महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में मेयर पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा, इसका फैसला आज लॉटरी सिस्टम से किया जाएगा. ये प्रक्रिया राज्य के शहरी विकास विभाग की ओर से कराई जा रही है, जो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास है. इस लॉटरी में ये तय होगा कि राज्य के अलग-अलग नगर निगमों, खासकर मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मेयर पद सामान्य, महिला, ओबीसी, एससी या एसटी वर्ग में से किसके लिए आरक्षित रहेगा.
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लॉटरी सिस्टम क्यों?
महाराष्ट्र में मेयर पद का आरक्षण रोटेशन सिस्टम से होता है. यानी हर बार अलग-अलग वर्गों को मौका दिया जाता है. ताकि सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व मिल सके. इसी वजह से इस बार भी बिना किसी विवाद के फैसला करने के लिए लॉटरी निकाली जा रही है. लॉटरी में ये तय होगा कि किस नगर निगम में मेयर पद किस वर्ग के लिए होगा. उसी वर्ग के पार्षद मेयर पद के लिए चुनाव लड़ सकेंगे. पिछली बार जिस वर्ग को मौका मिला था, उसे इस बार बाहर रखा जाएगा. लॉटरी के बाद सरकार की ओर से अधिसूचना जारी की जाएगी. मेयर पद के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी. इसके बाद नगर निगम की विशेष बैठक में मेयर का चुनाव होगा
मुंबई में क्यों अहम है ये फैसला?
मुंबई महानगरपालिका में किसी भी पार्टी को साफ बहुमत नहीं मिला है. ऐसे में मेयर का चुनाव काफी अहम माना जा रहा है. लॉटरी से तय होने वाला आरक्षण ये भी बताएगा कि किस पार्टी की दावेदारी मजबूत होगी और किसे रणनीति बदलनी पड़ेगी. मुंबई को आखिरकार चार साल बाद मेयर मिलने जा रहा है. आखिरी बार किशोरी पेडनेकर ने मुंबई के मेयर पद की कुर्सी संभाली थी, वो इस बार भी विजयी रही हैं. लेकिन उद्धव की सेना को बहुमत का नंबर नहीं मिल सका है. जिसकी वजह से उनका मेयर बनना उतना आसान नहीं होगा.
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महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में मेयर पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा, इसका फैसला आज लॉटरी सिस्टम से किया जाएगा. ये प्रक्रिया राज्य के शहरी विकास विभाग की ओर से कराई जा रही है, जो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास है. इस लॉटरी में ये तय होगा कि राज्य के अलग-अलग नगर निगमों, खासकर मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मेयर पद सामान्य, महिला, ओबीसी, एससी या एसटी वर्ग में से किसके लिए आरक्षित रहेगा.
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लॉटरी सिस्टम क्यों?
महाराष्ट्र में मेयर पद का आरक्षण रोटेशन सिस्टम से होता है. यानी हर बार अलग-अलग वर्गों को मौका दिया जाता है. ताकि सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व मिल सके. इसी वजह से इस बार भी बिना किसी विवाद के फैसला करने के लिए लॉटरी निकाली जा रही है. लॉटरी में ये तय होगा कि किस नगर निगम में मेयर पद किस वर्ग के लिए होगा. उसी वर्ग के पार्षद मेयर पद के लिए चुनाव लड़ सकेंगे. पिछली बार जिस वर्ग को मौका मिला था, उसे इस बार बाहर रखा जाएगा. लॉटरी के बाद सरकार की ओर से अधिसूचना जारी की जाएगी. मेयर पद के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी. इसके बाद नगर निगम की विशेष बैठक में मेयर का चुनाव होगा
मुंबई में क्यों अहम है ये फैसला?
मुंबई महानगरपालिका में किसी भी पार्टी को साफ बहुमत नहीं मिला है. ऐसे में मेयर का चुनाव काफी अहम माना जा रहा है. लॉटरी से तय होने वाला आरक्षण ये भी बताएगा कि किस पार्टी की दावेदारी मजबूत होगी और किसे रणनीति बदलनी पड़ेगी. मुंबई को आखिरकार चार साल बाद मेयर मिलने जा रहा है. आखिरी बार किशोरी पेडनेकर ने मुंबई के मेयर पद की कुर्सी संभाली थी, वो इस बार भी विजयी रही हैं. लेकिन उद्धव की सेना को बहुमत का नंबर नहीं मिल सका है. जिसकी वजह से उनका मेयर बनना उतना आसान नहीं होगा.
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