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अजित पवार की NCP का ‘संकटमोचन’ कौन? फैमिली से नहीं… तो इन चार नेताओं पर टिकी सबकी नजरें

अजित पवार गुट के पास इस समय 41 विधायक हैं और पार्टी के सामने स्पष्ट उत्तराधिकारी न होने की स्थिति में किसी ऐसे चेहरे की जरूरत महसूस की जा रही है जो 'अनुभव, स्वीकार्यता और संगठन' तीनों स्तरों पर संतुलन साध सके.

Author Written By: Akarsh Shukla Updated: Jan 29, 2026 00:13

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख अजित पवार की विमान दुर्घटना में हुई दर्दनाक मौत ने न सिर्फ राज्य की सियासत में बड़ा खालीपन छोड़ दिया है. अजित पवार के निधन ने उनकी एनसीपी पार्टी को भी गहरे असमंजस की स्थिति में खड़ा कर दिया है. सत्ता में भागीदारी, महायुति गठबंधन की मजबूती और 2029 की तैयारियों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अजित पवार की राजनीतिक विरासत कौन संभालेगा? राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि पार्टी का भविष्य या तो शरद पवार गुट वाली NCP के साथ विलय की ओर जाएगा या फिर मौजूदा महायुति ढांचे के भीतर रहते हुए नए चेहरे के नेतृत्व में आगे बढ़ने की कोशिश होगी.

क्या पत्नी या बेटा संभालेंगे जिम्मेदारी?


ऐसा भी कहा जा रहा है कि अजित पवार की एनसीपी की कमाई उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार या उनके बेटे पार्थ पवार संभाल सकते हैं. हालांकि परिवार के अलावा भी 4 ऐसे चेहरे हैं, जिन्हें अजित पवार के गुट वाली एनसीपी का भावी उम्मीदवार माना जा रहा है. फिलहाल पार्टी के सामने इस समय दो रास्ते साफ दिख रहे हैं. पहला सहानुभूति और परिवार आधारित नेतृत्व का मॉडल का रास्ता और दूसरा अनुभवी और संगठनात्मक रूप से मजबूत गैर–परिवार नेतृत्व को सामने लाने का रास्ता.

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अजित के गुट में कितने विधायक?


अजित पवार गुट के पास इस समय 41 विधायक हैं और पार्टी के सामने स्पष्ट उत्तराधिकारी न होने की स्थिति में किसी ऐसे चेहरे की जरूरत महसूस की जा रही है जो ‘अनुभव, स्वीकार्यता और संगठन’ तीनों स्तरों पर संतुलन साध सके. इसी रेफ्रेंस में चार नेताओं के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, जिन्हें NCP का संभावित ‘संकटमोचक’ माना जा रहा है.

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  1. प्रफुल्ल पटेल
    प्रफुल्ल पटेल NCP के सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं. पार्टी विभाजन के समय उन्होंने खुलकर अजित पवार के साथ खड़े होकर यह संकेत दिया था कि वे नए गुट की राजनीतिक दिशा और वैधता दोनों के लिए अहम हैं. केंद्र और राज्य की राजनीति का लंबा अनुभव, पूर्व केंद्रीय मंत्री की हैसियत और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान उन्हें एक स्वाभाविक दावेदार बनाती है. 1957 में जन्मे पटेल नागरिक उड्डयन और भारी उद्योग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभाल चुके हैं, जहां उनकी प्रशासनिक क्षमता बार–बार परखी जा चुकी है.
  2. छगन भुजबल
    छगन भुजबल की सबसे बड़ी ताकत उनका ओबीसी (माली) समुदाय पर मजबूत प्रभाव और करीब 40 साल का राजनीतिक सफर है. शिवसेना से शुरुआत, मुंबई के मेयर, फिर एनसीपी के वरिष्ठ नेता—इस यात्रा ने उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति का अनुभवी खिलाड़ी बना दिया है. वे दो बार उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और मौजूदा सरकार में मंत्री रहते हुए सत्ता संचालन का व्यावहारिक अनुभव रखते हैं. भुजबल को मराठी राजनीति में पिछड़े वर्ग की मुखर आवाज माना जाता है.
  3. धनंजय मुंडे
    मराठवाड़ा और बीड क्षेत्र में धनंजय मुंडे की पकड़ लंबे समय से मजबूत रही है. दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे के भतीजे होने के नाते वे सत्ता और विपक्ष—दोनों खेमों की कार्यशैली को करीब से समझते हैं. महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता, सामाजिक न्याय मंत्री और बीड जिले के पालक मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल उन्हें प्रशासनिक और संगठनात्मक दोनों मोर्चों पर भरोसेमंद बनाता है. महायुति के भीतर भाजपा नेतृत्व से उनकी नजदीकी और समन्वय क्षमता उन्हें ‘पावर ब्रिज’ की भूमिका में स्थापित करती है.
  4. सुनील तटकरे
    सुनील तटकरे इस समय NCP के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष हैं और लोकसभा में पार्टी के एकमात्र सांसद होने की वजह से संसदीय राजनीति में भी उनकी अहम भूमिका है. वे सार्वजनिक विमर्श में भले ही अन्य नेताओं की तुलना में कम सुर्खियां बटोरते हों, लेकिन संगठनात्मक ढांचे में उनकी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है. कोकण क्षेत्र में उनकी जड़ें गहरी हैं और वे विधान परिषद से लेकर विधानसभा और लोकसभा तीनों स्तरों की राजनीति समझते हैं.

First published on: Jan 28, 2026 11:40 PM

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