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प्यार के चक्कर में पाकिस्तान पहुंचा अलीगढ़ का बादल, लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद

Aligarh Man Pakistan Jail: फेसबुक प्यार में बिना वीजा पाकिस्तान पहुंचे अलीगढ़ के बादल बाबू सजा पूरी होने के बाद भी लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद हैं. जानिए पूरी कहानी और ताजा अपडेट.

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Aligarh Man Pakistan Jail: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का रहने वाला बादल बाबू फेसबुक पर हुई पाकिस्तानी महिला से मोहब्बत के चक्कर में बिना वीजा सरहद पार कर पाकिस्तान पहुंच गया. वर्तमान में वह लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद है. परिजनों के अनुसार, बादल अपनी कानूनी सजा पूरी कर चुका है, लेकिन स्वदेश वापसी की कागजी प्रक्रिया में देरी के कारण अब भी सलाखों के पीछे इंतजार कर रहा है.

ऑनलाइन मुलाकात से पाकिस्तान की जेल तक

दिल्ली में दर्जी का काम करने वाले बादल बाबू की जिंदगी तब बदल गई जब उसकी ऑनलाइन मुलाकात पाकिस्तान की ‘सना’ नाम की महिला से हुई. धीरे-धीरे यह दोस्ती प्रेम संबंधों में बदल गई और बादल ने बिना किसी वैध दस्तावेज के पाकिस्तान जाने का जोखिम उठा लिया. अगस्त 2024 में पाकिस्तान जाने का पहला प्रयास असफल रहा. अक्टूबर 2024 में बिना वीजा सरहद पार कर पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हुआ.

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परिजनों के दावों के अनुसार, जब सना ने बादल से शादी करने से इनकार कर दिया, तब भी वह वापस लौटने के बजाय पाकिस्तान में ही रुक गया और वहां मजदूरी व बकरी चराने का काम करने लगा.27 दिसंबर 2024 को जब वह अपने मालिक की बकरियां चरा रहा था, तब स्थानीय निवासियों को उसकी बोली और भारतीय लहजे पर शक हुआ. पाकिस्तान पुलिस को सूचित किया गया, जिसके बाद उसे अवैध घुसपैठ के आरोप में गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया. सजा पूरी करने के बाद लाहौर की कोट लखपत जेल में रिहाई का इंतजार कर रहा है.

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वायरल कोर्ट वीडियो का सच

गिरफ्तारी के दौरान कोर्ट परिसर से एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें बादल अपने परिवार से चिंता न करने की बात कह रहा था. हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे पासपोर्ट अधिनियम के उल्लंघन का दोषी ठहराया गया.

सजा पूरी, फिर भी रिहाई में देरी क्यों?

भारत और पाकिस्तान के बीच अवैध रूप से सीमा पार करने वाले नागरिकों की रिहाई और स्वदेश वापसी एक जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया है. कानूनी रूप से सजा पूरी होने के बाद भी कैदी को तब तक रिहा नहीं किया जा सकता जब तक कि दोनों देशों के विदेश मंत्रालय नागरिकता का सत्यापन न कर लें.

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First published on: Jul 16, 2026 04:10 PM

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About the Author

Vijay Kumar

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.

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