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अमिताभ ओझा, पटना
Gunda Bank of Bihar : गुंडा बैंक …एक ऐसा सिंडिकेट जिससे न सिर्फ सरकार को करोड़ों का चूना लगाया जाता है बल्कि इनके चंगुल में फंसकर कई जिंदगियां तबाह हो गई। सूदखोरों की एक ऐसी समानांतर व्यवस्था जिसके चक्रवृद्धि व्याज के चक्रव्यूह में जो फंस गया वो बर्बाद हो गया। ‘न खाता न बही ये जो कहे वही सही…’ इनकी दबंगई का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि पटना के खुशरूपुर में जहां एक दलित महिला के साथ सूदखोरों ने हैवानियत की, वहीं दूसरी तरफ कटिहार में एक महिला को बकाये रकम के लिए ऐसा पीटा कि अस्पताल में उसकी मौत हो गई, लेकिन यह कोई पहली घटना नहीं है। आज आपको बताएंगे इस गुंडा बैंक की हकीकत …इस गुंडा बैंक में शामिल वो माफिया जो पैसों के लालच में इंसानियत के दुश्मन बन गए हैं।
आपके मन में भी यह सवाल कौंध रहा होगा कि ये गुंडा बैंक आखिर होता क्या है ? तो सबसे पहले आप जान लीजियेगा इन दो घटनाओ को.. पटना के खुशरूपुर में एक दलित महिला ने गांव के सूदखोर से एक साल पहले पंद्रह सौ रुपया कर्ज लिया था, पांच हजार से ज्यादा इसका सूद दे दिया लेकिन दबंग सूदखोर ने पैसे के लिए महिला के साथ हैवानियत की। वह यहीं नहीं रुका, उसे नंगा कर पीटा, फिर उस पर पेशाब करवाया गया…. मामला थाने में गया तो दबंग सूदखोर फरार हो गया, लेकिन अभी यह मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि गुरुवार को कटिहार के फालका ओपी इलाके में एक महिला को दबंग सूदखोरों ने ब्याज के पैसे के लिए घर में घुसकर पिटाई की, जिससे वह गंभीर रूप से जख़्मी हो गई। उसने अस्पताल में जाते-जाते दम तोड़ दिया। परिवार वालों का आरोप, गुंडा बैंक चलाने वाले सूदखोरों पर है, जिनसे महिला ने बीस हजार रुपया कर्ज लिया था।
इससे पहले पिछले वर्ष दिसंबर में बिहार के नवादा के फल व्यवसाई केदार गुप्ता ने अपनी पत्नी अनीता देवी, बेटी गुड़िया कुमारी, शबनम कुमारी, बेटा प्रिंस कुमार और छोटी बेटी साक्षी कुमारी के साथ जहर खाकर जान दे दी। केदार नाथ ने मरने के पहले एक सुसाइड नोट छोड़ा है जिसमें लिखा है कि वह आर्थिक तंगी मे फंस गया था। सूदखोरों ने कर्ज लिया था जो लगभग 12 लाख रुपये है। परिवार, मूलधन से ज्यादा ब्याज दे चुका है, लेकिन अब असमर्थ है। मृतक गुप्ता के बेटे अमित गुप्ता के अनुसार सूदखोरों की हरकत से परेशान थे, बार-बार बेटी को उठा लेने और जान मरने की धमकी देते थे इसलिए उनके पिता ने जान दे दी। मृतक के बेटे अमित गुप्ता के अनुसार केदार नाथ गुप्ता ने घर के बाहर जाकर पूरे परिवार के साथ जहर खाया था उनके एक बेटा और एक बेटी दिल्ली में रहते थे इसलिए वो बच गए।
इससे पहले अररिया जिले के फारबिसगंज के रहने वाले रंजीत जायसवाल की कहानी भी ऐसी ही है। 2020 में लॉक डाउन के पहले रंजित ने सूदखोर के पास अपना घर गिरवी रख कर कर्ज लिया था, वह सोच रहा था कि वह एक होटल खोलेगा लेकिन लॉकडाउन में वह बर्बाद हो गया। सूदखोर जो अपना निजी बैंक चलाते थे, उनसे रंजीत इतना परेशान हो गया कि जनवरी 2021 में उसने ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली। इसके बाद भी उसके परिवार वालों पर तरस नहीं खाया और उसके घर पर भी कब्ज़ा जमा लिया। आज रंजित का परिवार दर-दर की ठोकरें खा रहा है। इसी तरह से मार्च 2020 में कटिहार जिले के रहने वाले एक व्यवसाई ने अपनी पत्नी चार साल के बेटे के साथ आत्महत्या कर ली थी , इस मामले की जाँच के दौरान ही पुलिस रिपोर्ट में ‘निजी बैंको को गुंडा बैंक’ कहा गया था। इसके बाद भागलपुर में भी एक ऐसी ही घटना सामने आई थी, जिसमें एक व्यवसाई ने कर्ज नहीं चुकाने की वजह से परिवार के साथ आत्म हत्या कर ली थी।
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दरअसल गरीब व जरूरतमंद लोगों को दबंग ऊंची सूद पर पैसा देते हैं । इसकी कोई लिखा-पढ़ी या रिकार्ड नहीं होता, सब जुबानी चलता है। पैसा समय पर नहीं चुकाने पर दबंग ब्याज पर पैसा लेने वालों की जमीन जबरिया अपने नाम लिखवा लेते हैं। यदि वसूली जाने वाली राशि से जमीन की कीमत अधिक हुई तो दबंग शेष राशि अदा करने का भरोसा देकर जमीन उनसे ले लेते हैं और पैसे भी नहीं देते।
सीमांचल इलाकों में चल रहे गुंडा बैंक के मामले में पटना हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया था। जून 22 में पटना हाईकोर्ट ने सीमांचल में चल रहे गुंडा बैंक पर लगाम लगाने के लिए एडीजी डॉ कमल किशोर सिंह की अध्यक्षता में एसआईटी गठन का आदेश दिया है। एडीजी के नेतृत्व में जब जाँच शुरू हुई तो कई खुलासे हुए क्योंकि यह मामला सिर्फ दो-चार जिलों तक ही नहीं सीमित नहीं था बल्कि इसके तार कई राज्यों से भी जुड़े थे।
वैसे तो पूरे प्रदेश में गुंडा बैंक संचालकों का संगठित गिरोह है लेकिन सीमांचल इलाके में गुंडा बैंक ज्यादा सक्रिय है। ऐसे कथित बेनामी बैंक के संचालक अररिया,भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार में सर्वाधिक हैं। इनमें कई रसूखदार चेहरे हैं जो पर्दे के पीछे से गतिविधियां कमांड करते हैं। कई तो राजनीति में भी किस्मत आजमा चुके हैं। हद तो यह है कि इस खेल में कुछ सरकारी मुलाजिम भी हिस्सेदार हैं। सूत्रों की मानें तो ये अधिकारी जमीन से जुड़े महकमे में सीमांचल क्षेत्र में तैनात रहे हैं। इनके आयकर रिटर्न, बैंक में जमा और उनके द्वारा अर्जित संपत्ति व पूंजी निवेश में जमीन-आसमान का अंतर है। शुरुआती छानबीन में पता चला है कि ऐसे लोगों ने जायदाद के रूप में जमीन हासिल करने के लिए निरीह लोगों को शिकार बनाया है। सूद पर दिए पैसों के एवज में लोगों की घर-घराड़ी व खेत-जमीन अपने नाम करवा ली है। ऐसे ही एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इसकी व्यापक जांच का आदेश दे दिया।
भागलपुर और पूर्णिया में भी कथित तौर पर गुंडा बैंक के कई संचालक हैं। कटिहार के भी कई नाम हैं। कटिहार में मानसी, फलका, हसनगंज, कोढ़ा, बरारी में अफसर रहे कुछ लोग भी ऐसे तत्वों को पनाह देते रहे हैं जो ऐसी गतिविधियों के सर्वेसर्वा हैं। एसआईटी की जाँच के दौरान बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियों के जानकारी मिलने के बाद इस मामले की जानकारी आयकर विभाग को दी गई और इस मामले में आयकर विभाग की एंट्री हो गई। अब फोकस उन पर है, जिन्होंने बीते पांच वर्षों के दौरान सीमांचल के इलाके में कई जमीनों की रजिस्ट्री कराई है। 500 से अधिक ऐसे लोगों की सूची आयकर विभाग को सौंपी गई। सितम्बर में आयकर विभाग ने सीमांचल में अपना ‘ऑपरेशन गुंडा बैंक’ शुरू किया। एक साथ ढाई सौ अधिकारियों ने भागलपुर ,पूर्णिया, अररिया और नौगछिया के अलावा झारखण्ड के देवघर और पश्चिम बंगाल के कोलकाता और आसनसोल में कारवाई शुरू की। पूर्णिया इलाके में गुंडा बैंक संचालकों का ज्यादा असर है। पूर्णिया के धमदहा रुपौली आदि इलाकों में इनका इतना खौफ है कि कोई इनकी मर्जी के बिना अपने घर में कोई आयोजन भी नहीं कर सकता, वहीं कर्ज लेने वालो की जिंदगी बंधुआ मजदूरों से भी बदतर हो चुकी है।
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