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भरत तिवारी एनकाउंटर पर धीरेंद्र शास्त्री ने कही बड़ी बात, न्याय दिलाने के लिए आज हो रही महापंचायत

महापंचायत का कार्यक्रम स्थल कुंडवा शिव कुंडेश्वर नाथ मंदिर, बिलौटी निर्धारित किया गया है. पोस्टर में लोगों से बड़ी संख्या में पहुंचकर भरत तिवारी के पक्ष में आवाज बुलंद करने की अपील की गई है.

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भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर न्याय की मांग तेज होती जा रही है. इसी कड़ी में बुधवार को बिलौटी स्थित कुंडवा शिव कुंडेश्वर नाथ मंदिर परिसर में एक विशाल महापंचायत आयोजित की गई है. जारी पोस्टर के अनुसार, ‘भरत तिवारी को न्याय दिलाने के उद्देश्य से आयोजित इस महापंचायत में सर्व समाज और 36 बिरादरी के लोगों की भागीदारी होगी. आयोजकों का दावा है कि इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों से करीब 10 हजार लोग शामिल होंगे.’

महापंचायत का कार्यक्रम स्थल कुंडवा शिव कुंडेश्वर नाथ मंदिर, बिलौटी निर्धारित किया गया है. पोस्टर में लोगों से बड़ी संख्या में पहुंचकर भरत तिवारी के पक्ष में आवाज बुलंद करने की अपील की गई है. भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है. ऐसे में प्रस्तावित महापंचायत को इस मामले में जनसमर्थन जुटाने और न्याय की मांग को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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एनकाउंटर केस में बाबा बागेश्वर की एंट्री


भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बाबा बागेश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भी एंट्री हो गई है. एनकाउंटर मामले में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अपराधी हो तो भी सजा कोर्ट दे, गोली नहीं. उन्होंने एनकाउंटर की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की. इस बीच धीरेंद्र शास्त्री ने ये भी कहा कि वो बिटौली गांव जाएंगे और भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात करेंगे.

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बिहार के पूर्व DGP ने किया बड़ा दावा


इस पूरे मामले पर बिहार के पूर्व DGP अभयानंद ने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो फुटेज के आधार पर यह पूरी घटना एनकाउंटर नहीं, बल्कि सीधे-सीधे हत्या का मामला प्रतीत होती है. घटना के समय मृतक भरत तिवारी द्वारा किए जा रहे फेसबुक लाइव और मीडिया में आए वीडियो क्लिप्स को लेकर पूर्व डीजीपी अभ्यानंद ने कहा, ‘वीडियो में दिखाई दे रहा है कि उस अकेले व्यक्ति ने अपना हथियार नीचे फेंक दिया था. वह निहत्था था और उसकी तरफ से कोई फायरिंग नहीं हो रही थी. जब कोई अपराधी आत्मसमर्पण कर दे या हथियार डाल दे, तो उसे घेरकर गोली मार देना एनकाउंटर नहीं कहलाता. अगर ट्रायल के दौरान यह बात अदालत में साबित हो गई, तो गोली मारने वाले पुलिसकर्मी को लोअर कोर्ट से मृत्युदंड होगी और टीम के अन्य पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास भुगतनी पड़ेगी. इस धारा में तीसरी कोई सजा होती ही नहीं है.’

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First published on: Jun 24, 2026 02:21 PM

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