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मुंबई

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उद्धव ठाकरे बोले- जरा भी नैतिकता है तो शिंदे-फडणवीस इस्तीफा दें

Uddhav On SC Decision: महाराष्ट्र में उद्धव और शिंदे गुट के बीच विवाद मामले पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। फैसले को लेकर उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर इस मुख्यमंत्री(शिंदे) और उपमुख्यमंत्री(देवेंद्र फडणवीस) में जरा भी नैतिकता होगी तो इस्तीफा देना चाहिए जैसे मैंने इस्तीफा दिया था। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री […]

Uddhav On SC Decision: महाराष्ट्र में उद्धव और शिंदे गुट के बीच विवाद मामले पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। फैसले को लेकर उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर इस मुख्यमंत्री(शिंदे) और उपमुख्यमंत्री(देवेंद्र फडणवीस) में जरा भी नैतिकता होगी तो इस्तीफा देना चाहिए जैसे मैंने इस्तीफा दिया था।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हम चाहते हैं कि पूरे देश में अधिक से अधिका पार्टियां एकजुट हों, मिलकर हम सब लड़ेंगे। आज जो केंद्र में है वे देश के लिए कोई काम नहीं कर रहे हैं इसलिए देश के हित में हम सब मिलकर लड़ेंगे। अब यह तय होगा कि कब सबकी मीटिंग होगी।

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उद्धव बोलेे- देश में प्रजातंत्र की रक्षा हमारा काम है

उद्धव ने कहा कि इस देश में प्रजातंत्र की रक्षा करना हमारा काम है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर मैं इस्तीफा नहीं देता तो शायद मैं फिर मुख्यमंत्री बन जाता। मैं मेरे लिए नहीं लड़ रहा, मेरी लड़ाई जनता के लिए, देश के लिए है। राजनीति में मतभेद होते रहते हैं लेकिन हमारा एक मत यह है कि इस देश को बचाना है।

अशोक गहलोत बोले- सुप्रीम कोर्ट ने देश को संदेश दिया है

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आज सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और महाराष्ट्र सरकार के मामलों में फैसले सुनाए हैं जो स्वागत योग्य हैं। ये शुभ संकेत है, सुप्रीम कोर्ट ने देश को संदेश दिया है। महाराष्ट्र में 50 विधायकों की हॉर्स ट्रेडिंग हुई थी, उसपर करारा तमाचा लगाया है। हमें जनता के बीच जाकर बताना होगा कि ये(भाजपा) देश से लोकतंत्र खत्म कर देंगे।

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गहलोत ने महाराष्ट्र राजनीतिक पंक्ति पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा कि बीजेपी और आरएसएस फासीवादी हैं। भाजपा और आरएसएस को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में सरकार गिराई। हमारी (राजस्थान) सरकार बची नहीं तो हमारे साथ भी यही स्थिति होती। लोगों को इन लोगों से खुद को बचाना चाहिए।

वहीं, उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिंदे गुट का व्हिप गैरकानूनी है, इसका मतलब है कि उनका व्हिप गैरकानूनी है और हमारे व्हिप ने जो आदेश दिया वह कानूनी है, तो उस व्हिप के मुताबिक सबकी(शिंदे गुट) सदस्यता निरस्त हो जाएगी। उद्धव गुट के ही नेता अनिल परब ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जो याचिकाएं थी वह फिर से अध्यक्ष के पास जाएंगी लेकिन मुख्य सचेतक सुनील प्रभु होंगे क्योंकि दूसरे मुख्य सचेतक को अयोग्य ठहराया गया है इसका मतलब है कि जो व्हिप सुनील प्रभु ने जारी किया था जिसका उल्लंघन हुआ है वह रिकॉर्ड पर है और इसकी जल्द सुनवाई होगी और इनलोगों(शिंदे गुट) की सदस्यता निरस्त होगी।

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शिंदे गुट के नेता बोले- हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं

शिंदे गुट के नेता राहुल शेवाले ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हम स्वागत करते हैं…सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो व्हिप नियुक्त करने का फैसला है वह राजनीतिक पार्टी ले सकती है और चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे की पार्टी को सभी हक दिए हैं इसलिए अब स्पीकर फैसला लेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि संजय राउत पागल हो गए हैं और पागल आदमी पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्हें पागल आदमी जैसे बोलने दो।

उद्धव को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने उद्धव ठाकरे को राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उद्धव ने फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया था और इस्तीफा दे दिया था। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि स्पीकर को अयोग्यता याचिकाओं पर उचित समय के भीतर फैसला करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि यथास्थिति बहाल नहीं की जा सकती क्योंकि उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया और अपना इस्तीफा दे दिया। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि गोगावाले (शिंदे समूह) को शिवसेना पार्टी के मुख्य सचेतक के रूप में नियुक्त करने का स्पीकर का फैसला अवैध था।

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उद्धव गुट के वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने व्हिप गोगावले की नियुक्ति को गलत माना है और कहा है कि व्हिप सिर्फ राजनीतिक पार्टी की हो सकती है न की विधायिका पार्टी की। अब स्पीकर को जल्द से जल्द अयोग्यता याचिका पर फैसला करना होगा।

महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पूर्व कानून और न्याय मंत्री में डॉ अश्विनी कुमार ने कहा कि स्पीकर के अधिकारों को सुप्रीम कोर्ट ने सहमति दी है और राज्यपाल के फैसले को गलत बताया क्योंकि उनके सामने कोई परिप्रेक्ष्य नहीं था जिसके आधार पर वे अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर फ्लोर टेस्ट करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने खुद ही इस्तीफा दे दिया था इसलिए उनकी सरकार को पुनर्स्थापित नहीं कर सकते।

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First published on: May 11, 2023 02:00 PM

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