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दिल्ली

JNUSU Election Results 2025: कौन हैं के गोपिका बाबू? जो बनीं JNU की नई वाइस प्रेसिडेंट

JNUSU Election Results 2025: दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के स्टूडेंट इलेक्शन में लेफ्ट यूनिटी से वाइस प्रेसिडेंट पद पर के. गोपिका ने चुनाव जीत लिया है. इस पद पर उन्होंने 3101 वोटों से जीत हासिल की. उन्होंने ABVP की तान्या कुमारी को हराया. जानें कौन हैं स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया यानि एसएफआई की के. गोपिका बाबू?

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Written By: News24 हिंदी Updated: Nov 6, 2025 22:47
who is K Gopika Babu

JNUSU Election Results 2025: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव के नतीजों में लेफ्ट संगठनों ने सेंट्रल पैनल के चारों पदों पर कब्जा कर लिया। उपाध्यक्ष के पद पर ABVP की तान्या कुमारी को 3101 वोटों से हराकर चुनाव जीतीं के. गोपिका बाबू के समर्थक जश्न मनाते दिखे। स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया सक्रिय कार्यकर्ता के. गोपिका बाबू सेंटर फॉर स्टडी ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस की Phd स्कॉलर हैं। उन्होंने हमेशा छात्र अधिकारों की वकालत की है। छात्रों की जायज मांगों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों में आवाज बुलंद की। इंसाफ के लिए हमेशा आवाज उठाने वालीं के. गोपिका बाबू को जेएनयूएसयू 2025 के उपाध्यक्ष पद के लिए चुना गया है।

गोपिका बाबू ने 2022 में जेएनयू में एमए में लिया था एडमिशन

एसएफआई की जेएनयू यूनिट की सचिवालय मेंबर किझाकूट गोपिका बाबू 2022 में जेएनयू में एमए समाजशास्त्र में एमए प्रथम वर्ष की छात्रा के रूप में शामिल हुईं और अपने पहले सेमेस्टर से ही छात्र आंदोलन का सक्रिय हिस्सा रही हैं. उन्होंने इससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस में पढ़ाई की थी, गोपिका वहां भी छात्रों की मांगों को लेकर मुखर थीं. 2023-24 में गोपिका का नाम भी उस समय मुख्य तौर पर उभर कर सामने आया जब उन्होंने छात्र संघ चुनावों को फिर से शुरू करने की मांग वाले अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. लगातार एक्टिव रहने के कारण एसएसएस के छात्रों ने उन्हें JNUSU पार्षद पद की जिम्मेदारी सौंपी.

आंदोलन में गोपिका मुख्य तौर पर रहीं शामिल

एमए पूरी करने के बाद दिल्ली में नौकरी करने के साथ-साथ गोपिका ने जेएनयू में पार्षद के रूप में अपना काम जारी रखा. 2023-24 में छात्र संघ चुनावों को दोबारा शुरू करने के लिए जेएनयूएसयू में हुए आंदोलन में गोपिका मुख्य तौर पर शामिल रहीं. इसके लिए वह भूख हड़ताल पर भी बैठीं. छात्रों के मुद्दों को प्रशासन के समक्ष उठाना जारी रखा. एमए में अपने बैच की टॉपर और गोल्ड मैडलिस्ट होने के बावजूद एक बार उन्हें Phd में भी एंट्री नहीं मिली. गोपिका ने हिम्मत नहीं हारी और Phd में एंट्री करके ही मानी. उनकी राजनीति केवल परिसर की सीमाओं तक ही सीमित नहीं है, वह हर आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेती हैं. एक आंदोलन में तो उन्होंने 10 जनवरी, 2024 को संसद तक मार्च भी किया था.

First published on: Nov 06, 2025 08:49 PM

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