मुंबई के जुहू में एक कारोबारी परिवार को निशाना बनाने की ऐसी साजिश सामने आई है, जिसकी शुरुआत बिल्डिंग के सुरक्षा रक्षक की हत्या से हुई थी. कथित प्लान बेहद सुनियोजित था. पहले गार्ड को रास्ते से हटाना, फिर नकली चाबी के सहारे कारोबारी के घर में दाखिल होना और परिवार के तीन सदस्यों की हत्या कर नकदी-जेवर लूट लेना. लेकिन साजिश का अगला कदम उठता, उससे पहले ही जुहू पुलिस ने पूरा खेल बिगाड़ दिया.
पुलिस ने इस मामले में कथित मास्टरमाइंड समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया कि कारोबारी परिवार के घर में रसोइए के तौर पर काम करने वाला जोगेश्वर उदन मल्लिक उर्फ किशन ही कथित तौर पर इस पूरी साजिश का सूत्रधार था. पुलिस का दावा है कि इस वारदात की जमीन करीब दो साल पहले ही तैयार की जाने लगी थी.
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आधी रात को जुटे आरोपी, पहले गार्ड को बनाया निशाना
घटना 1 और 2 अगस्त की दरमियानी रात की है. पुलिस के मुताबिक, रात करीब 12:40 बजे से सुबह 4 बजे के बीच आरोपी जुहू की एक रिहायशी इमारत में पहुंचे. उनके निशाने पर इसी इमारत में रहने वाला कारोबारी और उसका परिवार था. लेकिन कारोबारी के फ्लैट तक पहुंचने से पहले एक बड़ी अड़चन थी -बिल्डिंग का सुरक्षा रक्षक मनोजकुमार अयोध्या यादव.
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आरोपियों ने पहले गार्ड से जान-पहचान बढ़ाई. उसके साथ बैठकर शराब पी और फिर मौका देखकर उस पर हमला कर दिया. 38 वर्षीय मनोज कुमार की कथित तौर पर कपड़े की रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी गई. हत्या के बाद शव को बिल्डिंग की पानी की टंकी में फेंक दिया गया, ताकि वारदात का सुराग जल्द हाथ न लगे. लेकिन आरोपियों को शायद अंदाजा नहीं था कि यही हत्या पुलिस को उस साजिश की तरफ ले जाएगी, जिसका अगला निशाना एक पूरा परिवार था.
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रसोइए ने तैयार किया था पूरा खाका
पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो शक की सुई कारोबारी के घर में काम करने वाले रसोइए जोगेश्वर उदन मल्लिक उर्फ किशन तक पहुंची. पूछताछ में कथित तौर पर ऐसी जानकारी सामने आई, जिसने गार्ड की हत्या को महज एक अलग वारदात मानने की पुलिस की शुरुआती आशंका को बदल दिया. पुलिस के मुताबिक, जोगेश्वर ने कारोबारी के फ्लैट की नकली चाबी तैयार करवाई थी. योजना थी कि इसी चाबी से घर का दरवाजा खोलकर अंदर दाखिल हुआ जाए और कारोबारी, उसकी पत्नी और बेटी को मौत के घाट उतार दिया जाए. इसके बाद घर में रखी नकदी और आभूषण लेकर फरार होना था. यानी गार्ड की हत्या इस कथित साजिश का अंत नहीं, बल्कि शुरुआत थी.
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दो साल से दिमाग में पल रही थी साजिश
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पुलिस के मुताबिक, यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था. आरोप है कि कारोबारी परिवार को निशाना बनाने की साजिश करीब दो साल से रची जा रही थी. मुख्य आरोपी जोगेश्वर ने कथित तौर पर अपने दोस्त विजय गोंजारी को साथ लिया और उसके जरिए तीन अन्य लोगों को भी साजिश में शामिल किया. गिरफ्तार आरोपियों में शरद येरूडकर (41), उसका भाई महादेव येरूडकर (35) और अनिकेत बोरनाक (30) भी शामिल हैं. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतने लंबे समय तक चल रही इस कथित साजिश में आरोपियों ने और क्या-क्या तैयारी की थी.
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गार्ड की हत्या के बाद छठी मंजिल पर पहुंचे
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पहले गार्ड को रास्ते से हटाया और फिर तड़के करीब 4 बजे कारोबारी के फ्लैट की ओर बढ़े. फ्लैट छठी मंजिल पर था और आरोपियों के पास उसकी कथित नकली चाबी भी थी. साजिश के मुताबिक, दरवाजा खुलते ही कारोबारी परिवार पर हमला किया जाना था. लेकिन यहां किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया. नकली चाबी से दरवाजा खोलने की कोशिश की गई, लेकिन लॉक नहीं खुला. दरवाजा नहीं खुला तो आरोपियों को अपना प्लान अधूरा छोड़कर वहां से निकलना पड़ा. यही नाकामी आगे चलकर पुलिस के लिए अहम सुराग बन गई.
पुलिस ने ऐसे जोड़ी साजिश की कड़ियां
गार्ड की हत्या के बाद पुलिस ने जांच के लिए कई टीमें लगाईं. तकनीकी जांच, संदिग्ध गतिविधियों की पड़ताल और पूछताछ के जरिए पुलिस धीरे-धीरे उन लोगों तक पहुंची, जो इस वारदात के पीछे बताए जा रहे हैं. जोगेश्वर मल्लिक और विजय गोंजारी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई. पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान गार्ड की हत्या और कारोबारी परिवार को निशाना बनाने की कथित साजिश का खुलासा हुआ. इसके बाद तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया. फिलहाल पुलिस पांचों आरोपियों से पूछताछ कर रही है. जांच का फोकस इस बात पर भी है कि करीब दो साल से कथित तौर पर चल रही इस साजिश में और कौन-कौन शामिल था और आरोपियों ने कारोबारी परिवार की गतिविधियों पर कितने समय से नजर रखी हुई थी.
जुहू की इस वारदात में एक सुरक्षा रक्षक की जान चली गई, लेकिन कारोबारी परिवार तक पहुंचने से पहले ही पुलिस ने कथित साजिश की कड़ी पकड़ ली. जिस रात आरोपी हत्या और लूट की तैयारी के साथ इमारत में दाखिल हुए थे, उसी रात उनका प्लान अधूरा रह गया, और अब पांच लोग सलाखों के पीछे हैं.