---विज्ञापन---

मुंबई

बालगंगा डैम घोटाला केस: ट्रायल शुरू होते ही बदले गए जज, फैसले के पीछे क्या वजह?

बालगंगा डैम सिंचाई घोटाले से जुड़े बहुचर्चित आपराधिक मुकदमे में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया, जब ट्रायल शुरू होने के बाद अचानक जज को बदल दिया गया. 92 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले की जांच ACB ने की थी. पहले ट्रांसफर याचिका खारिज होने के बावजूद प्रशासनिक आदेश से केस दूसरे जज को सौंपे जाने पर कानूनी और राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं. जानिए पूरा मामला और इसके पीछे की पूरी कहानी.पढ़िए मुंबई से राहुल पांडे की रिपोर्ट.

Author
Edited By : Bhawna Dubey Updated: Jan 22, 2026 13:10

---विज्ञापन---

Balaganga Dam scam, irrigation scam Maharashtra, Thane court news, judge transfer controversy, ACB investigation, Nisar Khatri case, Balaganga irrigation project, corruption case Maharashtra, latest legal news, political controversy news

बालगंगा डैम सिंचाई घोटाले से जुड़ा बहुचर्चित आपराधिक मुकदमा एक बार फिर सुर्खियों में है. ठाणे की विशेष अदालत में चल रहे इस मामले को अचानक एक न्यायाधीश से दूसरे न्यायाधीश को सौंपे जाने के बाद कानूनी हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. ट्रायल जज को बदले जाने के समय और परिस्थितियों को लेकर कई तरह के सवाल और अटकलें सामने आ रही हैं.

---विज्ञापन---

इस करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो ACB ने की थी. वर्ष 2016 में ACB ने ठेकेदार निसार खत्री और कोंकण सिंचाई विकास महामंडल (KIDC) से जुड़े कई सरकारी अधिकारियों के खिलाफ करीब 30 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. जांच एजेंसी का आरोप है कि परियोजना में अनियमितताओं के चलते राज्य के खजाने को 92 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ.

इतना गंभीर मामला होने के बावजूद, वर्षों तक अदालत में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी. ठाणे की विशेष अदालत में लंबे समय तक आरोप तक तय नहीं हो पाए. आखिरकार वर्ष 2025 में विशेष न्यायाधीश जी. टी. पवार ने सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए और ट्रायल की औपचारिक शुरुआत की. इससे यह उम्मीद जगी कि वर्षों से लटका मामला अब गति पकड़ेगा.

---विज्ञापन---

हालांकि, दिसंबर 2025 में आरोपी निसार खत्री ने प्रधान जिला न्यायाधीश, ठाणे के समक्ष आवेदन देकर न्यायाधीश जी. टी. पवार से केस ट्रांसफर करने की मांग की. इस याचिका को प्रधान जिला न्यायाधीश एस. बी. अग्रवाल ने सख्त रुख अपनाते हुए खारिज कर दिया. अदालत ने याचिका को निराधार बताते हुए निसार खत्री पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया.

इसके बावजूद, अब एक प्रशासनिक आदेश के जरिए यह मामला न्यायाधीश जी. टी. पवार से हटाकर न्यायाधीश दुर्गाप्रसाद देशपांडे को सौंप दिया गया है. यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब हाल ही में न्यायिक स्तर पर ट्रांसफर की मांग को खारिज किया जा चुका था. इसी वजह से इस बदलाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें;नाशिक हाईवे पर पंजाबी खालसा ढाबे में हंगामा, महंगे खाने का विरोध करने पर युवक से मारपीट

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायपालिका में प्रशासनिक तबादले सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, लेकिन ट्रांसफर याचिका खारिज होने और जुर्माना लगाए जाने की पृष्ठभूमि में इस तरह का बदलाव असामान्य नजर आता है. इससे मामले के ट्रायल को लेकर संदेह और चर्चाएं और तेज हो गई हैं.

---विज्ञापन---

विवाद को और बल इस तथ्य से मिल रहा है कि अक्टूबर 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बालगंगा डैम परियोजना से जुड़े एक मामले में निसार खत्री को 303 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया था. राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी, जिसे लेकर भी कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

यह भी पढ़ें;‘लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई…’, BMC हाथ से जाने के बाद बोले उद्धव ठाकरे; तो राज ठाकरे ने कहा – जल्द मिलते हैं

---विज्ञापन---

बालगंगा सिंचाई घोटाले का राजनीतिक असर भी कम नहीं रहा है. एक समय यह घोटाला तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था. तब विपक्ष के नेता रहे देवेंद्र फडणवीस, जो वर्तमान में मुख्यमंत्री हैं, ने इसे भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला था. करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले का ट्रायल अब भी ठाणे की अदालत में लंबित है. ऐसे में, मामले को एक जज से दूसरे जज को सौंपे जाने की घटना ने न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

First published on: Jan 22, 2026 01:10 PM

End of Article
संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.