Shailendra Pandey
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नई दिल्ली: राज्यसभा में मंगलवार को विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के एक बयान के बाद सत्ता पक्ष में विरोध शुरू हो गया। कांग्रेस नेता खड़गे का यह बयान तब आया, जब केंद्र ने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग वाला कानून सदन में पेश किया।
खड़गे ने कहा कि अनुसूचित जाति की महिलाओं की साक्षरता दर कम है और यही वजह है कि राजनीतिक दलों को कमजोर महिलाओं को चुनने की आदत है और वे उन लोगों को नहीं चुनते जो शिक्षित हैं और लड़ सकती हैं। खड़गे ने आगे कहा कि वे हमें श्रेय नहीं देते हैं, लेकिन मैं उनके ध्यान में लाना चाहता हूं कि महिला आरक्षण विधेयक 2010 में पहले ही पारित हो चुका था, किन्तु इसे रोक दिया गया था।
खड़गे के इस बयान के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पलटवार करते हुए कहा कि हम विपक्ष के नेता का सम्मान करते हैं, लेकिन यह व्यापक बयान देना कि सभी पार्टियां ऐसी महिलाओं को चुनती हैं जो प्रभावी नहीं हैं, यह बिल्कुल अस्वीकार्य है हम सभी को हमारी पार्टी, प्रधानमंत्री ने सशक्त बनाया है राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक सशक्त महिला हैं। सीतारमण के बयान पर जवाब देते हुए खड़गे ने कहा, पिछड़े, एसटी की महिलाओं को ऐसे मौके नहीं मिलते जो उन्हें मिल रहे हैं, यही हम कह रहे हैं।
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मोदी सरकार के कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा 128वां संविधान संशोधन ‘नारी शक्ति वंदन विधेयक-2023’ पेश कर दिया। इससे पहले नए संसद भवन की नई लोकसभा में पहले वक्ता के रूप में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज के दिन को अमरत्व प्रदान करने के लिए नए संसद भवन में सदन की पहली कार्यवाही के रूप में सरकार यह बिल लेकर आ रही है और वे आज के दिन दोनों सदनों के सांसदों से इसे सर्वसम्मति से पारित करने की प्रार्थना करते हैं। दोनों सदनों द्वारा पारित किए जाने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा।
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