Bareilly News: यूपी के बरेली से शर्मनाक घटना सामने आई है। जहां एक 11वीं की छात्रा को परीक्षा के दौरान पीरियड आने पर प्रिंसिपल से सेनेटरी पैड उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उसकी मदद करने की बजाय उसे एक घंटे तक क्लास के बाहर खड़ा रखा गया।
बता दें, पीड़ित बच्ची 11वीं क्लास में पढ़ती है। बीती 25 जनवरी को स्कूल में परीक्षा थी और उसी दौरान छात्रा के पीरियड शुरू हो गए। वह एग्जाम छोड़कर नहीं जा सकती थी, इसलिए उसने इस बारे में प्रिंसिपल को बताया। आरोप है कि प्रिंसिपल ने बच्ची को क्लासरूम से बाहर खड़ा कर दिया।
लड़की के परिजनों ने की शिकायत
परिवार के अनुसार, 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की को परीक्षा हॉल के बाहर एक घंटे से ज्यादा इंतजार करना पड़ा, लेकिन उसे पैड नहीं दिया गया। फिर उसे परीक्षा देने से मना कर दिया गया और उसी कपड़ों में घर भेज दिया गया।
परिवार का कहना है कि बच्ची ने प्रिंसिपल से सेनेटरी पैड मांगा था। पहले तो प्रिंसिपल ने बच्ची की बात को अनदेखा किया। जब उसने फिर अपनी समस्या बताई तो कथित तौर पर उसे क्लासरूम के बाहर कर दिया और एक घंटे तक खड़ा रहने को कहा गया। जब इस बारे में बच्ची के पिता को पता चला तो उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई।
उन्होंने बताया कि उसे बहुत बुरी हालत में घर लौटना पड़ा। वह सदमे में है और अब शर्मिंदगी के कारण स्कूल जाने से इनकार कर रही है। उन्होंने स्कूलों के जिला इंस्पेक्टर (DIOS), राज्य महिला आयोग और महिला कल्याण विभाग में भी शिकायत की। इसके बाद DIOS देवकी नंदन ने पिता को मामले में जांच का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सबूतों को देखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
पिछले साल जारी हुई थी एडवाइजरी
पिछले साल केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने देशभर के स्कूलों के लिए एडवाइजरी जारी की थी। इसमें निर्देश दिया गया था कि दसवीं और बारहवीं कक्षा की छात्राओं को बोर्ड की परीक्षा के समय आराम करने के लिए ब्रेक दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही सभी परीक्षा सेंटर्स पर फ्री सेनेटरी पैड उपलब्ध होने चाहिए। यह एडवाइजरी सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, CBSE, केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) और नवोदय विद्यालय समिति (NVS) पर लागू है। ऐसा इसलिए किया गया ताकि सभी छात्राएं अपना पूरा ध्यान परीक्षा पर लगा सकें।
मंत्रालय ने यह भी कहा था कि पीरियड्स में हाइजीन और सेहत को लेकर स्कूलों में कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे ताकि बच्चों, स्टाफ और अध्यापकों में जागरूकता बढ़ाई जाए। इससे पीरियड्स से जुड़ी गलत धारणा दूर होगी और स्कूलों का माहौल बेहतर बनेगा।
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