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‘हमारी अंतरात्मा को लगी चोट’, बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में चल रही बुलडोजर कार्रवाई पर नाराजगी जताई। एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि निर्दयता से घर तोड़ने की कार्रवाई देखकर हमारी अंतरात्मा को चोट लगी है।

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उत्तर प्रदेश में चल रही बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज ने न केवल चिंता जताई है, बल्कि उन्हें दुख भी हुआ है। एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा कि घरों को इतनी निर्दयता से ध्वस्त होता देख हमारी अंतरात्मा को चोट लगी है।

प्रयागराज में एक एडवोकेट, एक प्रोफेसर और तीन अन्य लोगों के घरों को ध्वस्त किया गया था। इस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने आज एक बार फिर चिंता जताई। सुनवाई के दौरान जस्टिस अभय ओका ने कहा, “यह देखकर हमारी अंतरात्मा को चोट लगी है कि कैसे घरों को इतनी निर्दयता से ध्वस्त किया जा रहा है।”

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कोर्ट ने की ये टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि “राज्य सरकार को बहुत ही निष्पक्षता से कार्य करना चाहिए। घरों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई से पहले अपील दायर करने के लिए उचित समय देना चाहिए।” मामले की अगली सुनवाई एक अप्रैल को होने वाली है। बता दें कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि हम राज्य सरकार को पुनर्निर्माण का आदेश देंगे और इसका खर्च भी सरकार ही उठाएगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर न्याय पर हाल के फैसले का उल्लेख किया था, जिसमें विध्वंस से पहले अपनाई जाने वाली प्रक्रिया स्पष्ट की गई है।

पहले भी बेंच ने दी थी चेतावनी

पिछले साल नवंबर में जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने राज्य सरकारों के बुलडोजर एक्शन को असंवैधानिक बताया था। बेंच ने यह भी कहा था कि “घर सबका सपना होता है, यह सालों के संघर्ष और सम्मान की निशानी होता है। सिर्फ आरोपी व्यक्ति की प्रॉपर्टी को गिरा देना पूरी तरह से कानून के खिलाफ है। अगर घर गिराया जाता है, तो अधिकारी को साबित करना होगा कि यही अंतिम उपाय था।” बेंच ने यह भी कहा था कि “अफसर खुद जज नहीं बन सकते।”

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First published on: Mar 24, 2025 05:51 PM

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