नोएडा प्राधिकरण के बहुचर्चित मुआवजा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने विशेष जांच दल (SIT) को कार्यमुक्त कर दिया है. शीर्ष अदालत ने पूरे मामले की आगे की जांच उत्तर प्रदेश स्टेट विजिलेंस को सौंपने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने विजिलेंस विभाग को तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है.
गौरतलब है कि SIT ने हाल ही में अपनी जांच के दौरान नोएडा के फेज-1 थाने में प्राधिकरण के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों तथा कथित बिचौलियों के खिलाफ छह अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई थीं. जांच में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण प्रक्रिया में अनियमितताओं तथा सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप सामने आए थे.
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब पूरे मामले की जांच स्टेट विजिलेंस की निगरानी में आगे बढ़ेगी. माना जा रहा है कि विजिलेंस दर्ज एफआईआर, दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन पड़ताल करेगी.
इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने SIT को आदेश दिया कि वह अपने पास मौजूद केस के सभी रिकॉर्ड और डॉक्यूमेंट्स अब विजिलेंस विभाग को सौंप दे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'इस केस की जांच जल्द से जल्द पूरी कर ली जाए और इसके लिए ज्यादा से ज्यादा 3 महीने का वक्त उसके पास है.' शीर्ष अदालत ने विजिलेंस से कहा कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.
इस मामले पर प्रदेशभर की नजर बनी हुई है, क्योंकि जांच के निष्कर्षों के आधार पर कई अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है.
नोएडा प्राधिकरण के बहुचर्चित मुआवजा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने विशेष जांच दल (SIT) को कार्यमुक्त कर दिया है. शीर्ष अदालत ने पूरे मामले की आगे की जांच उत्तर प्रदेश स्टेट विजिलेंस को सौंपने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने विजिलेंस विभाग को तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है.
गौरतलब है कि SIT ने हाल ही में अपनी जांच के दौरान नोएडा के फेज-1 थाने में प्राधिकरण के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों तथा कथित बिचौलियों के खिलाफ छह अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई थीं. जांच में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण प्रक्रिया में अनियमितताओं तथा सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप सामने आए थे.
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब पूरे मामले की जांच स्टेट विजिलेंस की निगरानी में आगे बढ़ेगी. माना जा रहा है कि विजिलेंस दर्ज एफआईआर, दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन पड़ताल करेगी.
इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने SIT को आदेश दिया कि वह अपने पास मौजूद केस के सभी रिकॉर्ड और डॉक्यूमेंट्स अब विजिलेंस विभाग को सौंप दे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘इस केस की जांच जल्द से जल्द पूरी कर ली जाए और इसके लिए ज्यादा से ज्यादा 3 महीने का वक्त उसके पास है.’ शीर्ष अदालत ने विजिलेंस से कहा कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.
इस मामले पर प्रदेशभर की नजर बनी हुई है, क्योंकि जांच के निष्कर्षों के आधार पर कई अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है.