उत्तराखंड की पुष्कर धामी सरकार ने टोल टैक्स को लेकर बड़ा फैसला किया है. सरकार ने नैनीताल में एंट्री के लिए टोल टैक्स अनिवार्य कर दिया है, यानी अब स्थानीय लोगों और पर्यटकों को नैनीताल में (चुंगी) देना होगा. अन्य राज्यों और प्रदेश के अन्य जिलों से आने वाले लोगों को नैनीताल में एंट्री के लिए बॉर्डर पर 100 रुपये प्रति बाइक और 300 रुपये प्रति कार टैक्स देना होगा. ऐसे में अब उत्तराखंड में पर्यटन के शौकीनों का सफर महंगा हो गया है, जिससे उनकी जेब पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है.
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गाजियाबाद की कंपनी को दिया है ठेका
बता दें कि बुधवार रात 12 बजे से नैनीताल में एंट्री टैक्स का सिस्टम लागू हो गया. तल्लीताल लेक ब्रिज, बारापत्थर और फांसी गधेरा पर बनी चुंगी पर टैक्स की वसूली भी शुरू हो गई है. नगर पालिका ने गाजियाबाद की कंपनी एमजी इन्फ्रा को 24.55 करोड़ रुपये में चुंगी वसूलने का ठेका दिया है और कंपनी के पास यह ठेका मार्च 2028 तक रहेगा. वहीं एंट्री टैक्स सिस्टम के तहत कुछ वाहनों को एंट्री टैक्स से छूट भी दी गई है, यानी कुछ वाहनों को एंट्री टैक्स के दायरे से बाहर करके राहत दी गई है.
इन वाहनों को नहीं देना होगा एंट्री टैक्स
बता दें कि UK-04 यानी नैनीताल में रजिस्टर्ड कारों और बाइकों को एंट्री टैक्स नहीं देना होगा. वहीं उत्तराखंड के अन्य जिलों से आने वाली बाइकों और स्कूटी को 100 रुपये और कार समेत सभी चारपहिया वाहनों को 200 रुपये एंट्री फीस देनी होगी. वहीं अन्य राज्यों से आने वाले चारपहिया और अन्य बड़े वाहनों को 300 रुपये एंट्री टैक्स देना होगा. इसक अलावा नैनीताल शहर में रहने वाले लोग, जिनके वाहन नैनीताल में रजिस्टर्ड नहीं हैं, वे 800 रुपये फीस देकर नगर पालिका से एंट्री पास बनवा सकते हैं.
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नैनीताल के इन लोगों को देना होगा टैक्स
बता दें कि नैनीताल के जो लोग पढ़ाई और नौकरी के लिए बाहर रहते हैं और वहां अपने वाहन खरीदकर रजिस्टर्ड कर चुके हैं, उन्हें भी अब घर लौटते समय एंट्री टैक्स देना होगा. लेकिन लोगों का कहना है कि नैनीताल में रहने वाले लोगों को भी एंट्री टैक्स देना होगा, यह गलत है. नैनीताल शहर में पार्किंग फीस और ग्रीन टैक्स पहले से देना पड़ता है. अब एंट्री टैक्स लगा दिया गया है. इससे लगता है कि नैनीताल अब टूरिज्म सिटी कम और सरकार के लिए रेवेन्यू का सोर्स ज्यादा बन गया है.
उत्तराखंड की पुष्कर धामी सरकार ने टोल टैक्स को लेकर बड़ा फैसला किया है. सरकार ने नैनीताल में एंट्री के लिए टोल टैक्स अनिवार्य कर दिया है, यानी अब स्थानीय लोगों और पर्यटकों को नैनीताल में (चुंगी) देना होगा. अन्य राज्यों और प्रदेश के अन्य जिलों से आने वाले लोगों को नैनीताल में एंट्री के लिए बॉर्डर पर 100 रुपये प्रति बाइक और 300 रुपये प्रति कार टैक्स देना होगा. ऐसे में अब उत्तराखंड में पर्यटन के शौकीनों का सफर महंगा हो गया है, जिससे उनकी जेब पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है.
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गाजियाबाद की कंपनी को दिया है ठेका
बता दें कि बुधवार रात 12 बजे से नैनीताल में एंट्री टैक्स का सिस्टम लागू हो गया. तल्लीताल लेक ब्रिज, बारापत्थर और फांसी गधेरा पर बनी चुंगी पर टैक्स की वसूली भी शुरू हो गई है. नगर पालिका ने गाजियाबाद की कंपनी एमजी इन्फ्रा को 24.55 करोड़ रुपये में चुंगी वसूलने का ठेका दिया है और कंपनी के पास यह ठेका मार्च 2028 तक रहेगा. वहीं एंट्री टैक्स सिस्टम के तहत कुछ वाहनों को एंट्री टैक्स से छूट भी दी गई है, यानी कुछ वाहनों को एंट्री टैक्स के दायरे से बाहर करके राहत दी गई है.
इन वाहनों को नहीं देना होगा एंट्री टैक्स
बता दें कि UK-04 यानी नैनीताल में रजिस्टर्ड कारों और बाइकों को एंट्री टैक्स नहीं देना होगा. वहीं उत्तराखंड के अन्य जिलों से आने वाली बाइकों और स्कूटी को 100 रुपये और कार समेत सभी चारपहिया वाहनों को 200 रुपये एंट्री फीस देनी होगी. वहीं अन्य राज्यों से आने वाले चारपहिया और अन्य बड़े वाहनों को 300 रुपये एंट्री टैक्स देना होगा. इसक अलावा नैनीताल शहर में रहने वाले लोग, जिनके वाहन नैनीताल में रजिस्टर्ड नहीं हैं, वे 800 रुपये फीस देकर नगर पालिका से एंट्री पास बनवा सकते हैं.
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बता दें कि नैनीताल के जो लोग पढ़ाई और नौकरी के लिए बाहर रहते हैं और वहां अपने वाहन खरीदकर रजिस्टर्ड कर चुके हैं, उन्हें भी अब घर लौटते समय एंट्री टैक्स देना होगा. लेकिन लोगों का कहना है कि नैनीताल में रहने वाले लोगों को भी एंट्री टैक्स देना होगा, यह गलत है. नैनीताल शहर में पार्किंग फीस और ग्रीन टैक्स पहले से देना पड़ता है. अब एंट्री टैक्स लगा दिया गया है. इससे लगता है कि नैनीताल अब टूरिज्म सिटी कम और सरकार के लिए रेवेन्यू का सोर्स ज्यादा बन गया है.