TMC MLA Kasem Siddiqui Returns to Mamata Camp: तृणमूल कांग्रेस के विधायक कासिम सिद्दीकी ने ऐलान किया है कि वो पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी की लीडरशिप वाले गुट में वापस लौट रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी वाले बागी गुट से अपना नाता तोड़ लिया है. नॉर्थ 24 परगना जिले की अमडांगा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले सिद्दीकी ने कहा कि उन्होंने हमेशा खुद को ममता बनर्जी का समर्थक माना है और आगे भी उनकी लीडरशिप को फॉलो करते रहेंगे.
बागी गुट में क्यों गए थे सिद्दीकी?
कासिम सिद्दीकी ने कहा कि वे बागी गुट में इसलिए शामिल हुए थे क्योंकि उन्हें लगा था कि इसकी एक्टिविटीज TMC सुप्रीमो की तरह ही होंगी. हालांकि, बाद में उन्हें पता चला कि इस गुट के कामकाज में ममता बनर्जी का कोई नाम या रोल नहीं था. सिद्दीकी ने बताया कि उन्हें कहा गया था कि विधायकों के साइन किए गए डॉक्यूमेंट्स आखिरकार ममता बनर्जी तक पहुंचेंगे. उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक पहचान पूर्व सीएम से गहराई से जुड़ी हुई है, जिन्होंने उन्हें पार्टी का टिकट दिया और विधानसभा पहुंचने में मदद की.
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टीएमसी में कब शामिल हुए थे सिद्दीकी?
'पीरजादा' के नाम से मशहूर कासिम सिद्दीकी हुगली जिले के फुरफुरा शरीफ दरगाह से जुड़े हैं और मुस्लिम समुदाय के कुछ ग्रुप्स में उनका अच्छा-खासा प्रभाव है. वो पिछले साल टीएमसी में शामिल हुए थे, उन्हें महासचिव नियुक्त किया गया था और बाद में उन्होंने पार्टी के टिकट पर अमडांगा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था.
लीडरशिप को लेकर गहराता विवाद
कासिम का ये फैसला टीएमसी के भीतर उस बढ़ते टकराव के बीच आया है जिसमें ये तय किया जाना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर पार्टी को रिप्रेजेंट कौन करेगा. बागी गुट ने स्पीकर के फैसले को चुनौती दी है और फ्लोर टेस्ट की मांग कर रहा है. तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष ने कहा कि स्पीकर का फैसला अस्थायी था और तर्क दिया कि मेन पार्टी के पास ही अपने ऑथराइज्ड रिप्रेजेंटेटिवका नाम बताने का अधिकार है.
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