नहीं है. उन्होंने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने वैश्विक समुद्री परिवहन की सुरक्षा के लिए दूसरे देशों से सहयोग मांगा है, लेकिन अब तक इस दिशा में बहुत सीमित समर्थन मिला है. ऐसे में जहाजों की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी अमेरिका पर ही आ गई है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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