हरियाणा सरकार का बड़ा एक्शन! अब आवासीय इमारतों में हर फ्लोर पर केवल एक ही फ्लैट की मिलेगी मंजूरी, नियमों में भारी सख्ती
Haryana Building Rules: हरियाणा में अब सभी लाइसेंसी आवासीय कॉलोनियों में प्रति फ्लोर केवल एक ही फ्लैट की रजिस्ट्री हो सकेगी, जिससे शहरों में आबादी के बढ़ते दबाव को नियंत्रित किया जा सकेगा.
हरियाणा में अब सभी लाइसेंसी आवासीय कॉलोनियों में प्रति फ्लोर केवल एक ही फ्लैट की रजिस्ट्री की जा सकेगी.
डीटीसीपी ने तहसीलदारों को बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) जांचे सेल डीड निष्पादित न करने का कड़ा आदेश दिया है.
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बुनियादी ढांचे की कमी के कारण स्टिल्ट प्लस 4 निर्माण पर अंतरिम रोक लगाई है.
एक्सपर्ट पैनल के अनुसार स्टिल्ट प्लस 4 इमारतों की ऊंचाई 15 मीटर और अधिकतम आबादी 18 लोगों तक सीमित होनी चाहिए.
नए प्रोजेक्ट्स में कमी आने के कारण मध्यम वर्गीय बजट फ्लैट्स की कीमतों में 5 से 10 लाख रुपये तक की बढ़ोतरी संभव है.
Haryana Flat Rules: हरियाणा सरकार ने राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर एक बेहद सख्त और बड़ा फैसला लिया है. नए नियमों के अनुसार हरियाणा की सभी लाइसेंसी आवासीय सोसाइटियों और कॉलोनियों में अब प्रति फ्लोर केवल एक ही फ्लैट (आवासीय इकाई) पंजीकृत या रजिस्टर्ड किया जा सकेगा. डिपार्टमेंट ऑफ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (डीटीसीपी) ने इस आदेश को सख्ती से लागू करने के लिए तहसीलदारों और जिला योजनाकारों को कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं. इस कदम का मुख्य उद्देश्य शहरों में बेकाबू होती आबादी की डेंसिटी को रोकना और सड़कों, सीवर तथा पानी की लाइनों जैसे बुनियादी ढांचे पर पड़ रहे अत्यधिक दबाव को कम करना है.
हरियाणा सरकार को क्यों लागू करना पड़ा?
शहरी इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के चरमराने के कारण सरकार को यह सख्त कदम उठाना पड़ा है. गुरुग्राम के डीएलएफ फेज 1 और सेक्टर 28 जैसे प्रमुख इलाकों में निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि एक ही फ्लोर पर कई फ्लैट्स बना देने से आंतरिक सड़कें संकरी हो गईं, सीवर चोक हो गए और पार्किंग को लेकर रोजाना विवाद होने लगे. इसके साथ ही पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने भी बुनियादी ढांचे के ऑडिट की बात कहते हुए स्टिल्ट प्लस 4 (S+4) मंजिला निर्माण की अनुमति देने वाले नोटिफिकेशन पर पूरी तरह रोक लगा दी है, जिससे सरकार पर नियमों को कड़ा करने का भारी दबाव था.
क्या-क्या चीजें बदल जाएंगी?
इस नए नियम के आने के बाद अब डेवलपर्स एक मंजिल पर दो या तीन फ्लैट्स का निर्माण नहीं कर सकेंगे, जिससे उन्हें अपने पूरे प्रोजेक्ट्स का नक्शा दोबारा डिजाइन करना होगा. उदाहरण के लिए जिस स्टिल्ट प्लस 4 प्रोजेक्ट में पहले 8 फ्लैट्स बनाने की योजना थी, वहां अब केवल 4 फ्लैट्स ही बन पाएंगे. इसके अलावा तहसीलदारों को आदेश दिया गया है कि वे बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) के किसी भी फ्लैट की रजिस्ट्री न करें. प्रति फ्लोर केवल एक रजिस्ट्री होने के कारण बिल्डर्स की जमीन लागत बढ़ जाएगी, जिससे वे कम खरीदारों से ही पूरा पैसा वसूलेंगे और फ्लैट्स की कीमतें काफी ऊपर चली जाएंगी.
प्रॉपर्टी के दामों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
शॉर्ट टर्म में इस फैसले से बाजार में नए घरों की सप्लाई पर बहुत बुरा असर पड़ेगा क्योंकि सैकड़ों फाइलें अभी मंजूरी के लिए अटकी हुई हैं. जिन बिल्डर्स ने एक फ्लोर पर दो फ्लैट्स के हिसाब से बुकिंग ले ली थी, उन्हें अब पैसे वापस करने होंगे या नक्शा बदलना होगा, जिससे पजेशन में देरी होगी. जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार डीएलएफ फेज 1 में औसत रेट 14,200 रुपये प्रति वर्ग फीट और सोहना में 6,400 रुपये प्रति वर्ग फीट दर्ज किया गया है. आने वाले समय में डेंसिटी कम होने से प्रीमियम खरीदारों के लिए कॉलोनियां रहने लायक बनेंगी, लेकिन बजट घर महंगे हो जाएंगे.
हरियाणा की नई आवास नीति में पार्किंग की समस्या को हल करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा गया है. अब सभी किफायती आवास परियोजनाओं (अफोर्डेबल हाउसिंग) के लिए प्रति फ्लैट कम से कम एक कार पार्किंग स्पेस देना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है. इस पार्किंग स्पेस की कीमत फ्लैट के कुल मूल्य का अधिकतम 10 प्रतिशत तक निर्धारित की जा सकती है. गुरुग्राम में अफोर्डेबल हाउसिंग की दरें पहले ही संशोधित कर 5,575 रुपये प्रति वर्ग फीट की जा चुकी हैं, जिसमें बालकनी के लिए 1,300 रुपये प्रति वर्ग फीट का अतिरिक्त चार्ज शामिल है.
खरीदारों को किन महत्वपूर्ण बातों की जांच कर लेनी चाहिए?
यदि आप गुरुग्राम, सोहना या फरीदाबाद में कोई स्वतंत्र फ्लोर या फ्लैट खरीदने का मन बना रहे हैं, तो आपको बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है. सबसे पहले बिल्डर से स्वीकृत नक्शा (सेंक्शंड प्लान) और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) की मांग करें. यदि नक्शे में एक फ्लोर पर दो यूनिट दिखाई दे रही हैं, तो उसे बुक न करें क्योंकि सरकारी स्तर पर उसकी रजिस्ट्री को पूरी तरह खारिज कर दिया जाएगा. इसके साथ ही अपने फ्लैट के साथ अलॉट होने वाले कार पार्किंग स्पेस की लिखित पुष्टि जरूर लें और रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टीज के लिए एचएसवीपी सेक्टर्स को प्राथमिकता दें.
हरियाणा रियल एस्टेट कॉरिडोर और प्रॉपर्टी रेट्स 2026:
प्रमुख क्षेत्र / लोकेशन
औसत प्रॉपर्टी रेट (जून 2026)
सालाना ट्रेंड (YoY)
वन-फ्लैट-पर-फ्लोर नियम का मुख्य प्रभाव
डीएलएफ फेज 1 (गुरुग्राम)
14,200 रुपये प्रति वर्ग फीट
+5.1 प्रतिशत
नए प्रोजेक्ट्स पर रोक से रीसेल मार्केट में उछाल
सोहना प्रॉपर्टीज
6,400 रुपये प्रति वर्ग फीट
+3.8 प्रतिशत
अफोर्डेबल प्रोजेक्ट्स में पार्किंग चार्ज से दाम बढ़े
सेक्टर 28 (गुरुग्राम)
12,900 रुपये प्रति वर्ग फीट
+4.2 प्रतिशत
कोर्ट द्वारा बुनियादी ढांचे के दबाव का मुख्य हवाला
फरीदाबाद फ्लैट्स
5,450 रुपये प्रति वर्ग फीट
+2.9 प्रतिशत
सरकारी स्तर पर नई दरों के अनुसार संशोधन लागू
निष्कर्ष:
हरियाणा सरकार का वन-फ्लैट-पर-फ्लोर नियम और निर्माण पर कड़े प्रतिबंध शहरी बुनियादी ढांचे को ढहने से बचाने के लिए एक आवश्यक कदम हैं. हालांकि इस फैसले से प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी होगी और घरों की सप्लाई कुछ समय के लिए थमेगी, लेकिन भविष्य के लिहाज से यह गुरुग्राम और आस-पास के क्षेत्रों को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और रहने योग्य बनाएगा.
मुख्य जानकारी:
हरियाणा में अब सभी लाइसेंसी आवासीय कॉलोनियों में प्रति फ्लोर केवल एक ही फ्लैट की रजिस्ट्री की जा सकेगी.
डीटीसीपी ने तहसीलदारों को बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) जांचे सेल डीड निष्पादित न करने का कड़ा आदेश दिया है.
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बुनियादी ढांचे की कमी के कारण स्टिल्ट प्लस 4 निर्माण पर अंतरिम रोक लगाई है.
एक्सपर्ट पैनल के अनुसार स्टिल्ट प्लस 4 इमारतों की ऊंचाई 15 मीटर और अधिकतम आबादी 18 लोगों तक सीमित होनी चाहिए.
नए प्रोजेक्ट्स में कमी आने के कारण मध्यम वर्गीय बजट फ्लैट्स की कीमतों में 5 से 10 लाख रुपये तक की बढ़ोतरी संभव है.
Haryana Flat Rules: हरियाणा सरकार ने राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर एक बेहद सख्त और बड़ा फैसला लिया है. नए नियमों के अनुसार हरियाणा की सभी लाइसेंसी आवासीय सोसाइटियों और कॉलोनियों में अब प्रति फ्लोर केवल एक ही फ्लैट (आवासीय इकाई) पंजीकृत या रजिस्टर्ड किया जा सकेगा. डिपार्टमेंट ऑफ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (डीटीसीपी) ने इस आदेश को सख्ती से लागू करने के लिए तहसीलदारों और जिला योजनाकारों को कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं. इस कदम का मुख्य उद्देश्य शहरों में बेकाबू होती आबादी की डेंसिटी को रोकना और सड़कों, सीवर तथा पानी की लाइनों जैसे बुनियादी ढांचे पर पड़ रहे अत्यधिक दबाव को कम करना है.
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हरियाणा सरकार को क्यों लागू करना पड़ा?
शहरी इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के चरमराने के कारण सरकार को यह सख्त कदम उठाना पड़ा है. गुरुग्राम के डीएलएफ फेज 1 और सेक्टर 28 जैसे प्रमुख इलाकों में निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि एक ही फ्लोर पर कई फ्लैट्स बना देने से आंतरिक सड़कें संकरी हो गईं, सीवर चोक हो गए और पार्किंग को लेकर रोजाना विवाद होने लगे. इसके साथ ही पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने भी बुनियादी ढांचे के ऑडिट की बात कहते हुए स्टिल्ट प्लस 4 (S+4) मंजिला निर्माण की अनुमति देने वाले नोटिफिकेशन पर पूरी तरह रोक लगा दी है, जिससे सरकार पर नियमों को कड़ा करने का भारी दबाव था.
क्या-क्या चीजें बदल जाएंगी?
इस नए नियम के आने के बाद अब डेवलपर्स एक मंजिल पर दो या तीन फ्लैट्स का निर्माण नहीं कर सकेंगे, जिससे उन्हें अपने पूरे प्रोजेक्ट्स का नक्शा दोबारा डिजाइन करना होगा. उदाहरण के लिए जिस स्टिल्ट प्लस 4 प्रोजेक्ट में पहले 8 फ्लैट्स बनाने की योजना थी, वहां अब केवल 4 फ्लैट्स ही बन पाएंगे. इसके अलावा तहसीलदारों को आदेश दिया गया है कि वे बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) के किसी भी फ्लैट की रजिस्ट्री न करें. प्रति फ्लोर केवल एक रजिस्ट्री होने के कारण बिल्डर्स की जमीन लागत बढ़ जाएगी, जिससे वे कम खरीदारों से ही पूरा पैसा वसूलेंगे और फ्लैट्स की कीमतें काफी ऊपर चली जाएंगी.
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प्रॉपर्टी के दामों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
शॉर्ट टर्म में इस फैसले से बाजार में नए घरों की सप्लाई पर बहुत बुरा असर पड़ेगा क्योंकि सैकड़ों फाइलें अभी मंजूरी के लिए अटकी हुई हैं. जिन बिल्डर्स ने एक फ्लोर पर दो फ्लैट्स के हिसाब से बुकिंग ले ली थी, उन्हें अब पैसे वापस करने होंगे या नक्शा बदलना होगा, जिससे पजेशन में देरी होगी. जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार डीएलएफ फेज 1 में औसत रेट 14,200 रुपये प्रति वर्ग फीट और सोहना में 6,400 रुपये प्रति वर्ग फीट दर्ज किया गया है. आने वाले समय में डेंसिटी कम होने से प्रीमियम खरीदारों के लिए कॉलोनियां रहने लायक बनेंगी, लेकिन बजट घर महंगे हो जाएंगे.
हरियाणा की नई आवास नीति में पार्किंग की समस्या को हल करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा गया है. अब सभी किफायती आवास परियोजनाओं (अफोर्डेबल हाउसिंग) के लिए प्रति फ्लैट कम से कम एक कार पार्किंग स्पेस देना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है. इस पार्किंग स्पेस की कीमत फ्लैट के कुल मूल्य का अधिकतम 10 प्रतिशत तक निर्धारित की जा सकती है. गुरुग्राम में अफोर्डेबल हाउसिंग की दरें पहले ही संशोधित कर 5,575 रुपये प्रति वर्ग फीट की जा चुकी हैं, जिसमें बालकनी के लिए 1,300 रुपये प्रति वर्ग फीट का अतिरिक्त चार्ज शामिल है.
खरीदारों को किन महत्वपूर्ण बातों की जांच कर लेनी चाहिए?
यदि आप गुरुग्राम, सोहना या फरीदाबाद में कोई स्वतंत्र फ्लोर या फ्लैट खरीदने का मन बना रहे हैं, तो आपको बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है. सबसे पहले बिल्डर से स्वीकृत नक्शा (सेंक्शंड प्लान) और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) की मांग करें. यदि नक्शे में एक फ्लोर पर दो यूनिट दिखाई दे रही हैं, तो उसे बुक न करें क्योंकि सरकारी स्तर पर उसकी रजिस्ट्री को पूरी तरह खारिज कर दिया जाएगा. इसके साथ ही अपने फ्लैट के साथ अलॉट होने वाले कार पार्किंग स्पेस की लिखित पुष्टि जरूर लें और रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टीज के लिए एचएसवीपी सेक्टर्स को प्राथमिकता दें.
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हरियाणा रियल एस्टेट कॉरिडोर और प्रॉपर्टी रेट्स 2026:
प्रमुख क्षेत्र / लोकेशन
औसत प्रॉपर्टी रेट (जून 2026)
सालाना ट्रेंड (YoY)
वन-फ्लैट-पर-फ्लोर नियम का मुख्य प्रभाव
डीएलएफ फेज 1 (गुरुग्राम)
14,200 रुपये प्रति वर्ग फीट
+5.1 प्रतिशत
नए प्रोजेक्ट्स पर रोक से रीसेल मार्केट में उछाल
सोहना प्रॉपर्टीज
6,400 रुपये प्रति वर्ग फीट
+3.8 प्रतिशत
अफोर्डेबल प्रोजेक्ट्स में पार्किंग चार्ज से दाम बढ़े
सेक्टर 28 (गुरुग्राम)
12,900 रुपये प्रति वर्ग फीट
+4.2 प्रतिशत
कोर्ट द्वारा बुनियादी ढांचे के दबाव का मुख्य हवाला
फरीदाबाद फ्लैट्स
5,450 रुपये प्रति वर्ग फीट
+2.9 प्रतिशत
सरकारी स्तर पर नई दरों के अनुसार संशोधन लागू
निष्कर्ष:
हरियाणा सरकार का वन-फ्लैट-पर-फ्लोर नियम और निर्माण पर कड़े प्रतिबंध शहरी बुनियादी ढांचे को ढहने से बचाने के लिए एक आवश्यक कदम हैं. हालांकि इस फैसले से प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी होगी और घरों की सप्लाई कुछ समय के लिए थमेगी, लेकिन भविष्य के लिहाज से यह गुरुग्राम और आस-पास के क्षेत्रों को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और रहने योग्य बनाएगा.
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Frequently Asked Questions
Ans: यह नियम हरियाणा विकास और शहरी क्षेत्र विनियम अधिनियम 1975 के तहत आने वाली सभी लाइसेंसी कॉलोनियों और स्वतंत्र आवासीय भूखंडों पर लागू होगा.
Ans: नहीं, नए नियमों के कड़े क्रियान्वयन के बाद अब तहसीलदार एक ही फ्लोर पर दो अलग-अलग रजिस्ट्री या सेल डीड को मंजूरी नहीं देंगे.
Ans: प्रत्येक फ्लैट के लिए एक कार पार्किंग स्पेस देना अनिवार्य है, जिसकी लागत फ्लैट की कुल कीमत के 10 प्रतिशत के बराबर होगी.
Ans: राज्य के विशेषज्ञ पैनल ने आपातकालीन और आग के जोखिम को कम करने के लिए एक पूरी इमारत में अधिकतम 18 लोगों के रहने की सीमा तय की है.
Ans: जिन प्रोजेक्ट्स को अभी तक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) जारी नहीं हुआ है, उन सभी को इन नए नियमों और कोर्ट के निर्देशों का पालन करना होगा.