मेघालय में होमस्टे में तोड़फोड़ के मामले में उत्तर प्रदेश के छह छात्रों को बड़ी राहत मिली है. छात्रों की ओर से नुकसान की भरपाई के लिए 2.06 लाख रुपये देने और दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बाद मेघालय हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी है.

मामला शिलांग के लैतमुखराह इलाके का है. यहां 11 जुलाई को एक होमस्टे में तोड़फोड़ की शिकायत के बाद पुलिस ने छह छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. आरोप था कि होमस्टे में तय संख्या से ज्यादा लोगों को एक कमरे में ठहरने की अनुमति नहीं मिलने पर छात्रों ने शिकायतकर्ता को धमकी दी और बाद में वहां तोड़फोड़ की.

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पश्चिम बंगाल से पकड़े गए थे छात्र

घटना के दो दिन बाद, 13 जुलाई को सभी छह छात्रों को पश्चिम बंगाल से पकड़ा गया था. बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया. आरोपियों में तीन नाबालिग हैं, जबकि एक छात्र हाल ही में 18 साल का हुआ है. बाकी दो छात्र 20 साल से अधिक उम्र के हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं.

मामले को खत्म करने के लिए छात्रों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. अदालत को बताया गया कि छात्रों के वरिष्ठों और शुभचिंतकों की पहल के बाद 17 अगस्त को दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया. इसके तहत छात्रों ने होमस्टे मालिक को हुए नुकसान के बदले 2.06 लाख रुपये दिए और अपने व्यवहार के लिए माफी भी मांगी.

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दो छात्रों को और देने होंगे 25-25 हजार रुपये

मामले की सुनवाई के दौरान होमस्टे के मालिक और मैनेजर ने भी FIR रद्द करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई. इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने छात्रों के भविष्य और दोनों पक्षों के समझौते को ध्यान में रखते हुए FIR रद्द करने का आदेश दिया.

हालांकि, अदालत ने दो छात्रों को एक सप्ताह के भीतर 25-25 हजार रुपये अतिरिक्त होमस्टे मालिक को देने का निर्देश दिया है. इन दोनों को छह दिन समाज सेवा भी करनी होगी.

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समाज सेवा के तहत छात्र 8 सितंबर से शिलांग के लाचुमिएरे स्थित सिख सेंटर श्री गुरु सिंह सभा में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सेवा करेंगे. इसके बाद वे जीवा केयर्स के ‘प्रोजेक्ट ऑपरेशन क्लीन-अप’ से जुड़कर सफाई और शहर की स्वच्छता से जुड़े कामों में हिस्सा लेंगे. इस प्रोजेक्ट में फूलों और कूड़ेदानों की देखभाल के साथ उमखराह नदी से जुड़े सफाई कार्य भी किए जाते हैं. अदालत ने माना कि समझौता हो चुका है और छात्रों के भविष्य को देखते हुए इस मामले को आगे चलाना जरूरी नहीं है.

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