क्या PM मोदी का 'मंदिर कार्ड' ढहा पाएगा CM ममता का 'दुर्ग'? जानें BJP के दांव की इनसाइड स्टोरी

West Bengal Election: बंगाल चुनाव के आखिरी दौर में क्या PM मोदी का ‘मंदिर कार्ड’ ममता बनर्जी के 123 सीटों वाले मजबूत दुर्ग को ढहा पाएगा? काली मंदिर में पूजा और मतुआ समुदाय को साधने के पीछे की असली सियासी रणनीति और स्लॉग ओवर के इस रोमांचक दांव की पूरी इनसाइड स्टोरी यहां पढ़ें.

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West Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का रण अब अपने सबसे निर्णायक और अंतिम मोड़ पर पहुंच गया है. 29 अप्रैल को आखिरी चरण की 142 सीटों पर होने वाले मतदान के लिए सोमवार को प्रचार का शोर थम जाएगा, लेकिन इस ‘स्लॉग ओवर’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा दांव चला है, जिसने सियासी पंडितों को हैरान कर दिया है. कोलकाता के ऐतिहासिक थंथनिया कालीबाड़ी मंदिर और उत्तर 24 परगना के मतुआ ठाकुरबाड़ी में पीएम मोदी की उपस्थिति ने बंगाल की राजनीति में ‘टेंपल पॉलिटिक्स’ के नए समीकरण रच दिए हैं.

काली मंदिर से ‘मांसाहार’ वाले नैरेटिव पर चोट

रविवार को पीएम मोदी कोलकाता के सबसे पुराने मंदिरों में से एक ‘थंथनिया कालीबाड़ी’ पहुंचे. यहां उन्होंने मां सिद्धेश्वरी की पूजा-अर्चना की. दिलचस्प बात यह है कि इस मंदिर में ‘प्रसाद’ के रूप में मांस चढ़ाया जाता है. राजनैतिक जानकारों का मानना है कि पीएम का यहां जाना मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस नैरेटिव को ध्वस्त करने की कोशिश है, जिसमें उन्होंने कहा था कि बीजेपी सत्ता में आई तो बंगाल के खान-पान (मछली-मांस) पर पाबंदी लगा देगी. खुद शाकाहारी होने के बावजूद इस मंदिर में माथा टेककर पीएम ने संदेश दिया कि बीजेपी बंगाली परंपराओं और मूल्यों के खिलाफ नहीं है.

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मतुआ समुदाय और CAA का मास्टर स्ट्रोक

उत्तर 24 परगना के मतुआ ठाकुर मंदिर में पीएम मोदी की पूजा के गहरे सियासी मायने हैं. मतुआ समुदाय का बंगाल की लगभग 32 सीटों पर सीधा प्रभाव है. 2019 के लोकसभा चुनाव में इस समुदाय ने बीजेपी का साथ दिया था, लेकिन CAA को लेकर कुछ नाराजगी देखी जा रही थी. पीएम मोदी ने मंदिर में दर्शन के बाद साफ किया कि उनकी सरकार CAA के जरिए नागरिकता देने के संकल्प पर अडिग है. यह सीधे तौर पर ममता बनर्जी के उस आरोप का जवाब था जिसमें उन्होंने CAA को एक ‘जाल’ बताया था.

ममता के गढ़ में सेंध लगाने की चुनौती

अंतिम चरण की जिन 142 सीटों पर चुनाव है, वहां 2021 में ममता बनर्जी ने प्रचंड जीत हासिल की थी. तब टीएमसी को 123 और बीजेपी को मात्र 18 सीटें मिली थीं. कोलकाता, उत्तर और दक्षिण 24 परगना ममता के अभेद्य किले माने जाते हैं. इस बार बीजेपी ने संदेशखाली की घटना और घुसपैठ जैसे मुद्दों को हथियार बनाकर इस दुर्ग में सेंध लगाने की पूरी कोशिश की है.

क्या स्लॉग ओवर में बदलेगा नतीजा?

क्रिकेट की तरह चुनाव के इस आखिरी चरण में पीएम मोदी ने पूरी ताकत झोंक दी है. बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों में मुस्लिम वोटर्स की बड़ी संख्या और हिंदू शरणार्थियों के बीच CAA का मुद्दा, दोनों ही पार्टियों के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति पैदा कर रहा है. अब देखना यह होगा कि पीएम मोदी की यह ‘मंदिर पॉलिटिक्स’ और ‘कल्चरल कनेक्ट’ ममता बनर्जी के ठोस वोट बैंक में कितनी बड़ी सेंध लगा पाती है. 29 अप्रैल को जनता इस सियासी मैच का आखिरी फैसला सुनाएगी.

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Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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