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दिल्ली स्थित कांग्रेस हेडक्वार्टर में गुरुवार को पंजाब कांग्रेस की 5 घंटे तक बैठक हुई, जिसमें पंजाब के दिग्गज कांग्रेसी नेताओं ने हिस्सा लिया। इसकी अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब के इंचार्ज भूपेश बघेल ने की। इस मीटिंग में ऑल इंडिया के सेक्रेटरी आलोक शर्मा भी उपस्थित रहे। कांग्रेसी नेताओं ने खुलकर अपनी बात रखी और बैठक में हरेक नेता को सिलसिलेवार सुना गया।
जिसके दिल में जो था, कांग्रेसी नेताओं ने पार्टी हाईकमान को बताया। उन्होंने बताया कि इस समय पार्टी किन परिस्थितियों से गुजर रही है और आने वाले समय में पार्टी को दूसरी पार्टियों का मुकाबला करने के लिए क्या-क्या करना चाहिए? बूथ स्तर तक पार्टी को किस तरह से मजबूत किया जाए? पार्टी से पंजाब के लोगों में एक संदेश जाए कि कांग्रेस के बड़े नेता एक हो चुके हैं और अब कांग्रेस पंजाब के लोगों की लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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पंजाब विधानसभा के बजट सत्र में कांग्रेस पूरे दमखम के साथ विपक्ष की भूमिका में उतरती हुई दिखाई देगी और विधानसभा के अंदर भी कांग्रेस के विधायकों के सुर एक दिखाई देंगे। इसके लिए पार्टी ने विधायकों को साफ कहा कि विधानसभा के अंदर मजबूत और आक्रामक विपक्ष की भूमिका में कांग्रेस दिखाई देनी चाहिए, न कि अलग-अलग सुरों वाली कांग्रेस।
सूत्रों के अनुसार, इस 5 घंटे के मंथन में जो बातें उभरकर सामने आईं, उनमें सभी नेताओं ने एकमत होकर कहा कि पार्टी में सीनियरिटी और लॉयल्टी वाले नेताओं को पहल के आधार पर देखा जाना चाहिए, चाहे वह छोटा वर्कर हो या फिर कोई बड़ा नेता। इसी के साथ ही अलग-अलग पार्टियों से दलबदल कर कांग्रेस में आए या फिर आने वाले नेताओं पर कांग्रेस ज्यादा भरोसा नहीं करेगी, बल्कि अपने पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं के बल पर ही मिशन 2027 को सफल बनाएगी।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में ज्यादातर नेताओं ने कहा कि जो हमारे नेता और कार्यकर्ता इस समय पार्टी से नाराज चल रहे हैं, अपने-अपने घरों में बैठे हैं, पार्टी के नेता उनके घरों में जाकर उनको मनाएंगे और पार्टी के लिए उनको तैयार करेंगे। जो नेता इस समय दूसरी पार्टियों के साथ संपर्क में रह रहे हैं, उनके ऊपर पार्टी हाईकमान लगातार नजर रख रहा है। इसी तरह कांग्रेस के अंदर जो वफादार कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं, उनका पहल के आधार पर संगठन में एडजेस्ट भी किया जाएगा और पंजाब भर में उनको अलग-अलग स्थान पर पूरी तरह से एक्टिव करने के लिए जिम्मेदारियां भी दी जाएंगी।
कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जिस तरह से केंद्रीय एजेंसियों और स्थानीय सरकार का दबाव डाला जा रहा है, उसको लेकर कांग्रेस हाईकमान एक बड़ी रणनीति भी बना रहा है। साथ ही कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि किसी भी तरह से किसी भी एजेंसी या सरकार का कोई भी दबाव बर्दाश्त न किया जाए और पार्टी अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़े, ताकि इन एजेंसियों को कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता मुंहतोड़ जवाब दे सके।
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