Prashant Dev
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संसद के मानसून सत्र से पहले केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में पश्चिम बंगाल की राजनीति में उभरे नए समीकरण की झलक देखने को मिलेगी. जानकारी के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग हुए नए गुट एनसीपीआई (NCPI) की ओर से उसके नेता सुदीप बंदोपाध्याय सर्वदलीय बैठक में शामिल होंगे. सूत्रों के अनुसार, लोकसभा सचिवालय ने टीएमसी से अलग हुए इस नए संसदीय गुट को संसद भवन परिसर में अलग कार्यालय भी आवंटित कर दिया है. इसके साथ ही सचिवालय ने नए गुट से अपने नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक (Chief Whip) के नाम औपचारिक रूप से उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि संसदीय रिकॉर्ड के मुताबिक जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जा सकें.
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हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस अलग हुए गुट को असंवैधानिक करार दे चुकी हैं. वहीं, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अलग हुए सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग भी कर चुके हैं. अब इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर टकराव की संभावना बढ़ गई है. अगर लोकसभा अध्यक्ष इस मामले में कोई निर्णय लेते हैं, तो उसे अदालत में चुनौती दिए जाने की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
हालांकि, यह न्यायिक समीक्षा का विषय होगा और अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी प्रक्रिया तथा अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी. ऐसे में माना जा रहा है कि संसद के मानसून सत्र में यह विवाद प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल रहेगा. विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस और हंगामे के आसार हैं, क्योंकि यह मामला केवल संसदीय मान्यता का नहीं बल्कि दल-बदल कानून, संसदीय परंपराओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं से भी जुड़ा हुआ है.
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