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दिल्ली में आदर्श आचार संहिता लागू, जानें किन-किन चीजों पर रहेंगी पाबंदियां

Delhi Assembly Elections 2025 : दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए एक चरण में 5 फरवरी को वोट डाले जाएंगे। चुनाव का शेड्यूल जारी होते ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई। आइए जानते हैं कि कोड ऑफ कंडक्ट के तहत दिल्ली में क्या-क्या पाबंदियां रहेंगी?

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Delhi Assembly Elections 2025 : राजधानी में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) ने मंगलवार को विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया। चुनाव की घोषणा होते ही दिल्ली में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई। चुनाव पूरा होने तक कोड ऑफ कंडक्ट की पाबंदियां रहेंगी। आइए जानते हैं कि किन-किन चीजों पर रहेगी रोक?

किसी भी राज्य में चुनाव की तारीख की घोषणा होते ही आचार संहिता की पाबंदियां लागू हो जाती हैं। दिल्ली में भी आज से मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू हो गया है। चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र हो, इसलिए आदर्श आचार संहिता लगती है। अगर कोई राजनीतिक पार्टी और नेता मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट की पाबंदियों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ चुनाव आयोग एक्शन लेता है।

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नई सरकारी योजनाओं पर रोक

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आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार की ओर से कोई भी नई सरकारी योजनाएं या घोषणाएं नहीं की जा सकती हैं। साथ ही सरकार किसी प्रोजेक्ट का शिलान्यास या उद्घाटन नहीं कर सकती है। चुनाव के दौरान अगर किसी पार्टी, प्रत्याशी और समर्थकों को जुलूस या रैली करनी है तो उन्हें सबसे पहले पुलिस से अनुमति लेनी पड़ती है। आचार संहिता के तहत किसी भी सरकार कर्मचारी का ट्रांसफर नहीं होता है।

जाति-धर्म के नाम पर नहीं मांग सकते हैं वोट

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आचार संहिता के तहत चुनाव आयोग की गाइडलाइन लागू हो जाती है। दिल्ली चुनाव में कोई भी पार्टी या नेता जाति या धर्म के नाम पर वोट नहीं मांगेगा। न ही ऐसा कोई भाषण दे सकता है, जिससे जाति या धर्म के बीच मतभेद पैदा हो। नेता बिना अनुमति किसी वोटर के घर या दीवार पर पार्टी के झंडे या पोस्टर नहीं लगा सकते हैं। पैसे या शराब के जरिए मतदाताओं को रिझाने पर रोक है। चुनाव आयोग की ओर से नेताओं की राजनीतिक रैलियों और सभाओं को मॉनिटर करने के लिए पर्यवेक्षकों या ऑब्जर्वर की नियुक्ति की जाती है।

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वोटिंग के 48 घंटे पहले बंद हो जाते हैं चुनाव प्रचार

वोटिंग के 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार बंद हो जाते हैं। मतदान के दिए चुनाव आयोग की ओर से बूथों पर विशेष व्यवस्था की जाती है, ताकि मतदाताओं को कोई परेशानी न हो। साथ ही यह भी सुनिश्चित होता है कि बूथों के पास राजनीतिक दलों या प्रत्याशियों की भीड़ या शिविर न हो। साथ ही बूथ के आसपास किसी पार्टी के पोस्टर-बैनर मौजूद न हो। वोटिंग के दिन शराब की दुकानें बंद रहती हैं।

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First published on: Jan 07, 2025 08:56 PM

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