---विज्ञापन---

क्या आपके घर में है भूत या सिर्फ मन का वहम? भारतीय पैरानॉर्मल इंवेस्टिगेटर ने किया बड़ा खुलासा

मनोरंजन उद्योग पर बात करते हुए सरबजीत कहते हैं कि भारतीय सिनेमा आज भी सफेद साड़ी और पुरानी हवेलियों के घिसे-पिटे ढर्रे पर चल रहा है, जबकि दर्शक अब अधिक समझदार हो चुके हैं. हॉलीवुड की 'द कॉन्ज्यूरिंग' जैसी फिल्में इसलिए सफल होती हैं क्योंकि वे दर्शकों को असल जिंदगी से जुड़ी लगती हैं.

---विज्ञापन---

भूत-प्रेत और रहस्यमयी दुनिया की कहानियां हमेशा से ही इंसानी कौतूहल का विषय रही हैं. चाहे कोई इन पर विश्वास करे या इन्हें अंधविश्वास मानकर खारिज कर दे, लेकिन अनजाने का डर और रहस्य का आकर्षण हर किसी को अपनी ओर खींचता है. इसी रहस्यमयी दुनिया की पड़ताल में ओडिशा में जन्मे पैरानॉर्मल इंवेस्टिगेटर और डेमोनोलॉजिस्ट सरबजीत मोहंती ने अपने जीवन के दस साल से अधिक का समय बिताया है. एमटीवी डार्क स्क्रॉल (MTV Dark Scroll) और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी खास पहचान बनाने वाले सरबजीत का मानना है कि ‘घोस्ट हंटिंग’ और ‘पैरानॉर्मल इंवेस्टिगेशन’ (पैरानॉर्मल जांच) में जमीन-आसमान का अंतर है.

कैसे काम करते हैं पैरानॉर्मल इंवेस्टिगेटर?


सरबजीत मोहंती के मुताबिक, उनकी जांच का उद्देश्य भूतों को साबित करना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तरीकों से सच्चाई का पता लगाना है. उनकी टीम के पास आने वाले हर दस मामलों में से लगभग आठ मामलों का समाधान विज्ञान के पास होता है. जब भी किसी सार्वजनिक स्थान या निजी संपत्ति में डरावनी गतिविधियों की शिकायत मिलती है, तो टीम सबसे पहले वहां के तापमान, नमी, वायुदाब, ध्वनि तरंगों और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (ईएमएफ) की जांच करती है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में बड़ा हादसा, मंदिर के हॉल की छत गिरने से 5 श्रद्धालुओं की मौत; 40 लोग दबे

अक्सर घरों के पास मौजूद मोबाइल टावर या भू-चुंबकीय विसंगतियां (Geomagnetic Anomalies) इंसानी दिमाग पर गहरा असर डालती हैं, जिससे लोगों को साये दिखना, आवाजें सुनाई देना या डरावने सपने आने जैसी समस्याएं होने लगती हैं. किसी कमरे का अचानक ठंडा होना भूत की मौजूदगी नहीं, बल्कि वहां की बनावट या पानी की टंकी का असर हो सकता है. सभी तार्किक और वैज्ञानिक संभावनाओं के खारिज होने के बाद ही किसी मामले को ‘अनसुलझा’ या पैरानॉर्मल की श्रेणी में रखा जाता है.

---विज्ञापन---

डर के साये से शुरू हुआ सफर


दिलचस्प बात यह है कि बचपन में सरबजीत खुद अंधेरे और भूत-प्रेत की कहानियों से बेहद डरते थे. उनके पिता की सरकारी नौकरी के कारण परिवार को पूर्वी भारत के कई पुराने सरकारी आवासों में रहना पड़ा, जहां अक्सर अजीब आवाजें और डरावने किस्से सुनने को मिलते थे. ओडिशा की लोककथाओं में प्रचलित ‘डहानी’ (चुड़ैल) के डर ने उन्हें रातों को जगाए रखा. लेकिन किशोरावस्था में उन्होंने अपने इस डर का सामना करने की ठानी और इसके पीछे के सच को जानने के लिए गहन अध्ययन शुरू किया. ज्ञान ने उनके भीतर के डर को हमेशा के लिए खत्म कर दिया.

यह भी पढ़ें: ‘चाची को जल्दी मार दो स्वामी’, मंदिर के दानपात्र में मिला अनोखी मन्नत वाला 20 रुपये का नोट

फिल्म इंडस्ट्री भी लेती है सलाह


मनोरंजन उद्योग पर बात करते हुए सरबजीत कहते हैं कि भारतीय सिनेमा आज भी सफेद साड़ी और पुरानी हवेलियों के घिसे-पिटे ढर्रे पर चल रहा है, जबकि दर्शक अब अधिक समझदार हो चुके हैं. हॉलीवुड की ‘द कॉन्ज्यूरिंग’ जैसी फिल्में इसलिए सफल होती हैं क्योंकि वे दर्शकों को असल जिंदगी से जुड़ी लगती हैं. हालांकि, अब कुछ भारतीय फिल्म निर्माता जैसे पैट्रिक ग्राहम (घोल, बेताल) और विशाल फुरिया (लपाछपी, छोरी) इस क्षेत्र में यथार्थवादी और गंभीर काम कर रहे हैं, जो उनकी टीम से भी तकनीकी सलाह लेते हैं.

---विज्ञापन---

भानगढ़ नहीं, यह जगह है सबसे ज्यादा खतरनाक


भारत के सबसे डरावने स्थानों के रूप में मशहूर राजस्थान के ‘भानगढ़ किले’ को लेकर सरबजीत का मानना है कि सोशल मीडिया और रील्स ने इसका बढ़ा-चढ़ाकर प्रचार किया है, जबकि यह देश के टॉप 10 डरावने स्थानों में भी शामिल नहीं है. उनके मुताबिक, उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित ‘मुक्ति कोठरी’ (Mukti Kothri) भारत की सबसे डरावनी और परेशान करने वाली जगहों में से एक है. ब्रिटिश काल की यह इमारत एक ऐसे डॉक्टर से जुड़ी है जो कथित तौर पर मौत के बाद के जीवन पर प्रयोग करता था. इस जगह की नकारात्मक ऊर्जा इतनी तीव्र थी कि उनकी सह-संस्थापक पूजा को जांच के बाद कुछ समय के लिए काम से दूरी बनानी पड़ी थी. सरबजीत इसे भारत का ‘कॉन्ज्यूरिंग हाउस’ मानते हैं.

First published on: Jun 20, 2026 05:28 PM

End of Article

About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला ने India.com (ZEE Media), 'नवोदय टाइम्स' (पंजाब केसरी ग्रुप), 'ओपेरा न्यूज' और 'वनइंडिया' (डेली हंट) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करके अपनी व्यापक पत्रकारिता क्षमता का परिचय दिया। उनकी विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी अनुभव है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

Read More

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला ने India.com (ZEE Media), 'नवोदय टाइम्स' (पंजाब केसरी ग्रुप), 'ओपेरा न्यूज' और 'वनइंडिया' (डेली हंट) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करके अपनी व्यापक पत्रकारिता क्षमता का परिचय दिया। उनकी विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी अनुभव है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola