राणा सांगा पर दिए बयान को लेकर यूपी में सियासत गरमाई हुई है। इस बीच सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने अपने दिए बयान पर खेद प्रकट किया है। सपा सांसद ने कहा कि मेरे इस वक्तव्य से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, जबकि मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। मुझे इसका खेद है, मैं सभी जाति, धर्म और संप्रदायों का सम्मान करता हूं। इधर सपा सांसद ने गुरुवार सुबह हरीपर्वत थाना में करणी सेना के ओकेंद्र राणा और अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। सांसद के बेटे ने घर में तोड़फोड़ और लूट का मामला दर्ज कराया है।
सपा सांसद से मिलेंगे शिवपाल यादव
बता दें कि बुधवार शाम को करणी सेना के कार्यकर्ता आगरा में रामजीलाल सुमन के घर के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान उग्र हुए कार्यकर्ताओं ने घर में तोड़ाफोड़ की। घर के बाहर खड़ी गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए। प्रदर्शन के दौरान पथराव और गाड़ियों मे तोड़फोड़ की गई। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए। मामले में सांसद के बेटे ने हरीपर्वत थाना में मामला दर्ज कराया है। शिकायत में घर में तोड़फोड़ और लूट और जान से मारने की नीयत से हमला करने की बात कही गई है। इसके बाद भीड़ ने सांसद और उनके परिवार के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल किया। वहीं आज सपा विधायक शिवपाल यादव रामजीलाल सुमन से मिलने उनके घर पहुंचेंगे।
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राजपूत समाज के गौरव की अनेक गाथाएं
वहीं मामला बढ़ता देख सपा सांसद ने आज अपनी टिप्पणी पर खेद प्रकट किया है। सपा सांसद ने कहा कि राजपूत समाज के गौरव की अनेक गाथाएं हैं। सामाजिक संरचना में उनका योगदान उल्लेखनीय है। सपा सांसद ने पत्र में कहा कि राज्यसभा में वक्तव्य के दौरान उनके कहने का आशय था कि हमें इतिहास के दबे मुर्दों को पुनर्जीवित नहीं करना चाहिए। इसके विपरीत मेरे वक्तव्य की मूल भावना छोड़कर अनेक विवाद उत्पन्न किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक जीवन समाजवादी विचारधारा के मूल्यों के प्रति समर्पित रहा है।
जानें क्यों दिया बयान?
सपा सांसद ने कहा कि उनके संसदीय क्षेत्र फिरोजाबाद, आगरा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है, जो ये कह सके उनके द्वारा कभी भी जाति या धर्म की राजनीति की गई हो या इस आधार पर किसी की सहायता नहीं की गई हो। उन्होंने आगे कहा कि हमें इतिहास से सीख लेकर न्याय संगत समाज के निर्माण की दिशा में मिलकर कार्य करना चाहिएए न कि समाज में वैमनस्यता पैदा करनी चाहिएए यही मेरे बयान की मूल भावना थी।
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