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TMC MLA कासिम सिद्दीकी की ममता बनर्जी कैंप में वापसी, बागी गुट छोड़ने का किया ऐलान

West Bengal News: टीएमसी के एमएलए कासिम सिद्दीकी ने कहा है कि वो ममता बनर्जी के कैंप में वापस आ रहे हैं, हाल ही में उन्होंने रिताब्रता बनर्जी वाले बागी गुट में शामिल हो गए थे. जब से तृणमूल कांग्रेस सत्ता से बेदखल हुई है, तभी से पार्टी में उथल-पुथल चल रही है.

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कासिम सिद्दीकी और ममता बनर्जी ((Photo: Facebook/Kasem Siddiqui))

TMC MLA Kasem Siddiqui Returns to Mamata Camp: तृणमूल कांग्रेस के विधायक कासिम सिद्दीकी ने ऐलान किया है कि वो पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी की लीडरशिप वाले गुट में वापस लौट रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी वाले बागी गुट से अपना नाता तोड़ लिया है. नॉर्थ 24 परगना जिले की अमडांगा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले सिद्दीकी ने कहा कि उन्होंने हमेशा खुद को ममता बनर्जी का समर्थक माना है और आगे भी उनकी लीडरशिप को फॉलो करते रहेंगे.

बागी गुट में क्यों गए थे सिद्दीकी?

कासिम सिद्दीकी ने कहा कि वे बागी गुट में इसलिए शामिल हुए थे क्योंकि उन्हें लगा था कि इसकी एक्टिविटीज TMC सुप्रीमो की तरह ही होंगी. हालांकि, बाद में उन्हें पता चला कि इस गुट के कामकाज में ममता बनर्जी का कोई नाम या रोल नहीं था. सिद्दीकी ने बताया कि उन्हें कहा गया था कि विधायकों के साइन किए गए डॉक्यूमेंट्स आखिरकार ममता बनर्जी तक पहुंचेंगे. उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक पहचान पूर्व सीएम से गहराई से जुड़ी हुई है, जिन्होंने उन्हें पार्टी का टिकट दिया और विधानसभा पहुंचने में मदद की.

टीएमसी में कब शामिल हुए थे सिद्दीकी?

‘पीरजादा’ के नाम से मशहूर कासिम सिद्दीकी हुगली जिले के फुरफुरा शरीफ दरगाह से जुड़े हैं और मुस्लिम समुदाय के कुछ ग्रुप्स में उनका अच्छा-खासा प्रभाव है. वो पिछले साल टीएमसी में शामिल हुए थे, उन्हें महासचिव नियुक्त किया गया था और बाद में उन्होंने पार्टी के टिकट पर अमडांगा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था.

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लीडरशिप को लेकर गहराता विवाद

कासिम का ये फैसला टीएमसी के भीतर उस बढ़ते टकराव के बीच आया है जिसमें ये तय किया जाना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर पार्टी को रिप्रेजेंट कौन करेगा. बागी गुट ने स्पीकर के फैसले को चुनौती दी है और फ्लोर टेस्ट की मांग कर रहा है. तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष ने कहा कि स्पीकर का फैसला अस्थायी था और तर्क दिया कि मेन पार्टी के पास ही अपने ऑथराइज्ड रिप्रेजेंटेटिवका नाम बताने का अधिकार है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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