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रोकता रहा परिवार, पर कोर्ट ने दी प्यार को मंजूरी… पढ़ें बिहार की जन्नत और नेहा की अनोखी शादी की दास्तां

समलैंगिक विवाह से जुड़े मामले में बिहार की कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है और फैसला समलैंगिक शादी करने वाली सहेलियों के हक में आया है. कोर्ट ने दोनों की शादी को मंजूरी देकर पुलिस सुरक्षा में घर लिए रवाना करवा दिया है.

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दोस्ती हुई और भावनाएं बदलीं तो दोनों ने जिंदगीभर साथ रहने का फैसला कर लिया. (Credit-AI)

बिहार की 2 सहेलियों के प्यार को परिजनों के विरोध के बावजूद आजादी और मंजूरी दोनों मिल गई है. जी हां, शेखपुरा कोर्ट ने समलैंगिक शादी करने वाली दोनों सहेलियों को बालिग करार देकर साथ रहने की इजाजत दे दी है और दोनों को पुलिस सुरक्षा में कोलकाता के लिए रवाना कर दिया है. दोनों सहेलियों ने समलैंगिक शादी की तो परिजनों ने पुलिस को शिकायत दी. मामला कोर्ट पहुंचा तो दोनों ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया. दोनों पक्षों के सुनने के बाद कोर्ट ने सहेलियों के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें साथ रहकर अपनी मर्जी से अपने अनुसार खुलकर जिंदगी जीने की इजाजत दे दी.

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दोनों ने घर से भागकर किया है समलैंगिक विवाह

समलैंगिक विवाह करने वाली लड़कियों के नाम बिहार के भागलपुर जिला निवासी नेहा और शेखपुरा जिले के गांव चेवाड़ा निवासी जन्नत है. दोनों कोलकाता में अपने-अपने परिवार के साथ रहती थीं, जहां दोनों की दोस्ती हुई और फिर दोनों ने साथ रहने का फैसला करते हुए पिछले महीने कोलकाता से निकलकर समलैंगिक विवाह कर लिया. शादी का विरोध करते हुए जन्नत के परिवार ने चेवाड़ा थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने दोनों सहेलियों पर घर लौटने का दबाव बनाया तो दोनों ने 30 अक्टूबर को कोर्ट में सरेंडर कर दिया. दोनों ने जज के सामने अपना पक्ष रखा और साथ रहने की इच्छा जताई.

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जन्नत के परिजनों ने शादी का कड़ा विरोध जताया

चेवाड़ा थानाध्यक्ष ने मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि जन्नत के परिवार से उसे अपने साथ ले जाने की इच्छा जताई्, लेकिन उसने परिवार के साथ जाने से इनकार करके नेहा के साथ रहने की इच्छा जताई. जज ने कानून के अनुसार, दोनों की इच्छा का सम्मान किया और उनके बालिग करार देकर कानून के तहत उनके अधिकारों के बारे में बताया. जज ने दोनों को अपनी इच्छा से आजाद होकर साथ रहने और जिंदगी जीने की छूट दी. जज के आदेश पर दोनों सहेलियों को पुलिस सुरक्षा में किऊल ले जाकर कोलकाता की ट्रेन में बैठाया गया. दोनों के बारे में कोलकाता पुलिस को भी जानकारी दी गई.

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सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी मान्यता देने से इनकार किया

बता दें कि भारत में समलैंगिक शादी को कानूनी मान्यता नहीं मिली है. 17 अक्टूबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच ने समलैंगिक शादी को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया, क्योंकि इसके पक्ष में सिर्फ 2 जज थे और 3 खिलाफ थे. वहीं विशेष विवाह अधिनियम 1954 में संशोधन करके समलैंगिंक शादी को मान्यता दी जा सकती है या इसके लिए नियम बनाए जा सकते हैं और ऐसा करने का अधिकार सिर्फ संसद या विधानसभा के पास है. इसके विपरीत संविधान के अनुच्छे 21 के तहत समलैंगिक जोड़े लिव-इन में रह सकते हैं और जरूरत पड़ने पर पुलिस सुरक्षा ले सकते हैं.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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