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Delhi Building Collapse: 'हादसे के घर' से कम नहीं सत्य निकेतन के PG, छोटे कमरों में हालत बेहद खराब

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए हादसे ने आसपास के इलाकों में दहशत पैदा कर दी है, कई स्टूडेंट्स इस एरिया को छोड़कर दूसरी जगहों पर शिफ्ट हो रही हैं. अगर आप यहां के जमीनी हालात देखेंगे, तो पाएंगे कि कई हॉस्टल और पीजी बिल्डिंग हादसे का इंतजार कर रहे हैं.

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दिल्ली के सत्य निकेतन में हादसे की तस्वीर (Photo-ANI)

Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने इलाके में चलने वाले पीजी और बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हादसे के बाद जब आसपास के इलाकों के हालात सामने आए तो कई पीजी में रहने वाले छात्रों की मुश्किलें भी पता चलीं. संकरी गलियों, एक-दूसरे से सटी ऊंची इमारतों और बेहद छोटे कमरों में बड़ी तादाद में स्टूडेंट्स के रहने से इमरजेंसी सिचुएशन में सेफ्टी को लेकर चिंता बढ़ गई है.

मामले में 3 गिरफ्तार

हादसे में मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें 7 की मौत हो गई. रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने और मलबा हटाए जाने के बाद प्रशासन ने आसपास की इमारतों की जांच शुरू की. हादसे वाली बिल्डिंग से सटी एक इमारत को खाली कराया गया है. मामले में पुलिस ने भवन मालिक हरिराम, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को गिरफ्तार किया है. इससे जुड़ी इमारत को गिराने के निर्देश भी दिए गए हैं.

हादसे के बाद खाली होने लगे PG

घटना के बाद सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में रहने वाले कई छात्र अपने पीजी छोड़कर दूसरी जगह जाने लगे हैं. प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई तेज हुई है. दिल्ली सरकार ने नगर निगम के 5 सीनियर अधिकारियों को निलंबित किया है. हालांकि इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है कि क्या सिर्फ हादसे वाली इमारत पर कार्रवाई काफी है या पूरे इलाके में चल रहे सैकड़ों पीजी और बहुमंजिला मकानों की सुरक्षा जांच भी जरूरी है?

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संकरी गलियों में बनी हैं ऊंची इमारतें

सत्य निकेतन में बड़ी तादाद में छात्र दूसरे शहरों और राज्यों से आकर रहते हैं. इलाके की कई गलियां बेहद संकरी हैं और उनके दोनों ओर बहुमंजिला इमारतें खड़ी हैं. कई पीजी 5 से 6 मंजिल तक ऊंचे हैं. एक मंजिल पर कई कमरे बनाए गए हैं और हर कमरे में 3 से 4 छात्रों के रहने की व्यवस्था की जाती है. कमरे में बेड, कूलर और दूसरे सामान होने के बाद चलने-फिरने की जगह बेहद सीमित रह जाती है. कुछ गलियां इतनी संकरी हैं कि बाहर लगे कूलर और दूसरी चीजों के कारण पैदल निकलना भी मुश्किल नजर आता है. ऐसे में आग, भूकंप या किसी दूसरी इमरजेंसी सिचुएशन में सुरक्षित बाहर निकलना बड़ी चुनौती बन सकता है.

एक बेड का किराया करीब 6 हजार रुपये

पीजी में रहने वाले कुछ स्टूडेंट्स के मुताबिक, एक कमरे में 3 बेड तक रखे जाते हैं और एक बेड के लिए करीब 6000 रुपये महीने का किराया लिया जाता है. इस हिसाब से एक कमरे से तकरीबन 18000 रुपये की आमदनी हो सकती है. अगर एक मंजिल पर 4 कमरे हों तो सिर्फ एक मंजिल से करीब 72,000 रुपये तक किराया हासिल हो सकता है. इसके बावजूद कई कमरों में खुली जगह और जरूरी सुरक्षा इंतजामों की कमी दिखाई देती है.

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13 हजार के कमरे में किचन भी

कुछ स्टूडेंट्स ने बताया कि वे एक छोटे कमरे के लिए तकरीबन 13000 रुपये किराया देती हैं. उसी कमरे में किचन की व्यवस्था भी है. एक मंजिल पर कई कमरे होने और उनके बीच खुली जगह न होने से रहने वालों को घुटन जैसी परेशानी महसूस होती है, ऐसा लगता है कि ये किसी ‘डिब्बा घर’ से कम नहीं है. इलाके की बनावट का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि कई संकरी गलियों में दोपहर के समय भी सूर्य की रोशनी जमीन तक नहीं पहुंचती. जगह-जगह किराए के कमरे और पीजी अवेलेबल होने के बोर्ड लगे हैं.

हाईकोर्ट ने भी उठाए सवाल

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने प्राइवेट पीजी और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई है. अदालत ने कहा कि अनसेफ बिल्डिंग से होने वाली घटनाओं के लिए सिर्फ मकान मालिकों को जिम्मेदार ठहराना काफी नहीं है. इससे जुड़ी रेगुलेटरी एजेंसियों को भी अपनी कानूनी जिम्मेदारियां निभानी होंगी. कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम को पीजी और हॉस्टल का ऑडिट करने और उनके लिए मौजूद रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की जानकारी देने को कहा है. अदालत ने बिना इजाजत कंस्ट्रक्शन और तय लिमिट से ज्यादा मंजिल बनाए जाने की समस्या पर भी चिंता जताई.

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दिल्ली सरकार का सख्त रुख

दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD के डिप्टी कमिश्नर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया है. उन्होंने बताया कि बिल्डिंग मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है. सरकार ने दिल्ली में बिना इजाजत बनाई गई 5वीं मंजिल वाली इमारतों को सील करने के आदेश दिए हैं. आसपास के पीजी और भवनों की भी जांच की जा रही है और नियमों का उल्लंघन मिलने पर सीलिंग समेत कड़ी कार्रवाई की जाएगी. सत्य निकेतन की घटना ने साफ कर दिया है कि छात्रों के लिए बजट पीजी की जरूरत के साथ उनकी सुरक्षा भी उतनी ही अहम है. अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन पूरे इलाके के पीजी और बहुमंजिला भवनों की जांच कितनी गंभीरता से करता है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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