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मुंबई

नेहरू-गांधी विरासत पर सियासी संग्राम! ‘कम्प्रोमाइज्ड नेहरू’ अभियान से गरमाई राजनीति, फडणवीस ने राहुल को दी खुली चुनौती

सोशल मीडिया पर छिड़ी यह बहस अब सियासी मंचों तक पहुंच चुकी है. आने वाले दिनों में संसद से लेकर चुनावी रैलियों तक, नेहरू-गांधी विरासत और राष्ट्रवाद का यह मुद्दा और तेज होने के संकेत दे रहा है. पढ़िये राहुल पांडे की रिपोर्ट.

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Edited By : Akarsh Shukla Updated: Feb 26, 2026 23:29

देश की राजनीति में एक बार फिर नेहरू-गांधी युग को लेकर घमासान तेज हो गया है. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोशल मीडिया पर ‘कम्प्रोमाइज़्ड नेहरू’ नाम से अभियान शुरू कर कांग्रेस पर गंभीर सुरक्षा चूक और विदेशी खुफिया दखल के आरोप लगाए हैं. इस अभियान ने इतिहास, राष्ट्रवाद और विरासत की बहस को फिर से केंद्र में ला खड़ा किया है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर BJP के आधिकारिक हैंडल से एक कथित ‘एक्सपोज़ थ्रेड’ जारी किया गया, जिसमें दावा किया गया कि डिक्लासिफाइड दस्तावेज और इंटेलिजेंस रिकॉर्ड्स ने नेहरू-गांधी दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

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पार्टी का कहना है कि इन खुलासों से देश की जनता को उस दौर की ‘सच्चाई’ जानने का मौका मिलेगा. इसी कड़ी में देवेंद्र फड़नवीस ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि यह खुलासा देश को झकझोर देगा और बताएगा कि किस तरह बार-बार भारत माता को कमजोर किया गया. फडणवीस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे ‘तथ्यों को पढ़ें और सच्चाई जानें.’

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यह पूरा विवाद सीधे तौर पर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और बाद में गांधी परिवार के नेतृत्व से जुड़ा है. नेहरू-गांधी विरासत को लेकर पहले भी वैचारिक टकराव होते रहे हैं, लेकिन इस बार भाजपा ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी प्रभाव जैसे गंभीर मुद्दों से जोड़कर राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है.

वहीं, कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ध्यान भटकाने की रणनीति बताया है. पार्टी का कहना है कि मौजूदा मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है.

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फिलहाल सोशल मीडिया पर छिड़ी यह बहस अब सियासी मंचों तक पहुंच चुकी है. आने वाले दिनों में संसद से लेकर चुनावी रैलियों तक, नेहरू-गांधी विरासत और राष्ट्रवाद का यह मुद्दा और तेज़ होने के संकेत दे रहा है. देश की राजनीति में इतिहास का यह अध्याय एक बार फिर वर्तमान की लड़ाई का हथियार बनता दिख रहा है.

First published on: Feb 26, 2026 11:29 PM

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