बॉलीवुड के दमदार अभिनेता नाना पाटेकर अपने बेबाक अंदाज और संजीदा अभिनय के लिए जाने जाते थे. फिल्मों में एक ईमानदार पुलिस अफसर से लेकर भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ने वाले आम नागरिक तक का किरदार निभाने वाले नाना पाटेकर को लेकर अक्सर यह सवाल उठता रहा कि वे राजनीति में क्यों नहीं उतरे.
हकीकत यह है कि नाना पाटेकर का नाम कई बार सक्रिय राजनीति से जुड़ा, लेकिन उन्होंने कभी किसी राजनीतिक दल का झंडा नहीं थामा. कई मौकों पर उन्होंने खुद खुलासा किया है कि देश के लगभग हर प्रमुख राजनीतिक दल की ओर से उन्हें चुनाव लड़ने और पार्टी में शामिल होने के प्रस्ताव मिले.
नाना पाटेकर के अंतिम दर्शनों को उमड़ रहे लोग
भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के पार्थिव शरीर को गोवा के बम्बोलिम स्थित गोवा मेडिकल कॉलेज (GMC) की मॉर्च्युरी में रखा गया है. समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) के अनुसार, मॉर्च्युरी के बाहर उन्हें श्रद्धांजलि देने और अंतिम दर्शन करने के लिए भारी संख्या में लोग जुट रहे हैं. स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ उनके चाहने वाले नम आंखों से अपने चहेते कलाकार को अंतिम विदाई दे रहे हैं.
महाराष्ट्र की राजनीति में नाना पाटेकर का गहरा प्रभाव
महाराष्ट्र की राजनीति में नाना पाटेकर का गहरा प्रभाव रहा. सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही खेमों के बड़े नेताओं से उनके आत्मीय संबंध रहे. बालासाहेब ठाकरे से लेकर शरद पवार तक, सभी उनका बेहद सम्मान करते रहे. इसके बावजूद नाना पाटेकर ने सत्ता की कुर्सी के बजाय जमीन से जुड़े काम को प्राथमिकता दी. उनका मानना था कि जनता की सेवा करने के लिए किसी पद, कुर्सी या राजनीतिक दल के टिकट की जरूरत नहीं होती. जब महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ में किसानों की आत्महत्या की घटनाएं बढ़ीं तो नाना पाटेकर केवल बयानों तक सीमित नहीं रहे.
‘नाम फाउंडेशन’ की स्थापना
साल 2015 में उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर ‘नाम फाउंडेशन’ की स्थापना की. इस संस्था के जरिए उन्होंने सूखा पीड़ित किसानों के परिवारों को सीधी आर्थिक मदद पहुंचाई, गांवों में जल संरक्षण और नदी जोड़ो जैसी जमीनी योजनाओं पर काम किया. जहां नेता अक्सर सिर्फ वादे करते दिखे, वहीं नाना पाटेकर ने खुद गांवों में जाकर लोगों के आंसू पोंछे. नाना पाटेकर का यह साफ रुख रहा कि राजनीति में जाने से व्यक्ति किसी एक दल या विचारधारा के दायरे में बंध जाता है, जबकि एक कलाकार और सच्चा समाजसेवी पूरी जनता का होता है. यही वजह है कि चुनावी राजनीति से दूर रहकर भी वे देश के सबसे प्रभावी और सम्मानित सामाजिक चेहरों में गिने जाते रहे.
संबंधित खबरें
महाराष्ट्र में बढ़ी अक्टूबर की गर्मी, मुंबई लोकल भी हुई प्रभावित
10 hrs agoपेट्रोल पंप सील करने गया था अधिकारी, मालिक के बेटे ने चाकू घोंपकर मार डाला
13 hrs agoडिटर्जेंट और केमिकल से बना रहे थे दूध, महाराष्ट्र में FDA ने मारा छापा
16 hrs ago120 रुपये किलो भिंडी, अदरक 280 के पार, आसमान पर पहुंचे सब्जियों के दाम
1 day agoNMIA से बस, टैक्सी और फ्री शटल की सुविधा शुरू; पुणे का किराया मात्र ₹450
3 days ago'लोग तय करेंगे... ECI नहीं', SIR को लेकर ठाकरे बंधुओं का गर्जना मार्च
4 days ago'लड़ाई जारी रहेगी', मुंबई में केस दर्ज होने के बाद अभिजीत दीपके का ऐलान
5 days agoधारावी में अब दिखेगा पुनर्विकास का नया मॉडल, CM फडणवीस ने किया उद्घाटन
6 days ago'प्रदर्शन में घुस गए BJP के लोग...', CEC के खिलाफ मार्च कर रही CJP का आरोप
6 days agoदुर्गा प्रतिमा ले जा रहे श्रद्धालुओं के वाहन के साथ भिड़ा ट्रक, 7 की मौत
6 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines