अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोकने में अमेरिका ने बड़ी भूमिका निभाई. ट्रंप के मुताबिक अमेरिका की ओर से दी गई टैरिफ की चेतावनी के बाद दोनों देश पीछे हटे. कैंप डेविड में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारी टैरिफ के डर से भारत-पाकिस्तान का परमाणु युद्ध टल गया. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने 250 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही थी, जिसके बाद दोनों देशों ने बातचीत कर युद्ध न करने का फैसला लिया. हालांकि भारत ने ट्रंप के दावे को खारिज कर दिया है.

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भारत का साफ इनकार

दूसरी तरफ भारत सरकार ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है. भारत का कहना है कि पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने में किसी भी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी. भारत ने हमेशा साफ किया है कि दोनों देशों के बीच शांति कायम करने के लिए किसी तीसरे देश की मध्यस्थता की जरूरत नहीं पड़ी. ट्रंप का कहना है कि उस समय 11 विमान गिराए गए थे और स्थिति बहुत गंभीर हो गई थी. हालांकि भारत का रुख इस पूरे मामले में बहुत साफ और स्पष्ट रहा है.

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क्या था ऑपरेशन सिंदूर?

यह पूरा विवाद अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ था. उस हमले में 26 आम लोगों की जान चली गई थी. इसका जवाब देने के लिए भारत ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था. इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों पर करारा हमला किया गया था. इसके बाद चार दिनों तक दोनों ओर से भारी हमला हुआ था. ट्रंप अब इसी घटना का जिक्र कर खुद की कूटनीति की तारीफ कर रहे हैं.

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घटता मिसाइल भंडार बनी चुनौती

एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाने का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका ईरान से जंग में अपनी रणनीति बदलने को मजबूर है. महीनों से जारी संघर्ष के कारण पेंटागन के उन्नत मिसाइल रक्षा इंटरसेप्टर, जैसे Patriot और THAAD, तेजी से खत्म हो रहे हैं. ईरान लगातार हमले कर अमेरिका को अपने महंगे रक्षा तंत्र का इस्तेमाल करने पर मजबूर कर रहा है. मिसाइलों की इस कमी से ट्रंप प्रशासन के सामने अमेरिकी सैनिकों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. अब पेंटागन यह समीक्षा कर रहा है कि वह इस सीमित सैन्य कार्रवाई को कब तक जारी रख पाएगा.

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