प्रयागराज में चल रहे पावन माघ मेले के शिविरों में अचानक लगी भीषण आग ने श्रद्धालुओं और कल्पवासियों के बीच दहशत पैदा कर दी है. संगम किनारे बसे इस अस्थायी शहर में आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते 15 टेंट और 20 दुकानें पूरी तरह जलकर राख हो गईं. जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने शिविरों में आराम कर रहे थे, लेकिन लपटों को देख सभी अपनी जान बचाकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे. गनीमत रही कि इस अग्निकांड में अभी तक किसी जनहानि की खबर नहीं है, लेकिन लाखों रुपये का सामान जलकर बर्बाद हो गया है.
अग्निकांड के बाद मची अफरा-तफरी
आग लगने की यह घटना माघ मेले के सेक्टर क्षेत्र में हुई, जहाँ अचानक धुआं और ऊंची लपटें उठती देख आसपास के लोग चिल्लाने लगे. तेज हवाओं के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और पास के टेंटों को अपनी चपेट में ले लिया. सूचना मिलते ही मौके पर मेला प्रशासन और फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां पहुँचीं, जिन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया. कल्पवासियों ने बताया कि आग इतनी भयानक थी कि उन्हें अपना सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला और वे सिर्फ अपने परिवार के साथ बाहर निकल पाए.
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लाखों का नुकसान और कल्पवासियों का बिखरा सामान
इस हादसे में कल्पवासियों के रहने के टेंटों के साथ-साथ मेले में सजी खाने-पीने और पूजा सामग्री की 20 दुकानें भी जल गईं. दुकानदारों का कहना है कि उनकी पूरी पूंजी इस आग की भेंट चढ़ गई है और अब उनके पास घर लौटने तक के पैसे नहीं बचे हैं. कल्पवासियों के राशन, कपड़े और जरूरी दस्तावेज भी आग में जलकर खाक हो गए हैं. प्रशासन अब नुकसान का आकलन करने में जुटा है ताकि प्रभावित लोगों को उचित सहायता प्रदान की जा सके. मेले के बीचों-बीच इस तरह की घटना ने सुरक्षा इंतजामों और फायर सेफ्टी की पोल खोलकर रख दी है.
सुरक्षा इंतजामों पर सवाल और जांच के आदेश
प्रयागराज मेला प्रशासन ने इस पूरी घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि आग लगने के असली कारणों का पता लगाया जा सके. शुरुआती आशंका जताई जा रही है कि किसी टेंट में शॉर्ट सर्किट या खाना बनाते समय गैस चूल्हे से निकली चिंगारी की वजह से यह हादसा हुआ होगा. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी शिविरों में फायर उपकरणों की दोबारा जांच की जाएगी. फिलहाल प्रभावित कल्पवासियों के रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है ताकि उनकी साधना और स्नान में कोई बाधा न आए.










