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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) की तीन दिवसीय बैठक 13 से 15 मार्च 2026 तक हरियाणा के समालखा में आयोजित होगी. इस बैठक में RSS प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले समेत संघ के शीर्ष पदाधिकारी शामिल होंगे. बताया जा रहा है कि दोनों शीर्ष नेता 8 मार्च तक समालखा पहुंच जाएंगे और मुख्य बैठक के बाद 17 मार्च तक चलने वाली आंतरिक बैठकों में भी हिस्सा लेंगे. ये बैठक संघ के शताब्दी वर्ष के बीच हो रही है, इसलिए इसकी अहमियत सामान्य सालों से ज्यादा मानी जा रही है. प्रतिनिधि सभा संघ की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई है, जिसमें देशभर से करीब 1400–1500 प्रतिनिधि शामिल होते हैं. यहां लिए गए फैसले ना केवल संगठन की दिशा तय करते हैं, बल्कि व्यापक सामाजिक और राजनीतिक संकेत भी देते हैं.

बैठक में क्या होगा खास?

तीन दिवसीय बैठक में साल 2025-26 के कामों की समीक्षा के साथ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का आकलन किया जाएगा. कार्य विस्तार, कार्यकर्ता निर्माण और प्रशिक्षण पर विस्तृत चर्चा होगी. अप्रैल से जून तक आयोजित होने वाले संघ शिक्षा वर्गों की तैयारियों पर भी विचार किया जाएगा. इसके साथ ही देश के वर्तमान हालातों पर चर्चा कर कुछ प्रस्ताव पारित किए जाने की संभावना है. सरसंघचालक के हालिया प्रवास के दौरान उठे अलग-अलग मुद्दों को भी बैठक में शामिल किया जा सकता है. इस बार बैठक का सबसे खास एजेंडा संघ के कार्यक्षेत्र के पुनर्गठन को माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, संघ अपने प्रांत ढांचे को और नीचे तक ले जाने की तैयारी में है. इसके तहत प्रांतों को संभागों में विभाजित कर संगठनात्मक कार्य को ज्यादा प्रभावी बनाने की योजना है. इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर नवंबर से जिला संघचालकों के चुनाव कराने और नई संरचना लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.

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सभा में कौन-कौन शामिल?

प्रतिनिधि सभा में संघ के सभी अखिल भारतीय पदाधिकारी, क्षेत्र और प्रांत स्तर के संघचालक, कार्यवाह, प्रचारक और विभिन्न कार्यविभागों के प्रमुख शामिल होंगे. इसके अलावा संघ से जुड़े समविचारी संगठनों, जिनमें भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय मजदूर संघ, सेवा भारती, स्वदेशी जागरण मंच, विद्या भारती, आरोग्य भारती, एकल अभियान, हिंदू जागरण, अधिवक्ता परिषद, राष्ट्र सेविका समिति और राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे.

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बीजेपी पर असर और संगठन की नई बिसात

इस बैठक के राजनीतिक परिणाम बीजेपी से भी जुड़े माने जा रहे हैं. पिछले कुछ समय से पार्टी के कई राज्यों में संगठन महामंत्री के पद खाली या अस्थायी व्यवस्था में चल रहे हैं. मध्य प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में संघ पृष्ठभूमि के पदाधिकारियों की भूमिकाओं में बदलाव ने इस चर्चा को और तेज किया है. सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में लगभग 6 से 8 राज्यों में संगठन महामंत्री का पद या तो खाली है या अतिरिक्त प्रभार के जरिए चलाया जा रहा है. ये हालात सिर्फ प्रशासनिक कमी नहीं, बल्कि एक बड़े संगठनात्मक पुनर्संतुलन की ओर इशारा करती है. संघ अपने प्रचारकों को पुनः व्यवस्थित कर रहा है, जबकि पार्टी नए ढांचे और नए चेहरों के साथ आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रही है. बीजेपी के सामने चुनौती सिर्फ पद भरने की नहीं, बल्कि ऐसा संगठन खड़ा करने की है जो आने वाले एक-दो चुनावी चक्र नहीं, बल्कि अगले एक-दो दशकों की राजनीति को ध्यान में रखकर तैयार किया गया हो. इसी वजह से संगठन मंत्रियों के स्तर पर भी पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़कर नए प्रयोगों की चर्चा है.

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क्या है प्लान?

संकेत ये भी हैं कि इस बार केवल संघ से आने वाले पूर्णकालिक प्रचारकों पर निर्भर रहने के बजाय, पार्टी कुछ राज्यों में संगठन के बाहर के नेताओं को भी संगठन महामंत्री जैसी जिम्मेदारियों में ला सकती है. इससे संगठन में विविध अनुभव और नई कार्यशैली लाने की कोशिश होगी. साथ ही, केंद्रीय स्तर पर भी कुछ बदलाव संभव माने जा रहे हैं, ताकि राज्य और केंद्र के संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके. ऐसे में समालखा में होने वाली प्रतिनिधि सभा को बीजेपी के संगठनात्मक भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि बैठक के बाद संघ और बीजेपी के बीच नई तैनातियों और भूमिकाओं को लेकर साफ संकेत सामने आ सकते हैं, जो आने वाले समय में पार्टी की संरचना और चुनावी तैयारी दोनों को प्रभावित करेंगे.

First published on: Feb 23, 2026 07:18 PM

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