मध्य प्रदेश की राजनीति में हाल के दिनों में नेताओं के विवादित बयानों ने हंगामा मचा दिया है. महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियों से लेकर संतों और धर्माचार्यों पर व्यक्तिगत हमलों तक के बयानों ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है. कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया और पूर्व विधायक व सपा उम्मीदवार आरडी प्रजाजपति के बयानों ने न केवल राजनीतिक मर्यादाओं को चुनौती दी है, बल्कि सामाजिक संवेदनशील मुद्दों पर भी बहस छेड़ दी है.
कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने ग्रंथों का हवाला देते हुए एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के संदर्भ में विवादास्पद टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने सहवास पर तीर्थ मिलने का उल्लेख किया. बाद में सफाई देते हुए उन्होंने इसे एक पुस्तक से लिया गया अंश बताया. उधर, भोपाल के एक कार्यक्रम में आरडी प्रजापति ने कथावाचकों पर अपशब्दों की बौछार कर दी. उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को 'अंधाचार्य' कहते हुए उनकी मां पर अशोभनीय टिप्पणी की और कहा कि कथावाचकों को जूतों की माला पहनाकर नंगा घुमाया जाना चाहिए. प्रजापति ने बहन-बेटियों को 'प्लॉट' और युवतियों के कथाओं में जाने पर भी कटाक्ष किया.
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सत्ता पक्ष से मंत्री विश्वास सारंग ने तीखा पलटवार किया. उन्होंने विपक्ष पर महिलाओं का अपमान करने और सनातन धर्म के खिलाफ बोलने का आरोप लगाया. सारंग ने कहा कि बरैया का बलात्कार जस्टिफाई करने वाला बयान और प्रजापति की संतों पर अभद्र टिप्पणियां विकृत मानसिकता को दर्शाती हैं. उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाए, साथ ही सपा नेतृत्व पर कार्रवाई न करने का तंज कसा.
कांग्रेस ने फूल सिंह बरैया का बचाव किया. पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने कहा कि विधायक ने पटना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर की पुस्तक का हवाला दिया था, इसलिए कार्रवाई लेखक और राजकमल प्रकाशन पर होनी चाहिए. प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बलात्कार को अपराध बताते हुए कड़ी सजा की मांग की और कहा कि कांग्रेस सभ्यता-संस्कार के पक्ष में है. आरडी प्रजापति के बयान पर सपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने इसे व्यक्तिगत बयान करार दिया और कहा कि पार्टी महिलाओं व संतों के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगी.
मध्य प्रदेश की राजनीति में हाल के दिनों में नेताओं के विवादित बयानों ने हंगामा मचा दिया है. महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियों से लेकर संतों और धर्माचार्यों पर व्यक्तिगत हमलों तक के बयानों ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है. कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया और पूर्व विधायक व सपा उम्मीदवार आरडी प्रजाजपति के बयानों ने न केवल राजनीतिक मर्यादाओं को चुनौती दी है, बल्कि सामाजिक संवेदनशील मुद्दों पर भी बहस छेड़ दी है.
कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने ग्रंथों का हवाला देते हुए एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के संदर्भ में विवादास्पद टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने सहवास पर तीर्थ मिलने का उल्लेख किया. बाद में सफाई देते हुए उन्होंने इसे एक पुस्तक से लिया गया अंश बताया. उधर, भोपाल के एक कार्यक्रम में आरडी प्रजापति ने कथावाचकों पर अपशब्दों की बौछार कर दी. उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को ‘अंधाचार्य’ कहते हुए उनकी मां पर अशोभनीय टिप्पणी की और कहा कि कथावाचकों को जूतों की माला पहनाकर नंगा घुमाया जाना चाहिए. प्रजापति ने बहन-बेटियों को ‘प्लॉट’ और युवतियों के कथाओं में जाने पर भी कटाक्ष किया.
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सत्ता पक्ष से मंत्री विश्वास सारंग ने तीखा पलटवार किया. उन्होंने विपक्ष पर महिलाओं का अपमान करने और सनातन धर्म के खिलाफ बोलने का आरोप लगाया. सारंग ने कहा कि बरैया का बलात्कार जस्टिफाई करने वाला बयान और प्रजापति की संतों पर अभद्र टिप्पणियां विकृत मानसिकता को दर्शाती हैं. उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाए, साथ ही सपा नेतृत्व पर कार्रवाई न करने का तंज कसा.
कांग्रेस ने फूल सिंह बरैया का बचाव किया. पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने कहा कि विधायक ने पटना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर की पुस्तक का हवाला दिया था, इसलिए कार्रवाई लेखक और राजकमल प्रकाशन पर होनी चाहिए. प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बलात्कार को अपराध बताते हुए कड़ी सजा की मांग की और कहा कि कांग्रेस सभ्यता-संस्कार के पक्ष में है. आरडी प्रजापति के बयान पर सपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने इसे व्यक्तिगत बयान करार दिया और कहा कि पार्टी महिलाओं व संतों के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगी.