दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में पढ़ाई कर रहे लाखों छात्रों के लिए एक बहुत ही राहत भरी और काम की खबर आई है. अक्सर देखा जाता है कि पहले साल में कम क्रेडिट मिलने की वजह से छात्रों को अगले साल में प्रमोट होने से रोक दिया जाता था या उनका एक साल बर्बाद होने का डर बना रहता था.
लेकिन अब डीयू प्रशासन ने पासिंग क्राइटेरिया (Passing Criteria) में बड़ी छूट दे दी है. नए फैसले के मुताबिक, कम क्रेडिट स्कोर वाले छात्रों को भी अगले एकेडमिक ईयर में प्रमोट किया जाएगा और उनकी पढ़ाई बीच में नहीं रुकेगी.
आइए, समझते हैं कि डीयू का यह नया नियम क्या है और इससे किस बैच के छात्रों को फायदा मिलेगा.
क्या है DU का नया क्रेडिट रूल?
दिल्ली यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत लागू अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क (UGCF-2022) के अनुसार पढ़ाई होती है. पहले के नियमों के अनुसार, किसी भी छात्र को फर्स्ट ईयर से सेकंड ईयर (तीसरे सेमेस्टर) में जाने के लिए दोनों सेमेस्टर के कुल 44 क्रेडिट में से कम से कम 28 क्रेडिट हासिल करना अनिवार्य था. जिन छात्रों के 28 से कम क्रेडिट होते थे, उन्हें प्रमोट नहीं किया जाता था.
डीयू के परीक्षा नियंत्रक (Controller of Examinations) के नोटिफिकेशन के मुताबिक, कम से कम 28 क्रेडिट वाली शर्त को हटा दिया गया है. यानी अगर आपके क्रेडिट 28 से कम भी हैं, तब भी आपको अगली क्लास में जाने और पढ़ने का मौका मिलेगा.
किन छात्रों को मिलेगा इस छूट का फायदा?
यह राहत डीयू के सभी छात्रों के लिए नहीं, बल्कि एक तय बैच के लिए लागू की गई है. यह छूट विशेष रूप से 2025-2026 बैच के उन छात्रों को मिलेगी जिन्होंने अपने अंडरग्रेजुएट (UG) प्रोग्राम का पहला साल (दो सेमेस्टर) पूरा कर लिया है. जिन छात्रों को क्रेडिट कम होने की वजह से अपना साल खराब होने का डर सता रहा था, वे अब बिना किसी रुकावट के अगले एकेडमिक ईयर में शामिल हो सकेंगे.
छात्रों के लिए एक जरूरी चुनौती
भले ही यूनिवर्सिटी ने प्रमोट होने का रास्ता साफ कर दिया है, लेकिन छात्रों के सामने समय की एक बड़ी चुनौती रहने वाली है. प्रमोट होने वाले छात्रों के तीसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं करीब 2 महीने बाद ही शुरू होने वाली हैं. ऐसे में प्रमोट हुए छात्रों को कम समय में अपने नए सेमेस्टर का सिलेबस पूरा करना होगा. यूनिवर्सिटी ने साफ किया है कि इस एक छूट के अलावा बाकी सभी पुराने नियम और शर्तें पहले की तरह ही बनी रहेंगी.
डीयू का यह कदम उन छात्रों के लिए संजीवनी बूटी जैसा है जो किसी वजह से पहले साल में जरूरी 28 क्रेडिट हासिल नहीं कर पाए थे. अब उनका साल बर्बाद नहीं होगा, हालांकि उन्हें अगले सेमेस्टर की परीक्षाओं में अच्छे अंक और क्रेडिट हासिल करने के लिए थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी होगी.