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दिल्ली

गैस चैंबर बना देश का दिल… राजधानी में जीना हुआ मुश्किल! AQI 440 के पार, 39 जगहों पर रेड अलर्ट

दिल्ली-NCR में प्रदूषण के कारण हालात बेहद गंभीर हो गए हैं और AQI 440 के पार पहुंच गया है. 39 इलाकों में रेड अलर्ट जारी किया गया है, जिससे पूरा क्षेत्र गैस चैंबर में तब्दील हो गया है.

Author Written By: Raja Alam Updated: Jan 18, 2026 21:43
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रविवार को दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. राजधानी के ऊपर स्मॉग की एक इतनी मोटी परत छा गई है कि दिन में भी विजिबिलिटी कम हो गई है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार शाम 4 बजे दिल्ली का औसत एक्यूआई 440 पहुंच गया जो गंभीर श्रेणी में आता है. प्रदूषण का सबसे बुरा असर गाजियाबाद में देखा गया जो 458 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है. महज 24 घंटे के अंदर गाजियाबाद के प्रदूषण स्तर में 60 अंकों से ज्यादा का उछाल आया है जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है. नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी हालात बहुत खराब हैं जहाँ हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में बनी हुई है.

राजधानी के 39 इलाकों में रेड अलर्ट

दिल्ली के वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों की रिपोर्ट डराने वाली है क्योंकि सभी 39 केंद्रों पर रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है. रोहिणी दिल्ली का सबसे प्रदूषित इलाका बनकर उभरा है जहाँ एक्यूआई 480 दर्ज किया गया है. इसके अलावा मुंडका और बवाना जैसे इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर 479 तक पहुंच गया है जो गंभीर प्लस की श्रेणी में आता है. दिल्ली के लगभग आधे निगरानी केंद्रों पर हालात इतने बदतर हैं कि वहां सांस लेना कई सिगरेट पीने के बराबर खतरनाक माना जा रहा है. फरीदाबाद और गुरुग्राम की स्थिति हालांकि दिल्ली के मुकाबले थोड़ी बेहतर है लेकिन वहां भी हवा खराब श्रेणी में ही बनी हुई है.

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बिगड़ते हालात देख लागू हुआ ग्रैप-4

प्रदूषण के इस जानलेवा स्तर को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रैप का चौथा चरण लागू कर दिया है. इससे पहले शनिवार को ही तीसरा चरण लागू किया गया था लेकिन हवा में सुधार न होने पर कड़े कदम उठाने पड़े हैं. ग्रैप-4 लागू होने का मतलब है कि अब दिल्ली में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक रहेगी. ट्रक और भारी वाहनों के प्रवेश को सीमित कर दिया गया है ताकि हवा में घुलने वाले जहरीले कणों को कम किया जा सके. सरकार की कोशिश है कि किसी भी तरह इस आपात स्थिति पर काबू पाया जा सके.

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स्कूलों और दफ्तरों के लिए नई गाइडलाइन जारी

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए बच्चों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए बड़े फैसले लिए गए हैं. कड़े प्रदूषण नियंत्रण उपायों के तहत दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों को हाइब्रिड मोड में क्लासेज चलाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बच्चों को इस जहरीली हवा में बाहर न निकलना पड़े. इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों को 50 प्रतिशत क्षमता के साथ काम करने का सुझाव दिया गया है और वर्क फ्रॉम होम पर जोर देने को कहा गया है. इन उपायों का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करना है क्योंकि वाहनों से निकलने वाला धुंआ पीएम 2.5 प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है.

First published on: Jan 18, 2026 09:43 PM

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