सुनेत्रा पवार और प्रशांत किशोर की पांच घंटे की मुलाकात के बाद एनसीपी के अजित पवार गुट में हलचल थमती नजर नहीं आ रही है. प्रशांत किशोर की पार्टी में बढ़ती भूमिका को लेकर नेताओं के अलग-अलग बयान अब अंदरूनी खींचतान की ओर इशारा कर रहे हैं. खासकर प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे को लेकर चर्चा तेज है.
सूत्रों के मुताबिक, प्रशांत किशोर ने संगठन में बदलाव और प्रदेश अध्यक्ष की जगह किसी युवा चेहरे को मौका देने का सुझाव दिया है. इतना ही नहीं, उनकी टीम जल्द ही महाराष्ट्र में एनसीपी के संगठन और जनाधार को लेकर सर्वे भी कर सकती है. इसी रिपोर्ट के आधार पर पार्टी में बड़े संगठनात्मक बदलाव की चर्चा है.
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तटकरे का तंज…‘मैं थ्योरी नहीं, प्रैक्टिकल में विश्वास करता हूं’
प्रशांत किशोर की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कहा कि वह ‘थ्योरी में नहीं, प्रैक्टिकल में विश्वास करते हैं.’ तटकरे ने यहां तक कहा कि प्रशांत किशोर को पार्टी का रणनीतिक सलाहकार बनाया गया है, इसकी जानकारी भी उन्हें नहीं है. तटकरे का यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि पार्टी के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने इसके उलट प्रशांत किशोर को एनसीपी की पॉलिसी और स्ट्रैटेजी तैयार करने की जिम्मेदारी दिए जाने की बात स्वीकार की है. यानी पार्टी के भीतर ही प्रशांत किशोर की भूमिका को लेकर दो अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं.
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क्या तटकरे की कुर्सी जाएगी?
प्रशांत किशोर की बैठक में मौजूद रहे सांसद पार्थ पवार ने उन खबरों का खंडन किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि तटकरे को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का सुझाव दिया गया है. इसके बावजूद सवाल बरकरार है कि क्या संगठन में बदलाव की तैयारी चल रही है? फिलहाल पार्टी ने तटकरे को हटाने को लेकर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया है. लेकिन सूत्रों के मुताबिक, सर्वे के बाद संगठन में फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
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बीजेपी भी क्यों हुई असहज?
प्रशांत किशोर की सक्रियता का असर महायुति की राजनीति पर भी पड़ सकता है. हाल ही में बिहार के बांकीपुर उपचुनाव में उनकी पार्टी जन सुराज ने बीजेपी उम्मीदवार को हराया था. इसके बाद से प्रशांत किशोर बीजेपी पर लगातार निशाना साध रहे हैं. अब अगर वही प्रशांत किशोर महाराष्ट्र में एनसीपी की चुनावी रणनीति तैयार करते हैं, तो बीजेपी की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर होना स्वाभाविक है.
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सुनेत्रा पवार की बड़ी कवायद?
अजित पवार के बाद एनसीपी की कमान संभाल रहीं सुनेत्रा पवार के सामने पार्टी को मजबूत बनाए रखने की चुनौती है. ऐसे में प्रशांत किशोर की एंट्री को संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है. फिलहाल सवाल सिर्फ तटकरे की कुर्सी का नहीं है. असली सवाल यह है कि क्या प्रशांत किशोर की रणनीति एनसीपी को मजबूत करेगी या पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को और हवा देगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में होने वाले संगठनात्मक फैसलों से मिलेगा.